तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे भाषा के विशेषज्ञ पढ़कर कहें कि ये कलम का छोटा सिपाही ऐसा है तो भीष्म साहनी, प्रेमचंद, महादेवी वर्मा, जयशंकर प्रसाद, सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला', हरिवंश राय बच्चन, फणीश्वर नाथ रेणु आदि कैसे रहे होंगे... गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.

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2017 के व्रत त्यौहार

हम आपके लिए वर्ष 2017 के व्रत, पर्व और त्योहार की सूची लाए हैं–

राजेश मिश्रा एक प्रोग्राम में मशहूर प्रवचन वाचिका जया किशोरीजी के साथ..
Rajesh Mishra With Jaya Kishori ji

जनवरी माह

01 जनवरी (रविवार) – अंग्रेज़ी नव वर्ष
02 जनवरी (सोमवार) – विनायक चतुर्थी
03 जनवरी (मंगलवार) – स्कन्द षष्ठी
05 जनवरी (बृहस्पतिवार) – गुरु गोबिन्द सिंह जयन्ती
06 जनवरी (शुक्रवार) – मासिक दुर्गाष्टमी, शाकम्भरी उत्सवारम्भ
08 जनवरी (रविवार) – पौष पुत्रदा एकादशी, तैलंग स्वामी जयन्ती, मासिक कार्तिगाई
09 जनवरी (सोमवार) – गौण पौष पुत्रदा एकादशी, वैष्णव पौष पुत्रदा एकादशी, कूर्म द्वादशी
10 जनवरी (मंगलवार) – प्रदोष व्रत, रोहिणी व्रत
11 जनवरी (बुधवार) – अरुद्र दर्शन
12 जनवरी (बृहस्पतिवार) – पौष पूर्णिमा, शाकम्भरी पूर्णिमा, पूर्णिमा उपवास
13 जनवरी (शुक्रवार) – माघ प्रारम्भ "उत्तर, लोहड़ी
14 जनवरी (शनिवार) – पोंगल, मकर संक्रान्ति
15 जनवरी (रविवार) – संकष्टी चतुर्थी, सकट चौथ, माघ बिहु
19 जनवरी (बृहस्पतिवार) – स्वामी विवेकानन्द जयन्ती, कालाष्टमी
23 जनवरी (सोमवार) – षटतिला एकादशी, सुभाष चन्द्र बोस जयन्ती
25 जनवरी (बुधवार) – प्रदोष व्रत, मेरु त्रयोदशी
26 जनवरी (बृहस्पतिवार) – मासिक शिवरात्रि, 68 वाँ गणतन्त्र दिवस
27 जनवरी (शुक्रवार) – माघ अमावस्या, दर्श अमावस्या, मौनी अमावस, थाई अमावसाइ
28 जनवरी (शनिवार) – गुप्त नवरात्रि प्रारम्भ
29 जनवरी (रविवार) – चन्द्र दर्शन
31 जनवरी (मंगलवार) – विनायक चतुर्थी, गणेश जयन्ती

Read in English : Indian Festivals 2017 with Holidays List

फरवरी माह

01 फरवरी (बुधवार) – वसन्त पञ्चमी
02 फरवरी (बृहस्पतिवार) – स्कन्द षष्ठी
03 फरवरी (शुक्रवार) – रथ सप्तमी, नर्मदा जयन्ती
04 फरवरी (शनिवार) – भीष्म अष्टमी, मासिक दुर्गाष्टमी
05 फरवरी (रविवार) – मासिक कार्तिगाई
06 फरवरी (सोमवार) – रोहिणी व्रत
07 फरवरी (मंगलवार) – जया एकादशी, भीष्म द्वादशी
08 फरवरी (बुधवार) – प्रदोष व्रत
10 फरवरी (शुक्रवार) – माघ पूर्णिमा, चन्द्र ग्रहण, पूर्णिमा उपवास, गुरु रविदास जयन्ती, ललिता जयन्ती, थाई पूसम
11 फरवरी (शनिवार) – फाल्गुन प्रारम्भ "उत्तर
12 फरवरी (रविवार) – कुम्भ संक्रान्ति
14 फरवरी (मंगलवार) – संकष्टी चतुर्थी, संत वेलेनटाइन डे
17 फरवरी (शुक्रवार) – यशोदा जयन्ती
18 फरवरी (शनिवार) – शबरी जयन्ती, कालाष्टमी
19 फरवरी (रविवार) – जानकी जयन्ती
21 फरवरी (मंगलवार) – महर्षि दयानन्द सरस्वती जयन्ती
22 फरवरी (बुधवार) – विजया एकादशी
24 फरवरी (शुक्रवार) – प्रदोष व्रत
25 फरवरी (शनिवार) – महाशिवरात्री
26 फरवरी (रविवार) – फाल्गुन अमावस्या, दर्श अमावस्या, सूर्य ग्रहण
27 फरवरी (सोमवार) – चन्द्र दर्शन
28 फरवरी (मंगलवार) – फुलैरा दूज, रामकृष्ण जयन्ती

मार्च माह

Rajesh Mishra, Kolkata (Near Jalmahal, Jaipur)

02 मार्च (बृहस्पतिवार) – विनायक चतुर्थी
03 मार्च (शुक्रवार) – स्कन्द षष्ठी
04 मार्च (शनिवार) – अष्टाह्निका विधान प्रारम्भ, मासिक कार्तिगाई
05 मार्च (रविवार) – मासिक दुर्गाष्टमी, रोहिणी व्रत
08 मार्च (बुधवार) – आमलकी एकादशी
09 मार्च (बृहस्पतिवार) – नरसिंह द्वादशी
10 मार्च (शुक्रवार) – प्रदोष व्रत
11 मार्च (शनिवार) – चौमासी चौदस, मासी मागम
12 मार्च (रविवार) – छोटी होली, होलिका दहन, वसन्त पूर्णिमा, दोल पूर्णिमा, पूर्णिमा उपवास, अष्टाह्निका विधान पूर्ण, फाल्गुन पूर्णिमा, लक्ष्मी जयन्ती, चैतन्य महाप्रभु जयन्ती, अट्टुकल पोंगल
13 मार्च (सोमवार) – होली, चैत्र प्रारम्भ "उत्तर
14 मार्च (मंगलवार) – भाई दूज, भ्रातृ द्वितीया, मीन संक्रान्ति, कारादाइयन नौम्बू
15 मार्च (बुधवार) – शिवाजी जयन्ती
16 मार्च (बृहस्पतिवार) – संकष्टी चतुर्थी
17 मार्च (शुक्रवार) – रंग पञ्चमी
19 मार्च (रविवार) – भानु सप्तमी, शीतला सप्तमी
20 मार्च (सोमवार) – बसोड़ा, शीतला अष्टमी, कालाष्टमी, वसन्त सम्पात
21 मार्च (मंगलवार) – वर्षी तप आरम्भ
24 मार्च (शुक्रवार) – पापमोचिनी एकादशी
25 मार्च (शनिवार) – प्रदोष व्रत, शनि त्रयोदशी
26 मार्च (रविवार) – मासिक शिवरात्रि
27 मार्च (सोमवार) – दर्श अमावस्या
28 मार्च (मंगलवार) – चैत्र अमावस्या, चैत्र नवरात्रि, गुड़ी पड़वा, युगादी
29 मार्च (बुधवार) – चन्द्र दर्शन, झूलेलाल जयन्ती
30 मार्च (बृहस्पतिवार) – गौरीपूजा, गणगौर, मत्स्य जयन्ती
31 मार्च (शुक्रवार) – विनायक चतुर्थी

