तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे भाषा के विशेषज्ञ पढ़कर कहें कि ये कलम का छोटा सिपाही ऐसा है तो भीष्म साहनी, प्रेमचंद, महादेवी वर्मा, जयशंकर प्रसाद, सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला', हरिवंश राय बच्चन, फणीश्वर नाथ रेणु आदि कैसे रहे होंगे... गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.

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निर्मल बाबा के खिलाफ चार शहरों में शिकायत दर्ज




अपने अजीबोगरीब उपायों से हर समस्‍या का चुटकी में हल बता कर लाखों भक्‍त बनाने वाले निर्मल बाबा इन दिनों विवादों में हैं। करीब तीन दर्जन टीवी चैनलों पर रोज विज्ञापन दिखवा कर निर्मलजीत सिंह नरूला (निर्मल बाबा) आज घर-घर में चर्चा का विषय बन गए हैं। उन पर 'कृपा का कारोबार' करने का आरोप लग रहा है। उनकी कमाई और निजी जिंदगी के बारे में भी अब खुलकर सवाल किए जा रहे हैं। छठी इंद्री होने का दावा करने वाले निर्मल बाबा में लोगों की रुचि अचानक काफी बढ़ गई है। इंटरनेट सर्च को लेकर रिसर्च करने से यह बात साफ होती है। लेकिन खास बात यह है कि बाबा का तिलिस्‍म टूटता दिख रहा है, क्‍योंकि पिछले कुछ दिनों में इंटरनेट पर लोग 'फ्रॉड निर्मल बाबा' को सबसे ज्‍यादा सर्च कर रहे हैं। हालांकि लगता है कि बाबा 'साइबर युद्ध' के लिए भी पूरी तरह तैयार हैं और 'फौज' खड़ी कर सोशल साइट्स के जरिए माहौल अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहे हैं।
चार अलग-अलग शहरों-लखनऊ, रायपुर, भोपाल और फतेहपुर में निर्मल बाबा के खिलाफ शिकायत दर्ज की जा चुकी है। संभव है, बाबा के खिलाफ आज लखनऊ में एफआईआर भी दर्ज हो जाए। इसके लिए दो बच्‍चों ने पुलिस में शिकायत दर्ज की है। वे आज एफआईआर दर्ज करने की मांग करने वाले हैं। यह मांग नहीं माने जाने पर वे कोर्ट की शरण में जाने वाले हैं।

टीवी के जरिए घर-घर पहुंच चुके इस बाबा के बारे में गूगल टूल्स के जरिए रिसर्च करने पर पता चला कि उनके बारे में लोगों की दिलचस्पी में पिछले तीन माह में जबरदस्त इजाफा हुआ है। तीन साल पहले तक वह लगभग गुमनाम थे। अगस्त 2009 में गूगल में सबसे पहले निर्मल बाबा को सर्च किया गया। साल 2010 के अंत तक भी उनमें लोगों की कोई खास रुचि नहीं थी और गिने चुने लोग ही इंटरनेट पर उनके बारे में जानकारी तलाशने की कोशिश करते थे। सितंबर 2011 से लोगों ने इंटरनेट पर निर्मल बाबा के बारे में जानने में दिलचस्पी दिखाई और तब से यह ग्राफ लगातार बढ़ता ही जा रहा है। निर्मल बाबा इंटरनेट जगत पर सबसे ज्यादा चर्चित साल 2012 में ही हुए।

2011 के अंत में निर्मल बाबा से जुड़ी जानकारियां खोजने में लोगों की रुचि इतनी बढ़ी कि सर्च ट्रेंड के मानकों को तोड़ते हुए यह ब्रेकआउट सूची में आ गए। गूगल के सर्च टूल्स से जुटाए आंकड़ों और जानकारी के मुताबिक साल 2011 में निर्मल बाबा के समागम, निर्मल दरबार, फेसबुक पेज, तस्वीरों, वॉलपेपर, वेबसाइट, फोटो और उनके यूट्यूब वीडियो को सबसे ज्यादा खोजा गया। तब तक सिर्फ भारत से ही निर्मल बाबा के बारे में लोग सर्च करते थे। यदि सर्च को सौ के स्केल पर नापें तो लगभग एक प्रतिशत यानि नजरअंदाज करने लायक लोग अमेरिका से भी निर्मल बाबा के बारे में जानकारी तलाशते थे। लेकिन पिछले तीन महीनों में निर्मल बाबा के बारे में लोगों की रुचि का पैमाना बदला है।

भारत में जहां उनमें लोगों की दिलचस्पी और भी ज्यादा बढ़ी है वहीं नेपाल, चीन और ब्रिटेन से भी उन्हें इंटरनेट पर खोजा जा रहा है। लेकिन यहां सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि मीडिया में उनके बारे में नकारात्मक खबरें आने और फेसबुक और ब्लॉग्स में उनके तरीकों पर हो रही खुली चर्चा के बाद अब 'निर्मल बाबा फ्रॉड' की वर्ड से गूगल पर खूब सर्च हो रहे हैं।

पिछले तीन महीनों में लोगों ने निर्मल बाबा के जीवन और उनकी सच्चाई के बारे में सर्च करने में ज्यादा रुचि दिखाई है (ग्राफ देखने के लिए क्लिक करें) । पिछले एक हफ्ते में लोगों की दिलचस्पी निर्मल बाबा के अतीत को जानने में भी जगी है। लोग अब उनकी बायोग्रॉफी और हिस्ट्री को भी गूगल में तलाश रहे हैं। यही नहीं निर्मल बाबा की वेबसाइट और उनसे मिलने के लिए अपाइंटमेंट फिक्स करने में भी लोगों की रुचि इसी रफ्तार से बढ़ रही है। हालांकि उन्‍होंने आजकल निजी तौर पर लोगों से मिलना बंद कर रखा है।

वेबसाइट भी है सुपरहिटः निर्मल बाबा की वेबसाइट भी पिछले 6 महीने में जबरदस्त लोकप्रिय हुई है। जून 2011 में जहां उनकी वेबसाइट पर हर महीने रोजाना पांच हजार से भी कम लोग आ रहे थे वहीं यह आंकड़ा अक्टूबर 2011 में रोजाना 20 हजार से भी अधिक हो गया। अप्रैल 2012 में यह बढ़कर 42 हजार विजिटर प्रतिदिन तक आ गया है। गूगल टूल्स के मुताबिक हर महीने करीब तीन लाख लोग लगभग 8 लाख बार निर्मल बाबा की वेबसाइट पर आते हैं जिनसे उनकी वेबसाइट को 18 लाख पेजव्यू मिलते हैं। यह आंकड़ा देश की कई छोटी-मोटी समाचार वेबसाइटों से भी ज्यादा है। प्रत्येक विजिटर उनकी वेबसाइट पर करीब साढ़े 6 मिनट बिताता है।

