तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे भाषा के विशेषज्ञ पढ़कर कहें कि ये कलम का छोटा सिपाही ऐसा है तो भीष्म साहनी, प्रेमचंद, महादेवी वर्मा, जयशंकर प्रसाद, सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला', हरिवंश राय बच्चन, फणीश्वर नाथ रेणु आदि कैसे रहे होंगे... गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.

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CHHAPRA KHANUA NALA KA NAKKARA

छपरा की बदहाली के लिए
जिम्मेदार कौन?



प्रमंडलीय मुख्यालय छपरा शहर की जल निकासी की लाइफ लाइन के नाम से मशहूर खनुआ नाला नकारा बनकर रह गया है. नगर परिषद की कारगुज़ारी से टोडरमल के ज़माने से निर्मित 18 फीट चौड़ा व 40 फीट गहरे नाले के ऊपर दुकानों का निर्माण करा दिया गया. इससे बरसात के दिनों में जल निकासी का कोई दूसरा उपाय नहीं बचा है और थोड़ी सी बरसात से सड़कों से लेकर हर गली-मोहल्ले में जल जमाव की स्थिति व्याप्त हो जाती है. सन 1918 में निर्मित खनुआ नाले की पूर्ववत स्थिति यह रही है कि इस नाले से होकर समूचे शहर की जल निकासी आसानी से हो जाती थी. शहर के नाले से निकलने वाले गंदे जल से इसके उत्तरी छोर के खेतों की सिंचाई व्यवस्था भी होती थी. इसका निर्माण योजनाबद्ध तरीक़े से इस तरह किया गया था कि शहर के दक्षिणी छोर पर स्थित घाघरा नदी के जलस्तर में वृद्धि हो जाने पर रूपगंज व साहेबगंज में बने किवाड़ को खोलकर शहर की जल निकासी के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों की सिंचाई व्यवस्था भी समुचित ढंग से पूर्ण हो जाती थी. मगर कालांतर में यह व्यवस्था सरकार की ग़लत नीतियों के कारण बुरी तरह प्रभावित हुई है. वर्तमान हालात यह है कि इस नाले के ऊपर नगर परिषद के कर्ता-धर्ताओं ने दुकान बनाकर पूरी तरह ढक दिया है तथा उक्त दुकानों की अच्छी क़ीमत वसूलकर नगरपालिका के माध्यम से व्यवसायियों को सेटलमेंट करा दिया गया. इस दरम्यान शहर की आबादी में कई गुणा बढ़ोतरी हुई है, लेकिन खनुआ नाले की चौड़ाई बढ़ने के बजाय इस पर एक स्ट्रक्चर 7 फीट चौड़ा और 8 फीट गहराई का बना दिया गया. बताते हैं कि उक्त नाले की भूमि गैर मजरूआ आम कैसरे हिंद के तौर पर खतियान में दर्ज है, जिसका सेटलमेंट करने का अधिकार निजी उपयोग के लिए किसी भी व्यक्ति को नहीं है. इसका मालिकाना हक़ राष्ट्रपति को है, लेकिन भू-मा़फिया से साठगांठ कर बंदोबस्ती दुकान के नाम पर शहर के कुछ चुनिंदा व्यक्तियों ने इसे अपने नाम करा लिया है. इसके कारण पुराने नाले की बग़ल में रहने वाले शहरवासियों के अपने घरों तक आने-जाने में भी भयावह परेशानियों का सामना करना पड़ता है. अब जबकि शहर की जल निकासी के लिए ज़िला प्रशासन अपने स्तर से खनुआ नाले की स़फाई के लिए कार्य योजना बनाकर अमल करने की तैयारी करता है, तो शहर के भू-माफिया में हड़कंप की स्थिति पैदा हो जाती है. इस मामले में दो बार उच्च न्यायालय का दरवाज़ा भी खटखटाया जा चुका है, जिसके आलोक में न्यायालय ने ज़िला प्रशासन को इस मामले में यथोचित कार्रवाई करने का आदेश भी पारित किया है. यह कहना अप्रासंगिक नहीं होगा कि नगरपालिका अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर बहुत सारे नाले की ज़मीन पर अपना क़ब्जा जमा चुकी है, जिसके कारण शहर की जल निकासी पूर्णरूपेण बाधित है और बरसात के दिनों में शहर की हालत जल जमाव के कारण बदतर हो जाती है. थोड़ी सी बरसात के कारण शहर के प्रभुनाथ नगर, दहियावां टोला साधनापुरी, शाक्तिनगर, भगवान बाज़ार, करीम चक, गुदरी व काशी बाज़ार आदि मोहल्लों में नाले का पानी सड़क पर बहने लगता है, जिसके चलते सड़क पर गंदे पानी व कीचड़ की सड़ांध आमजन को परेशानी में डाल देती है. शहर की जल निकासी व सा़फ-स़फाई की पूर्ण जवाबदेही स्थानीय शासन के अंतर्गत नगरपालिका के ज़िम्मे आती है.

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