अप्रैल माह

01 अप्रैल (शनिवार) – लक्ष्मी पञ्चमी, स्कन्द षष्ठी, बैंक अवकाश, रोहिणी व्रत
02 अप्रैल (रविवार) – यमुना छठ
03 अप्रैल (सोमवार) – नवपद ओली प्रारम्भ
04 अप्रैल (मंगलवार) – मासिक दुर्गाष्टमी, महातारा जयन्ती
05 अप्रैल (बुधवार) – राम नवमी
07 अप्रैल (शुक्रवार) – कामदा एकादशी, वामन द्वादशी
08 अप्रैल (शनिवार) – प्रदोष व्रत, शनि त्रयोदशी
09 अप्रैल (रविवार) – महावीर स्वामी जयन्ती, पैन्गुनी उथिरम
10 अप्रैल (सोमवार) – पूर्णिमा उपवास, हजरत अली का जन्मदिन
11 अप्रैल (मंगलवार) – हनुमान जयन्ती, चैत्र पूर्णिमा, नवपद ओली पूर्ण
12 अप्रैल (बुधवार) – वैशाख प्रारम्भ "उत्तर
14 अप्रैल (शुक्रवार) – संकष्टी चतुर्थी, सोलर नववर्ष, मेष संक्रान्ति, बैसाखी, पुथन्डू, विषु कानी, अम्बेडकर जयन्ती, गुड फ्राइडे
15 अप्रैल (शनिवार) – पहेला वैशाख
16 अप्रैल (रविवार) – ईस्टर
19 अप्रैल (बुधवार) – कालाष्टमी
22 अप्रैल (शनिवार) – बरूथिनी एकादशी, वल्लभाचार्य जयन्ती
23 अप्रैल (रविवार) – वैष्णव बरूथिनी एकादशी
24 अप्रैल (सोमवार) – प्रदोष व्रत, मासिक शिवरात्रि
26 अप्रैल (बुधवार) – वैशाख अमावस्या, दर्श अमावस्या
27 अप्रैल (बृहस्पतिवार) – चन्द्र दर्शन
28 अप्रैल (शुक्रवार) – परशुराम जयन्ती, अक्षय तृतीया, वर्षी तप पारण
29 अप्रैल (शनिवार) – मातङ्गी जयन्ती, विनायक चतुर्थी, रोहिणी व्रत
30 अप्रैल (रविवार) – शंकराचार्य जयन्ती, सूरदास जयन्ती

मई माह

Rajesh Mishra, Kolkata (Shyam Baba Aaradhna in Train)

01 मई (सोमवार) – स्कन्द षष्ठी, रामानुज जयन्ती
02 मई (मंगलवार) – गंगा सप्तमी
03 मई (बुधवार) – मासिक दुर्गाष्टमी, बगलामुखी जयन्ती
04 मई (बृहस्पतिवार) – सीता नवमी, अग्नि नक्षत्रम् प्रारम्भ
05 मई (शुक्रवार) – महावीर स्वामी कैवल्य ज्ञान, थ्रिस्सूर पूरम
06 मई (शनिवार) – मोहिनी एकादशी
07 मई (रविवार) – परशुराम द्वादशी, रबीन्द्रनाथ टैगोर जयन्ती
08 मई (सोमवार) – प्रदोष व्रत
09 मई (मंगलवार) – नरसिंघ जयन्ती, छिन्नमस्ता जयन्ती, टैगोर जयन्ती "बंगाल
10 मई (बुधवार) – वैशाख पूर्णिमा, कूर्म जयन्ती, बुद्ध पूर्णिमा, पूर्णिमा उपवास, चित्रा पूर्णनामी
11 मई (बृहस्पतिवार) – ज्येष्ठ प्रारम्भ "उत्तर, नारद जयन्ती
14 मई (रविवार) – संकष्टी चतुर्थी, वृषभ संक्रान्ति
18 मई (बृहस्पतिवार) – कालाष्टमी
21 मई (रविवार) – हनुमान जयन्ती "तेलुगू
22 मई (सोमवार) – अपरा एकादशी
23 मई (मंगलवार) – प्रदोष व्रत
24 मई (बुधवार) – मासिक शिवरात्रि
25 मई (बृहस्पतिवार) – ज्येष्ठ अमावस्या, दर्श-भावुका अमावस्या, शनि जयन्ती, वट सावित्री व्रत
26 मई (शुक्रवार) – रोहिणी व्रत
27 मई (शनिवार) – चन्द्र दर्शन
28 मई (रविवार) – महाराणा प्रताप जयन्ती, अग्नि नक्षत्रम् समाप्त
29 मई (सोमवार) – विनायक चतुर्थी
30 मई (मंगलवार) – स्कन्द षष्ठी

जून माह

02 जून (शुक्रवार) – मासिक दुर्गाष्टमी, धूमावती जयन्ती
03 जून (शनिवार) – महेश नवमी, गंगा दशहरा
05 जून (सोमवार) – गायत्री जयन्ती, निर्जला एकादशी, रामलक्ष्मण द्वादशी
06 जून (मंगलवार) – प्रदोष व्रत
07 जून (बुधवार) – वैकासी विसाकम
08 जून (बृहस्पतिवार) – वट पूर्णिमा व्रत
09 जून (शुक्रवार) – ज्येष्ठ पूर्णिमा, पूर्णिमा उपवास, कबीरदास जयन्ती
10 जून (शनिवार) – आषाढ़ प्रारम्भ "उत्तर
13 जून (मंगलवार) – संकष्टी चतुर्थी
15 जून (बृहस्पतिवार) – मिथुन संक्रान्ति
17 जून (शनिवार) – कालाष्टमी
20 जून (मंगलवार) – योगिनी एकादशी
21 जून (बुधवार) – प्रदोष व्रत, साल का सबसे बड़ा दिन
22 जून (बृहस्पतिवार) – मासिक शिवरात्रि
23 जून (शुक्रवार) – दर्श अमावस्या, जमात उल-विदा, रोहिणी व्रत
24 जून (शनिवार) – आषाढ़ अमावस्या, गुप्त नवरात्रि प्रारम्भ
25 जून (रविवार) – चन्द्र दर्शन, जगन्नाथ रथयात्रा
26 जून (सोमवार) – ईद उल-फ़ित्र, रमज़ान
27 जून (मंगलवार) – विनायक चतुर्थी
28 जून (बुधवार) – स्कन्द षष्ठी
30 जून (शुक्रवार) – अष्टाह्निका विधान प्रारम्भ