फेसबुक पर भी खूब चर्चित हैं निर्मल बाबाः
फेसबुक पर निर्मल बाबा के दो पेज हैं। एक पेज 23 जुलाई 2011 को शुरू किया गया था। शुरू में तो यह लोकप्रिय नहीं था। लेकिन अब इस पेज से एक लाख 13 हजार से ज्यादा लोग जुड़े हैं। इस पेज पर सितंबर 2011 के बाद से कोई अपडेट नहीं किया गया है लेकिन फिर भी अप्रैल में इससे 11747 नए लोग जुड़े जबकि मार्च में 27773 लोग इस पेज से जुड़े। सितंबर के बाद सिर्फ 24 मार्च को इस पेज पर एक पोस्ट हुआ जिसमें लोगों को उनके नए पेज 'निर्मलबाबाजी' से जुड़ने की जानकारी दी गई। वहीं फिलहाल सक्रिय निर्मल बाबा का पेज 5 नवंबर 2010 को शुरु हुआ था जिससे अब तक कुल 3 लाख 53 हजार से भी अधिक लोग जुड़ चुके हैं। निर्मल बाबा के चमत्कारों को लेकर इस पेज पर गंभीर बहस हो रही है। इस पेज पर अंतिम पोस्ट 6 अप्रैल 2012 को किया गया था जिसमें भक्तों को पूर्णमासी कार्यक्रम के समाप्त किए जाने की जानकारी दी गई है।

लेकिन आप यह जानकर चौंक जाएंगे कि इस पोस्ट को जहां 17 हजार से ज्यादा लोगों ने लाइक किया वहीं 421 ने शेयर किया। अकेले इस पोस्ट पर ही लगभग 18 हजार टिप्पणियां की गई हैं जिनमें से अधिकतर में बाबा की आलोचना है और उनके तौर-तरीकों पर प्रश्न खड़े किए गए हैं। बाबा के कुछ भक्तों का यह भी कहना था कि बाबा अब काफी लोकप्रिय हो गए हैं। उन्हें अब अपने विज्ञापन बंद कर देने चाहिए। यहां पर कुछ लोग निर्मल बाबा का उपहास उड़ा कर उनसे अपने ऊपर भी कृपा करने के लिए कह रहे हैं। लेकिन सबसे ज्यादा लोग उनके कृपा के कारोबार पर प्रश्नचिन्ह उठा रहे हैं। इस पोस्ट पर टिप्पणियों में कुछ फेसबुक यूजर निर्मल बाबा को गालियां भी दे रहे हैं।

बाबा के फेसबुक पेज पर सिर्फ अंतिम पोस्ट पर आई टिप्पणियों का अध्ययन करने पर यह भी पता चला कि बाबा के समर्थन में ज्यादातर टिप्पणियां महिलाओं ने की थी। वहीं जिन पुरुषों ने बाबा के समर्थन में वहां पर अपनी बात रखी उनके प्रोफाइल फर्जी ज्यादा प्रतीत हो रहे थे। इन प्रोफाइलों में से ज्यादातर प्रोफाइल मार्च या अप्रैल में ही बनाए गए हैं। इससे ऐसा भी प्रतीत होता है कि बाबा ने टीवी के बाद फेसबुक के जरिए भी मोर्चा लेने की पूरी तैयारी की है।

बाबा के बारे में यह भी कहा जा रहा है कि वो जूनियर आर्टिस्टों को पैसा देकर अपने समागम में प्रश्न करवाते थे और अपने अनुसार बुलवाते थे लेकिन उनके फेसबुक पेज का अध्ययन करने के बाद यह और स्पष्ट हो गया है कि फर्जी प्रोफाइलों का सहारा लेकर उनका पक्ष रखा जा रहा है। माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर पर भी निर्मल बाबा की लोकप्रियता कोई कम नहीं है। उन्हें यहा पर भी 42 हजार से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं।

बाबा के बारे में बढ़ रही लोगों की रुचि (वीडियो) को सिर्फ सकारात्मक नहीं माना जा सकता क्योंकि उनके फेसबुक पेज पर पोस्ट की गई ज्यादातर टिप्पणियों में उनकी कृपा के तौर तरीकों पर ही प्रश्न उठाए गए हैं। वहीं यूट्यूब पर बाबा की तीसरी आंख के वीडियो दिखाने वाले चैनल पर भी टिप्पणी करना प्रतिबंधित हैं।
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चार अलग-अलग शहरों-लखनऊ, रायपुर, भोपाल और फतेहपुर में निर्मल बाबा के खिलाफ शिकायत दर्ज की जा चुकी है। संभव है, बाबा के खिलाफ आज लखनऊ में एफआईआर भी दर्ज हो जाए। इसके लिए दो बच्‍चों ने पुलिस में शिकायत दर्ज की है। वे आज एफआईआर दर्ज करने की मांग करने वाले हैं। यह मांग नहीं माने जाने पर वे कोर्ट की शरण में जाने वाले हैं।

टीवी के जरिए घर-घर पहुंच चुके इस बाबा के बारे में गूगल टूल्स के जरिए रिसर्च करने पर पता चला कि उनके बारे में लोगों की दिलचस्पी में पिछले तीन माह में जबरदस्त इजाफा हुआ है। तीन साल पहले तक वह लगभग गुमनाम थे। अगस्त 2009 में गूगल में सबसे पहले निर्मल बाबा को सर्च किया गया। साल 2010 के अंत तक भी उनमें लोगों की कोई खास रुचि नहीं थी और गिने चुने लोग ही इंटरनेट पर उनके बारे में जानकारी तलाशने की कोशिश करते थे। सितंबर 2011 से लोगों ने इंटरनेट पर निर्मल बाबा के बारे में जानने में दिलचस्पी दिखाई और तब से यह ग्राफ लगातार बढ़ता ही जा रहा है। निर्मल बाबा इंटरनेट जगत पर सबसे ज्यादा चर्चित साल 2012 में ही हुए।