जुलाई माह

Rajesh Mishra, Kolkata

01 जुलाई (शनिवार) – मासिक दुर्गाष्टमी
04 जुलाई (मंगलवार) – देवशयनी एकादशी
05 जुलाई (बुधवार) – गौरी व्रत प्रारम्भ "गुजरात, वासुदेव द्वादशी
06 जुलाई (बृहस्पतिवार) – प्रदोष व्रत, जयापार्वती व्रत प्रारम्भ
07 जुलाई (शुक्रवार) – चौमासी चौदस
08 जुलाई (शनिवार) – कोकिला व्रत "गुजरात, पूर्णिमा उपवास
09 जुलाई (रविवार) – व्यास पूजा, आषाढ़ पूर्णिमा, गुरु पूर्णिमा, गौरी व्रत समाप्त "गुजरात, अष्टाह्निका विधान पूर्ण
10 जुलाई (सोमवार) – सावन प्रारम्भ "उत्तर, श्रावण सोमवार व्रत "उत्तर
11 जुलाई (मंगलवार) – मंगला गौरी व्रत "उत्तर
12 जुलाई (बुधवार) – जयापार्वती व्रत समाप्त, संकष्टी चतुर्थी
16 जुलाई (रविवार) – भानु सप्तमी, कालाष्टमी, कर्क संक्रान्ति
17 जुलाई (सोमवार) – श्रावण सोमवार व्रत "उत्तर
18 जुलाई (मंगलवार) – मंगला गौरी व्रत "उत्तर
19 जुलाई (बुधवार) – कामिका एकादशी, मासिक कार्तिगाई
20 जुलाई (बृहस्पतिवार) – गौण कामिका एकादशी, वैष्णव कामिका एकादशी, रोहिणी व्रत
21 जुलाई (शुक्रवार) – प्रदोष व्रत, सावन शिवरात्रि
23 जुलाई (रविवार) – श्रावण अमावस्या, दर्श अमावस्या, हरियाली अमावस्या, आदि अमावसाइ
24 जुलाई (सोमवार) – चन्द्र दर्शन, श्रावण सोमवार व्रत
25 जुलाई (मंगलवार) – मंगला गौरी व्रत
26 जुलाई (बुधवार) – हरियाली तीज, विनायक चतुर्थी, अन्दल जयन्थी
27 जुलाई (बृहस्पतिवार) – नाग पञ्चमी
28 जुलाई (शुक्रवार) – कल्की जयन्ती, स्कन्द षष्ठी, ऋग्वेद उपाकर्म, यजुर्वेद उपाकर्म
29 जुलाई (शनिवार) – गायत्री जापम
30 जुलाई (रविवार) – भानु सप्तमी, तुलसीदास जयन्ती
31 जुलाई (सोमवार) – मासिक दुर्गाष्टमी, श्रावण सोमवार व्रत

अगस्त माह

01 अगस्त (मंगलवार) – मंगला गौरी व्रत
02 अगस्त (बुधवार) – आदि पेरुक्कू
03 अगस्त (बृहस्पतिवार) – श्रावण पुत्रदा एकादशी, दामोदर द्वादशी
04 अगस्त (शुक्रवार) – प्रदोष व्रत, वरलक्ष्मी व्रत
07 अगस्त (सोमवार) – श्रावण पूर्णिमा, राखी, रक्षा बन्धन, गायत्री जयन्ती, नारली पूर्णिमा, चन्द्र ग्रहण,पूर्णिमा उपवास, हयग्रीव जयन्ती, संस्कृत दिवस, श्रावण सोमवार व्रत
08 अगस्त (मंगलवार) – भाद्रपद प्रारम्भ "उत्तर
10 अगस्त (बृहस्पतिवार) – कजरी तीज
11 अगस्त (शुक्रवार) – संकष्टी चतुर्थी, संकटहरा चतुर्थी "तमिल, बोल चौथ "गुजरात
12 अगस्त (शनिवार) – नाग पञ्चम "गुजरात
13 अगस्त (रविवार) – बलराम जयन्ती, रांधण छठ "गुजरात
14 अगस्त (सोमवार) – शीतला सातम "गुजरात, जन्माष्टमी "स्मार्त, कालाष्टमी, आद्याकाली जयन्ती
15 अगस्त (मंगलवार) – जन्माष्टमी "इस्कॉन, दही हाण्डी, मासिक कार्तिगाई, स्वतन्त्रता दिवस
16 अगस्त (बुधवार) – रोहिणी व्रत
17 अगस्त (बृहस्पतिवार) – सिंह संक्रान्ति, मलयालम नव वर्ष
18 अगस्त (शुक्रवार) – अजा एकादशी
19 अगस्त (शनिवार) – पर्यूषण पर्वारम्भ, प्रदोष व्रत, शनि त्रयोदशी
20 अगस्त (रविवार) – मासिक शिवरात्रि
21 अगस्त (सोमवार) – भाद्रपद अमावस्या, दर्श अमावस्या, पिठोरी अमावस्या, पोला, वृषभोत्सव,सोमवती अमावस, सूर्य ग्रहण
23 अगस्त (बुधवार) – चन्द्र दर्शन
24 अगस्त (बृहस्पतिवार) – वराह जयन्ती, हरतालिका तीज, गौरी हब्बा
25 अगस्त (शुक्रवार) – सामवेद उपाकर्म, गणेश चतुर्थी
26 अगस्त (शनिवार) – ऋषि पञ्चमी, सम्वत्सरी पर्व
27 अगस्त (रविवार) – स्कन्द षष्ठी
28 अगस्त (सोमवार) – ललिता सप्तमी
29 अगस्त (मंगलवार) – गौरी आवाहन, राधा अष्टमी, मासिक दुर्गाष्टमी, महालक्ष्मी व्रत आरम्भ, दूर्वा अष्टमी
30 अगस्त (बुधवार) – गौरी पूजा
31 अगस्त (बृहस्पतिवार) – गौरी विसर्जन

सितम्बर माह

02 सितम्बर (शनिवार) – परिवर्तिनी एकादशी, कल्की द्वादशी, ईद-उल-जुहा, बकरीद
03 सितम्बर (रविवार) – वामन जयन्ती, भुवनेश्वरी जयन्ती, प्रदोष व्रत
04 सितम्बर (सोमवार) – ओणम
05 सितम्बर (मंगलवार) – अनन्त चतुर्दशी, गणेश विसर्जन, पूर्णिमा उपवास, पूर्णिमा श्राद्ध
06 सितम्बर (बुधवार) – भाद्रपद पूर्णिमा, प्रतिपदा श्राद्ध
07 सितम्बर (बृहस्पतिवार) – आश्विन प्रारम्भ "उत्तर, द्वितीया श्राद्ध
08 सितम्बर (शुक्रवार) – तृतीया श्राद्ध
09 सितम्बर (शनिवार) – चतुर्थी श्राद्ध, संकष्टी चतुर्थी
10 सितम्बर (रविवार) – महा भरणी, पञ्चमी श्राद्ध
11 सितम्बर (सोमवार) – षष्ठी श्राद्ध, मासिक कार्तिगाई
12 सितम्बर (मंगलवार) – सप्तमी श्राद्ध, महालक्ष्मी व्रत पूर्ण, रोहिणी व्रत
13 सितम्बर (बुधवार) – अष्टमी श्राद्ध, जीवितपुत्रिका व्रत, कालाष्टमी, अष्टमी रोहिणी
14 सितम्बर (बृहस्पतिवार) – नवमी श्राद्ध
15 सितम्बर (शुक्रवार) – दशमी श्राद्ध
16 सितम्बर (शनिवार) – इन्दिरा एकादशी, एकादशी श्राद्ध
17 सितम्बर (रविवार) – द्वादशी श्राद्ध, त्रयोदशी श्राद्ध, प्रदोष व्रत, कन्या संक्रान्ति, विश्वकर्मा पूजा
18 सितम्बर (सोमवार) – मघा श्राद्ध, चतुर्दशी श्राद्ध, मासिक शिवरात्रि
19 सितम्बर (मंगलवार) – सर्वपित्री दर्श अमावस्या, सर्वपित्रू अमावस्या
20 सितम्बर (बुधवार) – अश्विन अमावस्या
21 सितम्बर (बृहस्पतिवार) – चन्द्र दर्शन, नवरात्रि प्रारम्भ, घटस्थापना, महाराजा अग्रसेन जयन्ती
22 सितम्बर (शुक्रवार) – अल-हिजरा, इस्लामी नया साल
23 सितम्बर (शनिवार) – विनायक चतुर्थी, शरद्कालीन सम्पात
24 सितम्बर (रविवार) – ललिता पञ्चमी
25 सितम्बर (सोमवार) – स्कन्द षष्ठी
26 सितम्बर (मंगलवार) – बिल्व निमन्त्रण, कल्पारम्भ, अकाल बोधन
27 सितम्बर (बुधवार) – सरस्वती आवाहन, नवपत्रिका पूजा, नवपद ओली प्रारम्भ
28 सितम्बर (बृहस्पतिवार) – सरस्वती पूजा, दुर्गा अष्टमी, सन्धि पूजा
29 सितम्बर (शुक्रवार) – महा नवमी, दुर्गा बलिदान, आयुध पूजा, दक्षिण सरस्वती पूजा, बंगाल महा नवमी
30 सितम्बर (शनिवार) – सरस्वती बलिदान, सरस्वती विसर्जन, दुर्गा विसर्जन, दशहरा, विजयदशमी, बंगाल विजयदशमी, मैसूर दसरा, विद्याआरम्भम् का दिन, बुद्ध जयन्ती, मध्वाचार्य जयन्ती

अक्टूबर माह

01 अक्टूबर (रविवार) – पापांकुशा एकादशी, अशुरा का दिन, मुहर्रम
02 अक्टूबर (सोमवार) – पद्मनाभ द्वादशी, गाँधी जयन्ती
03 अक्टूबर (मंगलवार) – प्रदोष व्रत
05 अक्टूबर (बृहस्पतिवार) – अश्विन पूर्णिमा, कोजागर पूजा, शरद पूर्णिमा, पूर्णिमा उपवास, वाल्मीकि जयन्ती, मीराबाई जयन्ती, नवपद ओली पूर्ण
06 अक्टूबर (शुक्रवार) – कार्तिक प्रारम्भ "उत्तर
08 अक्टूबर (रविवार) – अट्ल तद्दी, करवा चौथ, संकष्टी चतुर्थी, मासिक कार्तिगाई
10 अक्टूबर (मंगलवार) – रोहिणी व्रत
12 अक्टूबर (बृहस्पतिवार) – अहोई अष्टमी, राधा कुण्ड स्नान, कालाष्टमी
15 अक्टूबर (रविवार) – रमा एकादशी
16 अक्टूबर (सोमवार) – गोवत्स द्वादशी
17 अक्टूबर (मंगलवार) – धन तेरस, यम पञ्चक प्रारम्भ, यम दीपम, प्रदोष व्रत, तुला संक्रान्ति
18 अक्टूबर (बुधवार) – नरक चतुर्दशी, तमिल दीपावली, काली चौदस, हनुमान पूजा, मासिक शिवरात्रि
19 अक्टूबर (बृहस्पतिवार) – दीवाली, लक्ष्मी पूजा, दीपमालिका, केदार गौरी व्रत, चोपड़ा पूजा, शारदा पूजा, काली पूजा, कमला जयन्ती, कार्तिक अमावस्या, दर्श अमावस्या
20 अक्टूबर (शुक्रवार) – गोवर्धन पूजा, अन्नकूट, बलि प्रतिपदा, द्यूत क्रीडा, नव सम्वत प्रारम्भ
21 अक्टूबर (शनिवार) – चन्द्र दर्शन, भैया दूज, यम द्वितीया
23 अक्टूबर (सोमवार) – नागुला चविति "तेलुगू, विनायक चतुर्थी
25 अक्टूबर (बुधवार) – लाभ पञ्चमी, सूर सम्हारम
26 अक्टूबर (बृहस्पतिवार) – छट पूजा
27 अक्टूबर (शुक्रवार) – अष्टाह्निका विधान प्रारम्भ
28 अक्टूबर (शनिवार) – गोपाष्टमी, मासिक दुर्गाष्टमी
29 अक्टूबर (रविवार) – अक्षय नवमी, जगद्धात्री पूजा
30 अक्टूबर (सोमवार) – कंस वध
31 अक्टूबर (मंगलवार) – देवुत्थान एकादशी, भीष्म पञ्चक प्रारम्भ

नवम्बर माह

01 नवम्बर (बुधवार) – तुलसी विवाह, योगेश्वर द्वादशी, प्रदोष व्रत
02 नवम्बर (बृहस्पतिवार) – वैकुण्ठ चतुर्दशी, विश्वेश्वर व्रत
03 नवम्बर (शुक्रवार) – मणिकर्णिका स्नान, चौमासी चौदस, देव दीवाली
04 नवम्बर (शनिवार) – कार्तिक पूर्णिमा, पुष्कर स्नान, पूर्णिमा उपवास, गुरु नानक जयन्ती, भीष्म पञ्चक समाप्त, अष्टाह्निका विधान पूर्ण, रथ यात्रा
05 नवम्बर (रविवार) – मार्गशीर्ष प्रारम्भ "उत्तर, मासिक कार्तिगाई
06 नवम्बर (सोमवार) – रोहिणी व्रत
07 नवम्बर (मंगलवार) – संकष्टी चतुर्थी
10 नवम्बर (शुक्रवार) – कालभैरव जयन्ती
14 नवम्बर (मंगलवार) – उत्पन्ना एकादशी, नेहरू जयन्ती
15 नवम्बर (बुधवार) – प्रदोष व्रत, अयप्पा उत्सव (15 नवम्बर से 14 जनवरी तक)
16 नवम्बर (बृहस्पतिवार) – मासिक शिवरात्रि, वृश्चिक संक्रान्ति, मण्डला काल प्रारम्भ
18 नवम्बर (शनिवार) – मार्गशीर्ष अमावस्या, दर्श अमावस्या
19 नवम्बर (रविवार) – चन्द्र दर्शन
22 नवम्बर (बुधवार) – विनायक चतुर्थी
23 नवम्बर (बृहस्पतिवार) – विवाह पञ्चमी, नाग पञ्चमी "तेलुगू
24 नवम्बर (शुक्रवार) – सुब्रहमन्य षष्ठी, चम्पा षष्ठी
26 नवम्बर (रविवार) – भानु सप्तमी
27 नवम्बर (सोमवार) – मासिक दुर्गाष्टमी
30 नवम्बर (बृहस्पतिवार) – मोक्षदा एकादशी, गीता जयन्ती, मत्स्य द्वादशी, गुरुवायुर एकादशी

दिसम्बर

01 दिसम्बर (शुक्रवार) – प्रदोष व्रत, हनुमान जयन्ती "कन्नड़, मिलाद उन-नबी, ईद-ए-मिलाद
02 दिसम्बर (शनिवार) – कार्तिगाई दीपम्
03 दिसम्बर (रविवार) – मार्गशीर्ष पूर्णिमा, दत्तात्रेय जयन्ती, पूर्णिमा उपवास, अन्नपूर्णा जयन्ती, त्रिपुर भैरवी जयन्ती, रोहिणी व्रत
04 दिसम्बर (सोमवार) – पौष प्रारम्भ "उत्तर
06 दिसम्बर (बुधवार) – संकष्टी चतुर्थी
10 दिसम्बर (रविवार) – कालाष्टमी
13 दिसम्बर (बुधवार) – सफला एकादशी
15 दिसम्बर (शुक्रवार) – प्रदोष व्रत
16 दिसम्बर (शनिवार) – मासिक शिवरात्रि, धनु संक्रान्ति
17 दिसम्बर (रविवार) – दर्शवेला अमावस्या
18 दिसम्बर (सोमवार) – पौष अमावस्या, सोमवती अमावस, हनुमथ जयन्थी
19 दिसम्बर (मंगलवार) – चन्द्र दर्शन
21 दिसम्बर (बृहस्पतिवार) – साल का सबसे छोटा दिन
22 दिसम्बर (शुक्रवार) – विनायक चतुर्थी
24 दिसम्बर (रविवार) – स्कन्द षष्ठी
25 दिसम्बर (सोमवार) – गुरु गोबिन्द सिंह जयन्ती, मेरी क्रिसमस
26 दिसम्बर (मंगलवार) – मासिक दुर्गाष्टमी, शाकम्भरी उत्सवारम्भ, मण्डला पूजा
29 दिसम्बर (शुक्रवार) – पौष पुत्रदा एकादशी, तैलंग स्वामी जयन्ती, वैकुण्ठ एकादशी
30 दिसम्बर (शनिवार) – कूर्म द्वादशी, प्रदोष व्रत, शनि त्रयोदशी
31 दिसम्बर (रविवार) – रोहिणी व्रत