2011 के अंत में निर्मल बाबा से जुड़ी जानकारियां खोजने में लोगों की रुचि इतनी बढ़ी कि सर्च ट्रेंड के मानकों को तोड़ते हुए यह ब्रेकआउट सूची में आ गए। गूगल के सर्च टूल्स से जुटाए आंकड़ों और जानकारी के मुताबिक साल 2011 में निर्मल बाबा के समागम, निर्मल दरबार, फेसबुक पेज, तस्वीरों, वॉलपेपर, वेबसाइट, फोटो और उनके यूट्यूब वीडियो को सबसे ज्यादा खोजा गया। तब तक सिर्फ भारत से ही निर्मल बाबा के बारे में लोग सर्च करते थे। यदि सर्च को सौ के स्केल पर नापें तो लगभग एक प्रतिशत यानि नजरअंदाज करने लायक लोग अमेरिका से भी निर्मल बाबा के बारे में जानकारी तलाशते थे। लेकिन पिछले तीन महीनों में निर्मल बाबा के बारे में लोगों की रुचि का पैमाना बदला है।

भारत में जहां उनमें लोगों की दिलचस्पी और भी ज्यादा बढ़ी है वहीं नेपाल, चीन और ब्रिटेन से भी उन्हें इंटरनेट पर खोजा जा रहा है। लेकिन यहां सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि मीडिया में उनके बारे में नकारात्मक खबरें आने और फेसबुक और ब्लॉग्स में उनके तरीकों पर हो रही खुली चर्चा के बाद अब 'निर्मल बाबा फ्रॉड' की वर्ड से गूगल पर खूब सर्च हो रहे हैं।

पिछले तीन महीनों में लोगों ने निर्मल बाबा के जीवन और उनकी सच्चाई के बारे में सर्च करने में ज्यादा रुचि दिखाई है (ग्राफ देखने के लिए क्लिक करें) । पिछले एक हफ्ते में लोगों की दिलचस्पी निर्मल बाबा के अतीत को जानने में भी जगी है। लोग अब उनकी बायोग्रॉफी और हिस्ट्री को भी गूगल में तलाश रहे हैं। यही नहीं निर्मल बाबा की वेबसाइट और उनसे मिलने के लिए अपाइंटमेंट फिक्स करने में भी लोगों की रुचि इसी रफ्तार से बढ़ रही है। हालांकि उन्‍होंने आजकल निजी तौर पर लोगों से मिलना बंद कर रखा है।

वेबसाइट भी है सुपरहिटः निर्मल बाबा की वेबसाइट भी पिछले 6 महीने में जबरदस्त लोकप्रिय हुई है। जून 2011 में जहां उनकी वेबसाइट पर हर महीने रोजाना पांच हजार से भी कम लोग आ रहे थे वहीं यह आंकड़ा अक्टूबर 2011 में रोजाना 20 हजार से भी अधिक हो गया। अप्रैल 2012 में यह बढ़कर 42 हजार विजिटर प्रतिदिन तक आ गया है। गूगल टूल्स के मुताबिक हर महीने करीब तीन लाख लोग लगभग 8 लाख बार निर्मल बाबा की वेबसाइट पर आते हैं जिनसे उनकी वेबसाइट को 18 लाख पेजव्यू मिलते हैं। यह आंकड़ा देश की कई छोटी-मोटी समाचार वेबसाइटों से भी ज्यादा है। प्रत्येक विजिटर उनकी वेबसाइट पर करीब साढ़े 6 मिनट बिताता है।

फेसबुक पर भी खूब चर्चित हैं निर्मल बाबाः
फेसबुक पर निर्मल बाबा के दो पेज हैं। एक पेज 23 जुलाई 2011 को शुरू किया गया था। शुरू में तो यह लोकप्रिय नहीं था। लेकिन अब इस पेज से एक लाख 13 हजार से ज्यादा लोग जुड़े हैं। इस पेज पर सितंबर 2011 के बाद से कोई अपडेट नहीं किया गया है लेकिन फिर भी अप्रैल में इससे 11747 नए लोग जुड़े जबकि मार्च में 27773 लोग इस पेज से जुड़े। सितंबर के बाद सिर्फ 24 मार्च को इस पेज पर एक पोस्ट हुआ जिसमें लोगों को उनके नए पेज 'निर्मलबाबाजी' से जुड़ने की जानकारी दी गई। वहीं फिलहाल सक्रिय निर्मल बाबा का पेज 5 नवंबर 2010 को शुरु हुआ था जिससे अब तक कुल 3 लाख 53 हजार से भी अधिक लोग जुड़ चुके हैं। निर्मल बाबा के चमत्कारों को लेकर इस पेज पर गंभीर बहस हो रही है। इस पेज पर अंतिम पोस्ट 6 अप्रैल 2012 को किया गया था जिसमें भक्तों को पूर्णमासी कार्यक्रम के समाप्त किए जाने की जानकारी दी गई है।

लेकिन आप यह जानकर चौंक जाएंगे कि इस पोस्ट को जहां 17 हजार से ज्यादा लोगों ने लाइक किया वहीं 421 ने शेयर किया। अकेले इस पोस्ट पर ही लगभग 18 हजार टिप्पणियां की गई हैं जिनमें से अधिकतर में बाबा की आलोचना है और उनके तौर-तरीकों पर प्रश्न खड़े किए गए हैं। बाबा के कुछ भक्तों का यह भी कहना था कि बाबा अब काफी लोकप्रिय हो गए हैं। उन्हें अब अपने विज्ञापन बंद कर देने चाहिए। यहां पर कुछ लोग निर्मल बाबा का उपहास उड़ा कर उनसे अपने ऊपर भी कृपा करने के लिए कह रहे हैं। लेकिन सबसे ज्यादा लोग उनके कृपा के कारोबार पर प्रश्नचिन्ह उठा रहे हैं। इस पोस्ट पर टिप्पणियों में कुछ फेसबुक यूजर निर्मल बाबा को गालियां भी दे रहे हैं।

बाबा के फेसबुक पेज पर सिर्फ अंतिम पोस्ट पर आई टिप्पणियों का अध्ययन करने पर यह भी पता चला कि बाबा के समर्थन में ज्यादातर टिप्पणियां महिलाओं ने की थी। वहीं जिन पुरुषों ने बाबा के समर्थन में वहां पर अपनी बात रखी उनके प्रोफाइल फर्जी ज्यादा प्रतीत हो रहे थे। इन प्रोफाइलों में से ज्यादातर प्रोफाइल मार्च या अप्रैल में ही बनाए गए हैं। इससे ऐसा भी प्रतीत होता है कि बाबा ने टीवी के बाद फेसबुक के जरिए भी मोर्चा लेने की पूरी तैयारी की है।