राज की दर्द भरी शायरी

Sad Hindi Shayri and Dard SMS


लव शायरी: हिन्दी दर्द भरी शायरी

जिनकी आंखें आंसू से नम नहीं
क्या समझते हो उसे कोई गम नहीं
तुम तड़प कर रो दिये तो क्या हुआ
गम छुपा के हंसने वाले "राज" भी कम नहीं।

jinki ankhe aansu se nam nahi,
kya samajte ho use koi gum nahi,
tum tadapke ro diye to kya hua,
gum chupake hasne wale "राज" be kam nahi..

नसीब से फरियाद तो कर सकते हैं
वीरानों को आबाद तो कर सकते हैं
क्या हुआ आप से मिल नहीं सकते
एस एम एस भेज कर आप को याद तो कर सकते हैं।

Naseeb se fariyaad to kar sakte hai,
virano ko abaad to kar sakte hai,
kya hua apse mil nahi sakte,
SMS bhej kar apko yaad to kar sakte hai.

काश कोई "राज" पर प्यार जताता
हमारी आंखों को अपने होंठों से छुपाता
हम जब पूछते कौन हो तुम
मुस्कुरा कर वो अपने आप को हमारी जान बताता।

Kash koi hm par pyar jatata
Humari ankho ko apne hatho se chupati
Hm jb puchte kaun ho tum
Muskurakar vo apne aap ko humari Jaan batati!

हमारी खामोशी हमारी आहट है
हमारी आंखें हमारी चाहत हैं
हमारी जिंदगी अगर खूबसूरत है
तो उसकी वजह बस "राज" की मुस्कुराहट है।

Hamari khamoshi hamari aahat hai,
Humari aankhe hamari chahat hai,
Humari zindgi agar khubsurat hai
to uski vajah bas aapki muskurahat hai.

दोस्तों में जब दरार बढ़ जाती है
तड़पने के लिये सिर्फ याद रह जाती है
क्या फर्क पड़ता है कागज हो या कोयला
जलने के बाद "राज" सिर्फ याद रह जाती है।

Dosto me jab dooria badh jati hai,
tadapne k liye sirf yaad rah jaati hai,
kya fark padta h kagaj ho ya koyla,
jalne k bad sirf rakh rah jati hain.

पानी से तसवीर कहां बनती है
ख्वाबों से तकदीर कहां बनती है
किसी से दोस्ती करो तो सच्चे दिल से
क्य़ॊंकि "राज" जिंदगी फिर कहां मिलती है …!!!

paani se tasvir kahan banti hai,
khwabo se taqdeer kaha banti hai,
kisi se dosti karo to sachhe dil se,
kyunki ye zindagi phir kahan milti hai….!!!

हर सुबह को अपनी सांसों में रखो
हर शाम को अपनी बाहों में रखो
हर जीत "राज" की है बस
अपनी मंजिल को अपनी निगाहों में रखो।

Har Subah Ko Apni Sanso Me Rakho
Har Shaam Ko Apni Baahon Me Rakho
Har “JEET” Aapki Hai Bus
Apni “MANZIL”Ko Apni Nigaho Me Rakho

तू कहीं भी रहे सर पर तेरे इलजाम तो है
तेरे होंठों की लकीरों पे मेरा नाम तो है
मुझको अपना बना या ना बना
तू मेरे नाम से बदनाम तो है।

Tu kahi bhi rahe sar par tere ilzaam to he
tere hatho ki lakiro me mera naam to he
mujhko apna bana ya n bana
tu mere nam se badnam to he

ऐसा नहीं कि आप याद आते नहीं
खता सिर्फ इतनी है कि हम बताते नहीं
रिश्ता आपका अनमोल है हमारे लिये
समझते हो आप इसलिये हम जताते नहीं।

Aisa nahi k aap yaad aate nahi,
khata sirf itni hai k hum batate nahi,
rishta aapka anmol hai hamare liye,
samjhte ho aap isleye hum jatate nahi…

उसकी आंखों में "राज" ने वफा देखी थी
महकती फूलों कि अदा देखी थी
ये ना सोचा था वो बेवफा होगा
उसमें तो चाहत की इंतहा देखी थी।

Uske ANKHO me WAFA dekhi thi,
MEHEKTI phulo ki ADA dekhi thi.
Ye na SOCHA thA wo BEWAFA hoga,
usme to CHAHAT ki INTEHA dekhi thi.

इतना बिजी भी ना रहा करो
कभी हमें भी याद कर लिया करो
शेरो शायरी ना आती हो ना सही
आये हुए मैसेज ही "राज" फारवर्ड कर दिया करो

Itna busy b na raha karo,
kabhi hame bhi yaad kar liya karo.
Shero-Shayari na aati ho na sahi.
Aaye hue Message hi forward kar diya karo.

वो "राज" को पत्थर और खुद को
फूल कह कर मुस्कुराया करते हैं
उन्हें क्या पता कि पत्थर तो पत्थर ही रहते हैं
फूल ही मुरझा जाया करते हैं।

Wo Hum Ko Pathar or Khud Ko
Phool Keh Kar Muskaraya Karte Hai
Unhain Kya Pata Ki Patthar To Patthar Hi Rehte Hai
Phool Hi Murjaya Karte Hai.

आज कुछ कमी है तेरे बगैर
ना रंग है ना रोशनी है तेरे बगैर
वक्त अपनी रफ्तार से चल रहा है
बस धड़कन सी थमी है तेरे बगैर।

Aaj kuch kami hai tere bagair,
Na rang hai na roshni hai tere bagair.
Waqt apni raftar se chal raha hai,
Bas dhadkan si thami hai tere bagair.

मुद्दत से तमन्ना हुई अफसाना न मिला ……
हम खोजते रहे मगर ठिकाना न मिला …………..
लो आज फिर चली गई जिंदगी नजरो के सामने से ……
और उसे कोई रुकने का बहाना न मिला

ज़रूरी काम है लेकिन रोज़ाना भूल जाता हूँ,
"राज" को तुम से मोहब्बत है बताना भूल जाता हूँ,
तेरी गलियों में फिरना इतना अच्छा लगता है,
मैं रास्ता याद रखता हूँ ठिकाना भूल जाता हूँ।


गम ने हसने न दिया, ज़माने ने रोने न दिया! 
इस उलझन ने चैन से जीने न दिया! 
थक के जब सितारों से पनाह ली! 
नींद आई तो "राज" को तेरी याद ने सोने न दिया!


मैंने अपनी हर एक सांस तुम्हारी गुलाम कर रखी हैं .. 
लोगो मैं ये ज़िन्दगी बदनाम कर रखी हैं .. 
अब ये आइना भी क्या काम का मेरे … 
मैंने तौ अपनी परछाई भी तुम्हारे नाम कर रखी हैं ….


तेरी आवाज़ की शहनाइयों से प्यार करते हैं….. 
तस्सवुर मैं तेरे तन्हाईओं से प्यार करते हैं ….. 
जो मेरे नाम से तेरे नाम को जोड़े ज़माने वाले … 
अब "राज" उन चर्चों से प्यार करते हैं …

अपने लफ़्ज़ों से चुकाया है किराया इसका, 
दिलों के दरमियां यूँ मुफ्त में नहीं रहती, 
साल दर साल मै ही उम्र न देता इसको, 
तो ज़माने में मोहब्बत जवां नहीं रहती…

ज़िन्दगी हसीन है , ज़िन्दगी से प्यार करो ….. 
हो रात तो सुबह का इंतज़ार करो ….. 
वो पल भी आएगा, जिस पल का इंतज़ार हैं आपको…. 
बस रब पर भरोसा और वक़्त पे ऐतबार करो ….

किसी के दिल में बसना कुछ बुरा तो नही; 
किसी को दिल में बसाना कोई खता तो नही; 
गुनाह हो यह ज़माने की नजर में तो क्या; 
यह ज़माने वाले कोई खुदा तो नही!

कोई शायर तो कोई फकीर बन जाये; 
आपको जो देखे वो खुद तस्वीर बन जाये; 
ना फूलों की ज़रूरत ना कलियों की; 
जहाँ आप पैर रख दो वहीं कश्मीर बन जाये।

जब भी तेरे बिना रात होती हैं ….. 
दीवारों से अक्सर बात होती हैं ……… 
सन्नटा पूछता हैं हमारा हाल हम से …… 
और बस तेरे नाम से ही शुरुआत होती हैं …..

किसी के दिल मैं बसना बुरा तो नहीं … 
किसी को दिल मैं बसाना खता तो खता तो नहीं … 
है, ये ज़माने के नज़र मैं बुरा तो क्या हुआ .. 
ज़माने वाले भी इंसान हैं कोई खुद तो नहीं
राजेश मिश्रा, कोलकाता 


गर्मियों में "राज" अमृत बन जाता है पुदीना

Summer becomes nectar peppermint
बदहज़मी, दिल और दिमाग को ठंडा करने, चटनी और शरबत के स्वाद का क्या कहने... 


हमारे देश में अमृतमय खाद्य पदार्थों की कमी नहीं है, भारत की धरती माता हमें समय समय पर ऐसे फल और सब्जियां देती रहती है जो हमारे शरीर के लिए अमृत का काम करते हैं, अगर हम इन चीजों को नियमित इस्तेमाल करें तो हमारे शरीर से हजारों बीमारियाँ तो ख़त्म हो ही सकती हैं, बीमारियों से भी बचा जा सकता है, पुदीना भी एक ऐसा ही खाद्य पदार्थ है जिसे गर्मियों में नियमित इस्तेमाल किये जाने से शरीर को अनेकों लाभ होते हैं।

क्या है पुदीना यानी पिपरमिंट खाने से लाभ

1. याददास्त में लाभ

अगर आप बमुश्किल किसी चीज को याद रख पाते हैं, तो पुदीने की चाय पीजिए, क्योंकि एक शोध में पता चला है कि पुदीने की चाय स्वस्थ वयस्कों की याददाश्त लंबी अवधि के लिए सुधार सकती है। इस शोध के लिए अध्ययनकर्ताओं ने 180 प्रतिभागियों को पुदीने की चाय, कैमोमिल (बबूने का फूल) की चाय और गर्म पानी का सेवन कराया था।

शोध के परिणामों से पता चला कि है कि कैमोमिल और गर्म पानी का सेवन करने वालों की तुलना में जिन प्रतिभागियों ने पुदीने की चाय का सेवन किया था, उनकी दीर्घकालिक स्मरणशक्ति और सतर्कता में महत्वपूर्ण सुधार देखे गए।

वहीं कैमोमिल चाय का सेवन करने वाले प्रतिभागियों में पुदीने की चाय और गर्म पानी का सेवन करने वाले प्रतिभागियों की तुलना में स्मृति और एकाग्रता की क्षमता में कमी महसूस की गई।

इस शोध को हाल ही में नॉटिंघम में आयोजित साइकोलॉजिकल सोसाइटी के वार्षिक सम्मेलन में पेश किया गया था।

2. पेट और गैस की बीमारियों में लाभ

पेट और गैस से सम्बंधित बीमारियों में पुदीना रामबाण का काम करता है। इसकी चटनी और शरबत पीने से पेट में ठंढक पहुँचती है और लीवर में इकठ्ठा जहरीला पदार्थ बाहर आ जाता है, इसको नियमित खाते रहने से पाचन शक्ति बढ़िया हो जाती है। पुदीने के तेल की पेट पर मालिश करने से भी गैस और पेट दर्द में आराम मिलता है।

3. माँ को लाभ

बच्चों को दूध पिलाने वाली महिलाओं की छाती में दर्द होने पर भी पुदीने का तेल फायदेमंद होता है।

4. सांस की बीमारियों में लाभ

नियमित रूप से पुदीना खाने वालों को सांस की ‘घरघराहट और सरसराहट’ जैसे बामारियों से फायदा मिलता है। पुदीने के तेल की छाती पर मालिस करने से छाती का दर्द भी सही होता है। आयुर्वेदिक सीरप में पुदीने का जमकर इस्तेमाल किया जाता है। अस्थमा में भी लाभ मिलता है।

5. सिरदर्द 

पुदीने का तेल लगाने से सिरदर्द में तुरंत लाभ मिलता है, आयुर्वेदिक तेलों में इसका बहुत इस्तेमाल किया जाता है। इसका तेल बालों और शरीर की त्वचा के लिए बहुत बढ़िया होता है।

6. खून में वृद्धि

नियमित रूप से पुदीना खाने से शरीर का हीमोग्लोबिन बढ़ने लगता है, वैसे भी हरी साग सब्जियां खून बढाने में रामबाण का काम करती हैं।
इसके अलावा भी पुदीने के हजारों लाभ हैं इसलिए बिना सोचे समझे गर्मियों में जमकर पुदीना खाइए और शरीर की कई बीमारियों को दूर भगाइए।