बाबा के बारे में यह भी कहा जा रहा है कि वो जूनियर आर्टिस्टों को पैसा देकर अपने समागम में प्रश्न करवाते थे और अपने अनुसार बुलवाते थे लेकिन उनके फेसबुक पेज का अध्ययन करने के बाद यह और स्पष्ट हो गया है कि फर्जी प्रोफाइलों का सहारा लेकर उनका पक्ष रखा जा रहा है। माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर पर भी निर्मल बाबा की लोकप्रियता कोई कम नहीं है। उन्हें यहा पर भी 42 हजार से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं।

बाबा के बारे में बढ़ रही लोगों की रुचि (वीडियो) को सिर्फ सकारात्मक नहीं माना जा सकता क्योंकि उनके फेसबुक पेज पर पोस्ट की गई ज्यादातर टिप्पणियों में उनकी कृपा के तौर तरीकों पर ही प्रश्न उठाए गए हैं। वहीं यूट्यूब पर बाबा की तीसरी आंख के वीडियो दिखाने वाले चैनल पर भी टिप्पणी करना प्रतिबंधित हैं।
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टीवी के जरिए घर-घर पहुंच चुके इस बाबा के बारे में गूगल टूल्स के जरिए रिसर्च करने पर पता चला कि उनके बारे में लोगों की दिलचस्पी में पिछले तीन माह में जबरदस्त इजाफा हुआ है। तीन साल पहले तक वह लगभग गुमनाम थे। अगस्त 2009 में गूगल में सबसे पहले निर्मल बाबा को सर्च किया गया। साल 2010 के अंत तक भी उनमें लोगों की कोई खास रुचि नहीं थी और गिने चुने लोग ही इंटरनेट पर उनके बारे में जानकारी तलाशने की कोशिश करते थे। सितंबर 2011 से लोगों ने इंटरनेट पर निर्मल बाबा के बारे में जानने में दिलचस्पी दिखाई और तब से यह ग्राफ लगातार बढ़ता ही जा रहा है। निर्मल बाबा इंटरनेट जगत पर सबसे ज्यादा चर्चित साल 2012 में ही हुए।
2011 के अंत में निर्मल बाबा से जुड़ी जानकारियां खोजने में लोगों की रुचि इतनी बढ़ी कि सर्च ट्रेंड के मानकों को तोड़ते हुए यह ब्रेकआउट सूची में आ गए। गूगल के सर्च टूल्स से जुटाए आंकड़ों और जानकारी के मुताबिक साल 2011 में निर्मल बाबा के समागम, निर्मल दरबार, फेसबुक पेज, तस्वीरों, वॉलपेपर, वेबसाइट, फोटो और उनके यूट्यूब वीडियो को सबसे ज्यादा खोजा गया। तब तक सिर्फ भारत से ही निर्मल बाबा के बारे में लोग सर्च करते थे। यदि सर्च को सौ के स्केल पर नापें तो लगभग एक प्रतिशत यानि नजरअंदाज करने लायक लोग अमेरिका से भी निर्मल बाबा के बारे में जानकारी तलाशते थे। लेकिन पिछले तीन महीनों में निर्मल बाबा के बारे में लोगों की रुचि का पैमाना बदला है।

भारत में जहां उनमें लोगों की दिलचस्पी और भी ज्यादा बढ़ी है वहीं नेपाल, चीन और ब्रिटेन से भी उन्हें इंटरनेट पर खोजा जा रहा है। लेकिन यहां सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि मीडिया में उनके बारे में नकारात्मक खबरें आने और फेसबुक और ब्लॉग्स में उनके तरीकों पर हो रही खुली चर्चा के बाद अब 'निर्मल बाबा फ्रॉड' की वर्ड से गूगल पर खूब सर्च हो रहे हैं।

पिछले तीन महीनों में लोगों ने निर्मल बाबा के जीवन और उनकी सच्चाई के बारे में सर्च करने में ज्यादा रुचि दिखाई है (ग्राफ देखने के लिए क्लिक करें) । पिछले एक हफ्ते में लोगों की दिलचस्पी निर्मल बाबा के अतीत को जानने में भी जगी है। लोग अब उनकी बायोग्रॉफी और हिस्ट्री को भी गूगल में तलाश रहे हैं। यही नहीं निर्मल बाबा की वेबसाइट और उनसे मिलने के लिए अपाइंटमेंट फिक्स करने में भी लोगों की रुचि इसी रफ्तार से बढ़ रही है। हालांकि उन्‍होंने आजकल निजी तौर पर लोगों से मिलना बंद कर रखा है।

वेबसाइट भी है सुपरहिटः निर्मल बाबा की वेबसाइट भी पिछले 6 महीने में जबरदस्त लोकप्रिय हुई है। जून 2011 में जहां उनकी वेबसाइट पर हर महीने रोजाना पांच हजार से भी कम लोग आ रहे थे वहीं यह आंकड़ा अक्टूबर 2011 में रोजाना 20 हजार से भी अधिक हो गया। अप्रैल 2012 में यह बढ़कर 42 हजार विजिटर प्रतिदिन तक आ गया है। गूगल टूल्स के मुताबिक हर महीने करीब तीन लाख लोग लगभग 8 लाख बार निर्मल बाबा की वेबसाइट पर आते हैं जिनसे उनकी वेबसाइट को 18 लाख पेजव्यू मिलते हैं। यह आंकड़ा देश की कई छोटी-मोटी समाचार वेबसाइटों से भी ज्यादा है। प्रत्येक विजिटर उनकी वेबसाइट पर करीब साढ़े 6 मिनट बिताता है।

फेसबुक पर भी खूब चर्चित हैं निर्मल बाबाः
फेसबुक पर निर्मल बाबा के दो पेज हैं। एक पेज 23 जुलाई 2011 को शुरू किया गया था। शुरू में तो यह लोकप्रिय नहीं था। लेकिन अब इस पेज से एक लाख 13 हजार से ज्यादा लोग जुड़े हैं। इस पेज पर सितंबर 2011 के बाद से कोई अपडेट नहीं किया गया है लेकिन फिर भी अप्रैल में इससे 11747 नए लोग जुड़े जबकि मार्च में 27773 लोग इस पेज से जुड़े। सितंबर के बाद सिर्फ 24 मार्च को इस पेज पर एक पोस्ट हुआ जिसमें लोगों को उनके नए पेज 'निर्मलबाबाजी' से जुड़ने की जानकारी दी गई। वहीं फिलहाल सक्रिय निर्मल बाबा का पेज 5 नवंबर 2010 को शुरु हुआ था जिससे अब तक कुल 3 लाख 53 हजार से भी अधिक लोग जुड़ चुके हैं। निर्मल बाबा के चमत्कारों को लेकर इस पेज पर गंभीर बहस हो रही है। इस पेज पर अंतिम पोस्ट 6 अप्रैल 2012 को किया गया था जिसमें भक्तों को पूर्णमासी कार्यक्रम के समाप्त किए जाने की जानकारी दी गई है।

लेकिन आप यह जानकर चौंक जाएंगे कि इस पोस्ट को जहां 17 हजार से ज्यादा लोगों ने लाइक किया वहीं 421 ने शेयर किया। अकेले इस पोस्ट पर ही लगभग 18 हजार टिप्पणियां की गई हैं जिनमें से अधिकतर में बाबा की आलोचना है और उनके तौर-तरीकों पर प्रश्न खड़े किए गए हैं। बाबा के कुछ भक्तों का यह भी कहना था कि बाबा अब काफी लोकप्रिय हो गए हैं। उन्हें अब अपने विज्ञापन बंद कर देने चाहिए। यहां पर कुछ लोग निर्मल बाबा का उपहास उड़ा कर उनसे अपने ऊपर भी कृपा करने के लिए कह रहे हैं। लेकिन सबसे ज्यादा लोग उनके कृपा के कारोबार पर प्रश्नचिन्ह उठा रहे हैं। इस पोस्ट पर टिप्पणियों में कुछ फेसबुक यूजर निर्मल बाबा को गालियां भी दे रहे हैं।

बाबा के फेसबुक पेज पर सिर्फ अंतिम पोस्ट पर आई टिप्पणियों का अध्ययन करने पर यह भी पता चला कि बाबा के समर्थन में ज्यादातर टिप्पणियां महिलाओं ने की थी। वहीं जिन पुरुषों ने बाबा के समर्थन में वहां पर अपनी बात रखी उनके प्रोफाइल फर्जी ज्यादा प्रतीत हो रहे थे। इन प्रोफाइलों में से ज्यादातर प्रोफाइल मार्च या अप्रैल में ही बनाए गए हैं। इससे ऐसा भी प्रतीत होता है कि बाबा ने टीवी के बाद फेसबुक के जरिए भी मोर्चा लेने की पूरी तैयारी की है।

बाबा के बारे में यह भी कहा जा रहा है कि वो जूनियर आर्टिस्टों को पैसा देकर अपने समागम में प्रश्न करवाते थे और अपने अनुसार बुलवाते थे लेकिन उनके फेसबुक पेज का अध्ययन करने के बाद यह और स्पष्ट हो गया है कि फर्जी प्रोफाइलों का सहारा लेकर उनका पक्ष रखा जा रहा है। माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर पर भी निर्मल बाबा की लोकप्रियता कोई कम नहीं है। उन्हें यहा पर भी 42 हजार से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं।

बाबा के बारे में बढ़ रही लोगों की रुचि (वीडियो) को सिर्फ सकारात्मक नहीं माना जा सकता क्योंकि उनके फेसबुक पेज पर पोस्ट की गई ज्यादातर टिप्पणियों में उनकी कृपा के तौर तरीकों पर ही प्रश्न उठाए गए हैं। वहीं यूट्यूब पर बाबा की तीसरी आंख के वीडियो दिखाने वाले चैनल पर भी टिप्पणी करना प्रतिबंधित हैं।
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2011 के अंत में निर्मल बाबा से जुड़ी जानकारियां खोजने में लोगों की रुचि इतनी बढ़ी कि सर्च ट्रेंड के मानकों को तोड़ते हुए यह ब्रेकआउट सूची में आ गए। गूगल के सर्च टूल्स से जुटाए आंकड़ों और जानकारी के मुताबिक साल 2011 में निर्मल बाबा के समागम, निर्मल दरबार, फेसबुक पेज, तस्वीरों, वॉलपेपर, वेबसाइट, फोटो और उनके यूट्यूब वीडियो को सबसे ज्यादा खोजा गया। तब तक सिर्फ भारत से ही निर्मल बाबा के बारे में लोग सर्च करते थे। यदि सर्च को सौ के स्केल पर नापें तो लगभग एक प्रतिशत यानि नजरअंदाज करने लायक लोग अमेरिका से भी निर्मल बाबा के बारे में जानकारी तलाशते थे। लेकिन पिछले तीन महीनों में निर्मल बाबा के बारे में लोगों की रुचि का पैमाना बदला है।
भारत में जहां उनमें लोगों की दिलचस्पी और भी ज्यादा बढ़ी है वहीं नेपाल, चीन और ब्रिटेन से भी उन्हें इंटरनेट पर खोजा जा रहा है। लेकिन यहां सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि मीडिया में उनके बारे में नकारात्मक खबरें आने और फेसबुक और ब्लॉग्स में उनके तरीकों पर हो रही खुली चर्चा के बाद अब 'निर्मल बाबा फ्रॉड' की वर्ड से गूगल पर खूब सर्च हो रहे हैं।

पिछले तीन महीनों में लोगों ने निर्मल बाबा के जीवन और उनकी सच्चाई के बारे में सर्च करने में ज्यादा रुचि दिखाई है (ग्राफ देखने के लिए क्लिक करें) । पिछले एक हफ्ते में लोगों की दिलचस्पी निर्मल बाबा के अतीत को जानने में भी जगी है। लोग अब उनकी बायोग्रॉफी और हिस्ट्री को भी गूगल में तलाश रहे हैं। यही नहीं निर्मल बाबा की वेबसाइट और उनसे मिलने के लिए अपाइंटमेंट फिक्स करने में भी लोगों की रुचि इसी रफ्तार से बढ़ रही है। हालांकि उन्‍होंने आजकल निजी तौर पर लोगों से मिलना बंद कर रखा है।