जानिए पुदीने के 10 लाजवाब गुणों के बारे में-

  1. – पुदीने में मौजूद फाइबर कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करता है और मैगनीशियम हड्डियों को ताकत देता है। उल्टी होने पर आधा कप पोदीना हर दो घंटे में रोगी को पिलाएं। उल्टी आना बंद हो जाएगी।
  2. – पुदीने की पत्तियों का ताजा रस नींबू और शहद के साथ समान मात्रा में लेने से पेट की सभी बीमारियों में आराम मिलता है।
  3. – पुदीने का रस काली मिर्च व काले नमक के साथ चाय की तरह उबालकर पीने से जुकाम, खांसी व बुखार में राहत मिलती है।
  4. – पुदीने की पत्तियां चबाने या उनका रस निचोड़कर पीने से हिचकियां बंद हो जाती हैं। सिरदर्द में पत्तियों का लेप माथे पर लगाने से आराम मिलता है।
  5. – माहवारी समय पर न आने पर पुदीने की सूखी पत्तियों के चूर्ण को शहद के साथ समान मात्रा में मिलाकर दिन में दो-तीन बार नियमित रूप से लें।
  6. – पुदीने का रस किसी घाव पर लगाने से घाव जल्दी भर जाते हैं। यह चर्म रोगों को भी समाप्त करता है। चर्म रोग होने पर पुदीना के पत्तों का लेप लगाने से आराम मिलता है।
  7. – पुदीने की पत्तियों को सुखाकर बनाए गए पाउडर को मंजन की तरह प्रयोग करने से मुंह की दुर्गंध दूर होती है और मसूड़े मजबूत होते हैं।
  8. – पुदीने के रस को नमक के पानी के साथ मिलाकर कुल्ला करने से गले का भारीपन दूर होता है और आवाज साफ होती है।
  9. – अधिक गर्मी में जी मिचलाए तो एक चम्मच सूखे पुदीने की पत्तियों का चूर्ण और आधी छोटी इलायची के चूर्ण को एक गिलास पानी में उबालकर पीने से लाभ होता है। हैजा होने पोदीना, प्याज का रस और नींबू का रस बराबर मात्रा में मिलाकर पीने से लाभ मिलता है।
  10. – अगर आपकी त्वचा ऑयली है, तो पुदीने का फेशियल आपके लिए सही रहेगा। इसको बनाने के लिए दो बड़े चम्मच ताजा पीसे पुदीने के साथ दो बड़े चम्मच दही और एक बड़ा चम्मच ओटमील लेकर गाढ़ा घोल बनाएं। इसे चेहरे पर दस मिनट तक लगाएं और चेहरे को धो लें। इसके रस को चेहरे पर लगाने से कील और मुंहासे दूर होता है। पोदीने के रस को मुल्तानी मिट्टी में मिलाकर चेहरे पर लेप करने से चेहरे की झांइयां समाप्त हो जाती हैं और चेहरे की चमक बढ जाती है। शराब में पुदीने की पत्तियों को पीसकर चेहरे पर लगाने से चेहरे के दाग, धब्बे, झांई मिट जाते हैं।

निरोगी काया और सुखी परिवार के लिए राजेश इसे जरूर अपनाएं

जीवनोपयोगी बातें 
This Vital Things take in life RAJ 


1. सुबह उठ कर कैसा पानी पीना चाहिए
राज - हल्का गर्म

2. पानी पीने का क्या तरीका होता है
राज - सिप सिप करके व नीचे बैठ कर


3. खाना कितनी बार चबाना चाहिए
राज - 32 बार

4. पेट भर कर खाना कब खाना चाहिए
राज - सुबह


5. सुबह का नाश्ता कब तक खा लेना चाहिए
राज - सूरज निकलने के ढाई घण्टे तक

6. सुबह खाने के साथ क्या पीना चाहिए
राज - जूस

7. दोपहर को खाने के साथ क्या पीना चाहिए
राज - लस्सी / छाछ

8. रात को खाने के साथ क्या पीना चाहिए
राजेश मिश्रा - दूध
9. खट्टे फल किस समय नही खाने चाहिए
राजेश मिश्रा - रात को

10. लस्सी खाने के साथ कब पीनी चाहिए

राजेश मिश्रा. - दोपहर को

11. खाने के साथ जूस कब लिया जा सकता है
राजेश मिश्रा - सुबह

12. खाने के साथ दूध कब ले सकते है
राजेश मिश्रा. - रात को

13. आईसक्रीम कब कहानी चाहिए
राजेश मिश्रा - कभी नही

14. फ्रिज़ से निकाली हुई चीज कितनी देर बाद खानी चाहिए
राजेश मिश्रा. - 1 घण्टे बाद

15.  क्या कोल्ड ड्रिंक पीना चाहिए
राजेश मिश्रा - नहीं

16. बना हुआ खाना कितनी देर बाद तक खा  लेना चाहिए
राजेश मिश्रा. - 40 मिनट

17. रात को कितना खाना खाना चाहिए
राजेश मिश्रा - न के बराबर

18. रात का खाना किस समय कर लेना चाहिए
राजेश मिश्रा. - सूरज छिपने से पहले

19. पानी खाना खाने से कितने समय पहले पी सकते हैं

राजेश मिश्रा. - 48 मिनट

20. क्या रात को लस्सी पी सकते हैं
राजेश मिश्रा - नही

21. सुबह खाने के बाद क्या करना चाहिए
राजेश मिश्रा - ज्यादा मेहनत वाली काम

22. दोपहर को खाना खाने के बाद क्या करना  चाहिए
राजेश मिश्रा. - आराम

23. रात को खाना खाने के बाद क्या करना चाहिए
राजेश मिश्रा - 500 कदम चलना चाहिए

24. खाना खाने के बाद हमेशा क्या करना चाहिए
राजेश मिश्रा - वज्र आसन

25. खाना खाने के बाद वज्रासन कितनी देर करना चाहिए.
राजेश मिश्रा - 5 -10 मिनट

26. सुबह उठ कर आखों मे क्या डालना चाहिए
राजेश मिश्रा - मुंह की लार

27. रात को किस समय तक सो जाना चाहिए
राजेश मिश्रा - 9 - 10 बजे तक

28. तीन जहर के नाम बताओ
राजेश मिश्रा- चीनी , मैदा , सफेद नमक

29. दोपहर को सब्जी मे क्या डाल कर खाना चाहिए
राजेश मिश्रा - अजवायन

30. क्या रात को सलाद खानी चाहिए

राजेश मिश्रा - नहीं

31. खाना हमेशा कैसे खाना चाहिए
राजेश मिश्रा - नीचे बैठकर व खूब चबाकर

32. क्या विदेशी समान खरीदना चाहिए
राजेश मिश्रा - कभी नही

33. चाय कब पीनी चाहिए
राजेश मिश्रा - कभी नहीं

33. दूध मे क्या डाल कर पीना चाहिए
राजेश मिश्रा - हल्दी

34. दूध में हल्दी डालकर क्यों पीनी चाहिए
राजेश मिश्रा - कैंसर ना हो इसलिए

35. कौन सी चिकित्सा पद्धति ठीक है
राजेश मिश्रा. - आयुर्वेद

36. सोने के बर्तन का पानी कब पीना चाहिए
राजेश मिश्रा - अक्टूबर से मार्च (सर्दियों मे)

37. ताम्बे के बर्तन का पानी कब पीना चाहिए
राजेश मिश्रा - जून से सितम्बर(वर्षा ऋतु)

38. मिट्टी के घड़े का पानी कब पीना चाहिए
राजेश मिश्रा - मार्च से जून (गर्मियों में)

39. सुबह का पानी कितना पीना चाहिए
राजेश मिश्रा. - कम से कम 2 - 3 गिलास

40. सुबह कब उठना चाहिए
राजेश मिश्रा - सूरज निकलने से डेढ़ घण्टा पहले

(राजेश मिश्रा द्वारा निरोगधाम पत्रिका से संकलित)

निरोगी काया और सुखी परिवार के लिए इसे जरूर अपनाएं... राजेश मिश्रा 

किस अंग का फड़कना शुभ और किसका अशुभ

आपके अंगों का फड़कना क्या कहता है

ग्रन्थों के अनुसार स्त्री का दायां अंग और पुरूष का बायें अंग का फड़कना अशुभ माना जाता है.....राज

भविष्य के बारे में क्या कहता है शरीर के अंगों का फड़कना । घटनाओं के प्रति हमारा शरीर पहले ही आशंका व्यक्त कर देता है। ऐसे देखा जाए तो मनुष्य का शरीर काफी संवेदनशील होता है लेकिन शरीर के विभिन्न अंगों का फड़कना भी भविष्य में होने वाली घटनाओं से हमें अवगत कराने का एक जरिया है।