वेबसाइट भी है सुपरहिटः निर्मल बाबा की वेबसाइट भी पिछले 6 महीने में जबरदस्त लोकप्रिय हुई है। जून 2011 में जहां उनकी वेबसाइट पर हर महीने रोजाना पांच हजार से भी कम लोग आ रहे थे वहीं यह आंकड़ा अक्टूबर 2011 में रोजाना 20 हजार से भी अधिक हो गया। अप्रैल 2012 में यह बढ़कर 42 हजार विजिटर प्रतिदिन तक आ गया है। गूगल टूल्स के मुताबिक हर महीने करीब तीन लाख लोग लगभग 8 लाख बार निर्मल बाबा की वेबसाइट पर आते हैं जिनसे उनकी वेबसाइट को 18 लाख पेजव्यू मिलते हैं। यह आंकड़ा देश की कई छोटी-मोटी समाचार वेबसाइटों से भी ज्यादा है। प्रत्येक विजिटर उनकी वेबसाइट पर करीब साढ़े 6 मिनट बिताता है।

फेसबुक पर भी खूब चर्चित हैं निर्मल बाबाः
फेसबुक पर निर्मल बाबा के दो पेज हैं। एक पेज 23 जुलाई 2011 को शुरू किया गया था। शुरू में तो यह लोकप्रिय नहीं था। लेकिन अब इस पेज से एक लाख 13 हजार से ज्यादा लोग जुड़े हैं। इस पेज पर सितंबर 2011 के बाद से कोई अपडेट नहीं किया गया है लेकिन फिर भी अप्रैल में इससे 11747 नए लोग जुड़े जबकि मार्च में 27773 लोग इस पेज से जुड़े। सितंबर के बाद सिर्फ 24 मार्च को इस पेज पर एक पोस्ट हुआ जिसमें लोगों को उनके नए पेज 'निर्मलबाबाजी' से जुड़ने की जानकारी दी गई। वहीं फिलहाल सक्रिय निर्मल बाबा का पेज 5 नवंबर 2010 को शुरु हुआ था जिससे अब तक कुल 3 लाख 53 हजार से भी अधिक लोग जुड़ चुके हैं। निर्मल बाबा के चमत्कारों को लेकर इस पेज पर गंभीर बहस हो रही है। इस पेज पर अंतिम पोस्ट 6 अप्रैल 2012 को किया गया था जिसमें भक्तों को पूर्णमासी कार्यक्रम के समाप्त किए जाने की जानकारी दी गई है।

लेकिन आप यह जानकर चौंक जाएंगे कि इस पोस्ट को जहां 17 हजार से ज्यादा लोगों ने लाइक किया वहीं 421 ने शेयर किया। अकेले इस पोस्ट पर ही लगभग 18 हजार टिप्पणियां की गई हैं जिनमें से अधिकतर में बाबा की आलोचना है और उनके तौर-तरीकों पर प्रश्न खड़े किए गए हैं। बाबा के कुछ भक्तों का यह भी कहना था कि बाबा अब काफी लोकप्रिय हो गए हैं। उन्हें अब अपने विज्ञापन बंद कर देने चाहिए। यहां पर कुछ लोग निर्मल बाबा का उपहास उड़ा कर उनसे अपने ऊपर भी कृपा करने के लिए कह रहे हैं। लेकिन सबसे ज्यादा लोग उनके कृपा के कारोबार पर प्रश्नचिन्ह उठा रहे हैं। इस पोस्ट पर टिप्पणियों में कुछ फेसबुक यूजर निर्मल बाबा को गालियां भी दे रहे हैं।

बाबा के फेसबुक पेज पर सिर्फ अंतिम पोस्ट पर आई टिप्पणियों का अध्ययन करने पर यह भी पता चला कि बाबा के समर्थन में ज्यादातर टिप्पणियां महिलाओं ने की थी। वहीं जिन पुरुषों ने बाबा के समर्थन में वहां पर अपनी बात रखी उनके प्रोफाइल फर्जी ज्यादा प्रतीत हो रहे थे। इन प्रोफाइलों में से ज्यादातर प्रोफाइल मार्च या अप्रैल में ही बनाए गए हैं। इससे ऐसा भी प्रतीत होता है कि बाबा ने टीवी के बाद फेसबुक के जरिए भी मोर्चा लेने की पूरी तैयारी की है।

बाबा के बारे में यह भी कहा जा रहा है कि वो जूनियर आर्टिस्टों को पैसा देकर अपने समागम में प्रश्न करवाते थे और अपने अनुसार बुलवाते थे लेकिन उनके फेसबुक पेज का अध्ययन करने के बाद यह और स्पष्ट हो गया है कि फर्जी प्रोफाइलों का सहारा लेकर उनका पक्ष रखा जा रहा है। माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर पर भी निर्मल बाबा की लोकप्रियता कोई कम नहीं है। उन्हें यहा पर भी 42 हजार से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं।

बाबा के बारे में बढ़ रही लोगों की रुचि (वीडियो) को सिर्फ सकारात्मक नहीं माना जा सकता क्योंकि उनके फेसबुक पेज पर पोस्ट की गई ज्यादातर टिप्पणियों में उनकी कृपा के तौर तरीकों पर ही प्रश्न उठाए गए हैं। वहीं यूट्यूब पर बाबा की तीसरी आंख के वीडियो दिखाने वाले चैनल पर भी टिप्पणी करना प्रतिबंधित हैं।
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भारत में जहां उनमें लोगों की दिलचस्पी और भी ज्यादा बढ़ी है वहीं नेपाल, चीन और ब्रिटेन से भी उन्हें इंटरनेट पर खोजा जा रहा है। लेकिन यहां सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि मीडिया में उनके बारे में नकारात्मक खबरें आने और फेसबुक और ब्लॉग्स में उनके तरीकों पर हो रही खुली चर्चा के बाद अब 'निर्मल बाबा फ्रॉड' की वर्ड से गूगल पर खूब सर्च हो रहे हैं।

पिछले तीन महीनों में लोगों ने निर्मल बाबा के जीवन और उनकी सच्चाई के बारे में सर्च करने में ज्यादा रुचि दिखाई है (ग्राफ देखने के लिए क्लिक करें) । पिछले एक हफ्ते में लोगों की दिलचस्पी निर्मल बाबा के अतीत को जानने में भी जगी है। लोग अब उनकी बायोग्रॉफी और हिस्ट्री को भी गूगल में तलाश रहे हैं। यही नहीं निर्मल बाबा की वेबसाइट और उनसे मिलने के लिए अपाइंटमेंट फिक्स करने में भी लोगों की रुचि इसी रफ्तार से बढ़ रही है। हालांकि उन्‍होंने आजकल निजी तौर पर लोगों से मिलना बंद कर रखा है।

वेबसाइट भी है सुपरहिटः निर्मल बाबा की वेबसाइट भी पिछले 6 महीने में जबरदस्त लोकप्रिय हुई है। जून 2011 में जहां उनकी वेबसाइट पर हर महीने रोजाना पांच हजार से भी कम लोग आ रहे थे वहीं यह आंकड़ा अक्टूबर 2011 में रोजाना 20 हजार से भी अधिक हो गया। अप्रैल 2012 में यह बढ़कर 42 हजार विजिटर प्रतिदिन तक आ गया है। गूगल टूल्स के मुताबिक हर महीने करीब तीन लाख लोग लगभग 8 लाख बार निर्मल बाबा की वेबसाइट पर आते हैं जिनसे उनकी वेबसाइट को 18 लाख पेजव्यू मिलते हैं। यह आंकड़ा देश की कई छोटी-मोटी समाचार वेबसाइटों से भी ज्यादा है। प्रत्येक विजिटर उनकी वेबसाइट पर करीब साढ़े 6 मिनट बिताता है।

फेसबुक पर भी खूब चर्चित हैं निर्मल बाबाः
फेसबुक पर निर्मल बाबा के दो पेज हैं। एक पेज 23 जुलाई 2011 को शुरू किया गया था। शुरू में तो यह लोकप्रिय नहीं था। लेकिन अब इस पेज से एक लाख 13 हजार से ज्यादा लोग जुड़े हैं। इस पेज पर सितंबर 2011 के बाद से कोई अपडेट नहीं किया गया है लेकिन फिर भी अप्रैल में इससे 11747 नए लोग जुड़े जबकि मार्च में 27773 लोग इस पेज से जुड़े। सितंबर के बाद सिर्फ 24 मार्च को इस पेज पर एक पोस्ट हुआ जिसमें लोगों को उनके नए पेज 'निर्मलबाबाजी' से जुड़ने की जानकारी दी गई। वहीं फिलहाल सक्रिय निर्मल बाबा का पेज 5 नवंबर 2010 को शुरु हुआ था जिससे अब तक कुल 3 लाख 53 हजार से भी अधिक लोग जुड़ चुके हैं। निर्मल बाबा के चमत्कारों को लेकर इस पेज पर गंभीर बहस हो रही है। इस पेज पर अंतिम पोस्ट 6 अप्रैल 2012 को किया गया था जिसमें भक्तों को पूर्णमासी कार्यक्रम के समाप्त किए जाने की जानकारी दी गई है।

लेकिन आप यह जानकर चौंक जाएंगे कि इस पोस्ट को जहां 17 हजार से ज्यादा लोगों ने लाइक किया वहीं 421 ने शेयर किया। अकेले इस पोस्ट पर ही लगभग 18 हजार टिप्पणियां की गई हैं जिनमें से अधिकतर में बाबा की आलोचना है और उनके तौर-तरीकों पर प्रश्न खड़े किए गए हैं। बाबा के कुछ भक्तों का यह भी कहना था कि बाबा अब काफी लोकप्रिय हो गए हैं। उन्हें अब अपने विज्ञापन बंद कर देने चाहिए। यहां पर कुछ लोग निर्मल बाबा का उपहास उड़ा कर उनसे अपने ऊपर भी कृपा करने के लिए कह रहे हैं। लेकिन सबसे ज्यादा लोग उनके कृपा के कारोबार पर प्रश्नचिन्ह उठा रहे हैं। इस पोस्ट पर टिप्पणियों में कुछ फेसबुक यूजर निर्मल बाबा को गालियां भी दे रहे हैं।

बाबा के फेसबुक पेज पर सिर्फ अंतिम पोस्ट पर आई टिप्पणियों का अध्ययन करने पर यह भी पता चला कि बाबा के समर्थन में ज्यादातर टिप्पणियां महिलाओं ने की थी। वहीं जिन पुरुषों ने बाबा के समर्थन में वहां पर अपनी बात रखी उनके प्रोफाइल फर्जी ज्यादा प्रतीत हो रहे थे। इन प्रोफाइलों में से ज्यादातर प्रोफाइल मार्च या अप्रैल में ही बनाए गए हैं। इससे ऐसा भी प्रतीत होता है कि बाबा ने टीवी के बाद फेसबुक के जरिए भी मोर्चा लेने की पूरी तैयारी की है।

बाबा के बारे में यह भी कहा जा रहा है कि वो जूनियर आर्टिस्टों को पैसा देकर अपने समागम में प्रश्न करवाते थे और अपने अनुसार बुलवाते थे लेकिन उनके फेसबुक पेज का अध्ययन करने के बाद यह और स्पष्ट हो गया है कि फर्जी प्रोफाइलों का सहारा लेकर उनका पक्ष रखा जा रहा है। माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर पर भी निर्मल बाबा की लोकप्रियता कोई कम नहीं है। उन्हें यहा पर भी 42 हजार से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं।

बाबा के बारे में बढ़ रही लोगों की रुचि (वीडियो) को सिर्फ सकारात्मक नहीं माना जा सकता क्योंकि उनके फेसबुक पेज पर पोस्ट की गई ज्यादातर टिप्पणियों में उनकी कृपा के तौर तरीकों पर ही प्रश्न उठाए गए हैं। वहीं यूट्यूब पर बाबा की तीसरी आंख के वीडियो दिखाने वाले चैनल पर भी टिप्पणी करना प्रतिबंधित हैं।
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पिछले तीन महीनों में लोगों ने निर्मल बाबा के जीवन और उनकी सच्चाई के बारे में सर्च करने में ज्यादा रुचि दिखाई है (ग्राफ देखने के लिए क्लिक करें) । पिछले एक हफ्ते में लोगों की दिलचस्पी निर्मल बाबा के अतीत को जानने में भी जगी है। लोग अब उनकी बायोग्रॉफी और हिस्ट्री को भी गूगल में तलाश रहे हैं। यही नहीं निर्मल बाबा की वेबसाइट और उनसे मिलने के लिए अपाइंटमेंट फिक्स करने में भी लोगों की रुचि इसी रफ्तार से बढ़ रही है। हालांकि उन्‍होंने आजकल निजी तौर पर लोगों से मिलना बंद कर रखा है।