भारत में बहुत सी मान्यताओं का चलन है। किसी मान्यता को हम मानते है और किसी को नही। ऐसे ही हमारें शरीर के अंगों का फड़कनें के एक महत्व है जिसे अधिकतर लोग मानते है। हमारा शरीर बहुत ही संवेदनशील होता है। इसी कारण हमारा शरीर भविष्य में होने वाली घटनाओं के पहले से ही आशंका व्यक्त कर देता है। भविष्य की घटनाओं से अवगत करानें के लिए हमारें शरीर के विभिन्न अंग फड़कनें लगते है। अंगों का फड़कना ही हमें शुभ और अशुभ बातों के बारें में बताता है।
हमारें शरीर के पर अंग के फड़कनें के कोई न कोई महत्व होता है। माना जाता है कि पुरुष औऱ महिलाओं के अंग फड़कनें का मतलब अलग-अलग होता है। जानिए अगों के फड़कनें के मतलब।
  1. आंखों के फड़कने पर माना जाता है कि अगर महिलाओं की दाहिनी आंख फड़कने से शुभ समाचार मिलता है वहीं पुरूषों की बाई आंख का फड़कना अच्छा होता है। महिलाओं की बाई आंख फडकने का मतलब है कि उसके या परिवार में किसी को कोई बीमारी हो सकती है।
  2. बाई आंख का ऊपरी फलक फडके तो आपकी अपने दुश्मन से और अधिक दुश्मनी हो सकती है। नीचे का फलक फडकता है तो किसी से बेवजह बहस हो सकती है और आपको अपमानित होना पड सकता है।
  3. बाई आंख की नाक की ओर का कोना फडकता है जिसका फल शुभ होता है। पुत्र प्राप्ति की सूचना मिल सकती है या फिर किसी प्रिय व्यक्ति से मुलाकात हो सकती है।
  4. दोनों आंखे एक साथ फडकती हो तो चाहे वह स्त्री की हो या पुरुष की उनका फल एक जैसा ही होता है। किसी बिछुडे हुए अच्छे मित्र से मुलाकात हो सकती है।
  5. दांई आंख पीछे की ओर फडकती है तो इसका फल अशुभ होता है। बाई आंख ऊपर की और फडकती हो तो इसका फल शुभ होता है। महिला की बाई आंख फडकती हो तो शुभ फल होता है।
  6. यदि दोनों गाल फड़के तो आफको अतुल धन की प्राप्ति होती है। अगर होंठ फडफ़ड़ाएं तो किसी हितैषी का आगमन होता है। मुंह का फड़कना पुत्र की ओर से शुभ समाचार का सूचक होता है। यदि लगातार दाहिनी पलक फडफड़ाए तो शारीरिक कष्ट हो सकता है।
  7. अगर दाई हाथ की हथेली फड़क रही तो आपको पैसा औऱ मान-सम्मान मिलता है वही बाई हथेली हो तो पैसे का निकसान हो सकता है।
  8. होंठों का फडकना किसी प्यारी चीज से मिलनें का संकेत माना जाता है। यदि होठों के ऊपरी हिस्सा फड़क रहा है तो आपके शत्रुओं का नाश होता है । होठों के निचलें भाग का फड़कना किसी प्यारें दोस्त से मुलाकात हो सकती है।
  9. अगर आपका दायां घुटना फड़के तो आपको सोने की प्राप्ति हो सकती है। दाए घुटने के निटले हिस्से के फड़कने से शत्रु पर जीत होती है। वहीं बाएं घुटने के निचले हिस्से के फडकने से अपना रुका हुआ काम पूर होगा।

  10. अगर आपका दायां कंधा फड़क रहा है तो आपको बिछड़ा हुआ भाई मिल सकता है और यदि बायां कंधा फड़के तो रक्त विकार या वात संबधी बीमारी हो सकती है। यदि दोनो कंधे फड़क रहे हो तो किसी से आपका झगड़ा हो सकता है।
  11. अगर आपकी मूछों मे फडकन हो रही है तो यह आपके लिए शुभ संकेत है, इससे समृद्धि आती है। वहीं अगर आपकी मूंछ का केवल बायां हिस्सा फड़क रहा है तो किसी के साथ बहस होने की संभावना रहती है।
  12. अगर आपकी दाहिनी कनपटी फड़के तो आप जिस काम के लिए जा रहे है उसमें आपको सफलता मिलेगी वहीं बांई कनपटी के फड़कने पर मनचाही वस्तु मिल सकती है।
  13. यदि आपका दाहिना कान फड़के तो आपको कोई शुभ समाचार मिल सकता है और वही बायां कान फडके तो प्रतिष्ठित लोगों से मुलाकात हो सकती है।
  14. अगर आपका पूरा सिर फडक रहा है तो यह सबसे अधिक शुभ स्थिति है आपको दूसरे का धन मिल सकता है, मुकद्दमे में जीत हो सकती है, राजसम्मान मिल सकता है या फिर भूमि की प्राप्ति हो सकती है।
  15. यदि आपकी दाहिनी आंख व भौंह फड़के तो आपकी सभी मनोकामना पूरी होगी। बांई आंख व भौंह फड़के तो शुभ समाचार मिलता है। दाई आंख ऊपर की ओर के फलक में फडकती है तो आपको पैसा और कीर्ति मिलेगी या नौकरी में पदोन्नति हो सकती है लेकिन नीचे का फलक फडके है तो यह कुछ अशुभ होने की संभवना व्यक्त करता है।
  16. अगर आपके पैर के तालू में फडकन है तो यह आर्थिक लाभ का शुभ संकेत है। दायां तालू फडके तो यह बीमारी की सूचना दे रहा है। बाए तालू का फडकना हो तो आप किसी अपराध के चलते जेल जा सकते है।

  17. अगर आपका हृदय फड़के तो आपको इष्टसिद्धि दिलाती है।
  18. अगर आपकी पीठ फड़के तो किसी विपदा में फंसने की संभावना रहती है। दाहिनी ओर की बगल फड़के तो नेत्रों का रोग हो जाता है। पसलियां फड़के तो विपदा आती है। छाती में फडफ़ड़ाहट मित्र से मिलने का सूचक होती है। ह्रदय का ऊपरी भाग फड़के तो झगड़ा होने की संभावना होती है। नितंबों के फड़कने पर प्रसिद्धि व सुख मिलता है।
  19. अगर आपके पेट में फडकन है तो यह अन्न की समृद्धि की सूचना देता है। यदि पेट का दांया हिस्सा फडक रहा है तो घर में धन दौलत की वृद्धि होगी सुख और खुशहाली बढ़ती है।
  20. अगर आपके पेट का बांया हिस्सा फडकता है तो धन समृद्धि धीमी गति से बढ़ती है वैसे यह शुभ नहीं है।
  21. अगर पेट का ऊपरी भाग फडकता है तो यह अशुभ होता है। लेकिन पेट के नीचे का भाग फडकता है तो स्वादिष्ट भोजन की प्राप्ति होती है।
  22. यदि पीठ दाई ओर से फडक रही है तो धन धान्य की वृद्धि हो सकती है लेकिन पीठ के बाए भाग का फडकना ठीक नहीं होता है। असके फडकनें से मुकद्दमे में हार या किसी से झगडा हो सकता है।
  23. अगर बाई पीठ में फडकन धीमी हो तो परिवार में कन्या का जन्म होना संभव है और फडकन तेज हो तो समय से पहले ही प्रसव हो सकता है।
  24. अगर पीठ का ऊपरी हिस्सा फडक रहा हो तो धन की प्राप्ति होती है और पीठ का निचला हिस्सा फडकता है तो बहुत से मनुष्यों की प्रशंसा मिलने की संभावना रहती है।