वेबसाइट भी है सुपरहिटः निर्मल बाबा की वेबसाइट भी पिछले 6 महीने में जबरदस्त लोकप्रिय हुई है। जून 2011 में जहां उनकी वेबसाइट पर हर महीने रोजाना पांच हजार से भी कम लोग आ रहे थे वहीं यह आंकड़ा अक्टूबर 2011 में रोजाना 20 हजार से भी अधिक हो गया। अप्रैल 2012 में यह बढ़कर 42 हजार विजिटर प्रतिदिन तक आ गया है। गूगल टूल्स के मुताबिक हर महीने करीब तीन लाख लोग लगभग 8 लाख बार निर्मल बाबा की वेबसाइट पर आते हैं जिनसे उनकी वेबसाइट को 18 लाख पेजव्यू मिलते हैं। यह आंकड़ा देश की कई छोटी-मोटी समाचार वेबसाइटों से भी ज्यादा है। प्रत्येक विजिटर उनकी वेबसाइट पर करीब साढ़े 6 मिनट बिताता है।

फेसबुक पर भी खूब चर्चित हैं निर्मल बाबाः
फेसबुक पर निर्मल बाबा के दो पेज हैं। एक पेज 23 जुलाई 2011 को शुरू किया गया था। शुरू में तो यह लोकप्रिय नहीं था। लेकिन अब इस पेज से एक लाख 13 हजार से ज्यादा लोग जुड़े हैं। इस पेज पर सितंबर 2011 के बाद से कोई अपडेट नहीं किया गया है लेकिन फिर भी अप्रैल में इससे 11747 नए लोग जुड़े जबकि मार्च में 27773 लोग इस पेज से जुड़े। सितंबर के बाद सिर्फ 24 मार्च को इस पेज पर एक पोस्ट हुआ जिसमें लोगों को उनके नए पेज 'निर्मलबाबाजी' से जुड़ने की जानकारी दी गई। वहीं फिलहाल सक्रिय निर्मल बाबा का पेज 5 नवंबर 2010 को शुरु हुआ था जिससे अब तक कुल 3 लाख 53 हजार से भी अधिक लोग जुड़ चुके हैं। निर्मल बाबा के चमत्कारों को लेकर इस पेज पर गंभीर बहस हो रही है। इस पेज पर अंतिम पोस्ट 6 अप्रैल 2012 को किया गया था जिसमें भक्तों को पूर्णमासी कार्यक्रम के समाप्त किए जाने की जानकारी दी गई है।

लेकिन आप यह जानकर चौंक जाएंगे कि इस पोस्ट को जहां 17 हजार से ज्यादा लोगों ने लाइक किया वहीं 421 ने शेयर किया। अकेले इस पोस्ट पर ही लगभग 18 हजार टिप्पणियां की गई हैं जिनमें से अधिकतर में बाबा की आलोचना है और उनके तौर-तरीकों पर प्रश्न खड़े किए गए हैं। बाबा के कुछ भक्तों का यह भी कहना था कि बाबा अब काफी लोकप्रिय हो गए हैं। उन्हें अब अपने विज्ञापन बंद कर देने चाहिए। यहां पर कुछ लोग निर्मल बाबा का उपहास उड़ा कर उनसे अपने ऊपर भी कृपा करने के लिए कह रहे हैं। लेकिन सबसे ज्यादा लोग उनके कृपा के कारोबार पर प्रश्नचिन्ह उठा रहे हैं। इस पोस्ट पर टिप्पणियों में कुछ फेसबुक यूजर निर्मल बाबा को गालियां भी दे रहे हैं।

बाबा के फेसबुक पेज पर सिर्फ अंतिम पोस्ट पर आई टिप्पणियों का अध्ययन करने पर यह भी पता चला कि बाबा के समर्थन में ज्यादातर टिप्पणियां महिलाओं ने की थी। वहीं जिन पुरुषों ने बाबा के समर्थन में वहां पर अपनी बात रखी उनके प्रोफाइल फर्जी ज्यादा प्रतीत हो रहे थे। इन प्रोफाइलों में से ज्यादातर प्रोफाइल मार्च या अप्रैल में ही बनाए गए हैं। इससे ऐसा भी प्रतीत होता है कि बाबा ने टीवी के बाद फेसबुक के जरिए भी मोर्चा लेने की पूरी तैयारी की है।

बाबा के बारे में यह भी कहा जा रहा है कि वो जूनियर आर्टिस्टों को पैसा देकर अपने समागम में प्रश्न करवाते थे और अपने अनुसार बुलवाते थे लेकिन उनके फेसबुक पेज का अध्ययन करने के बाद यह और स्पष्ट हो गया है कि फर्जी प्रोफाइलों का सहारा लेकर उनका पक्ष रखा जा रहा है। माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर पर भी निर्मल बाबा की लोकप्रियता कोई कम नहीं है। उन्हें यहा पर भी 42 हजार से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं।

बाबा के बारे में बढ़ रही लोगों की रुचि (वीडियो) को सिर्फ सकारात्मक नहीं माना जा सकता क्योंकि उनके फेसबुक पेज पर पोस्ट की गई ज्यादातर टिप्पणियों में उनकी कृपा के तौर तरीकों पर ही प्रश्न उठाए गए हैं। वहीं यूट्यूब पर बाबा की तीसरी आंख के वीडियो दिखाने वाले चैनल पर भी टिप्पणी करना प्रतिबंधित हैं।
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वेबसाइट भी है सुपरहिटः निर्मल बाबा की वेबसाइट भी पिछले 6 महीने में जबरदस्त लोकप्रिय हुई है। जून 2011 में जहां उनकी वेबसाइट पर हर महीने रोजाना पांच हजार से भी कम लोग आ रहे थे वहीं यह आंकड़ा अक्टूबर 2011 में रोजाना 20 हजार से भी अधिक हो गया। अप्रैल 2012 में यह बढ़कर 42 हजार विजिटर प्रतिदिन तक आ गया है। गूगल टूल्स के मुताबिक हर महीने करीब तीन लाख लोग लगभग 8 लाख बार निर्मल बाबा की वेबसाइट पर आते हैं जिनसे उनकी वेबसाइट को 18 लाख पेजव्यू मिलते हैं। यह आंकड़ा देश की कई छोटी-मोटी समाचार वेबसाइटों से भी ज्यादा है। प्रत्येक विजिटर उनकी वेबसाइट पर करीब साढ़े 6 मिनट बिताता है।
फेसबुक पर भी खूब चर्चित हैं निर्मल बाबाः
फेसबुक पर निर्मल बाबा के दो पेज हैं। एक पेज 23 जुलाई 2011 को शुरू किया गया था। शुरू में तो यह लोकप्रिय नहीं था। लेकिन अब इस पेज से एक लाख 13 हजार से ज्यादा लोग जुड़े हैं। इस पेज पर सितंबर 2011 के बाद से कोई अपडेट नहीं किया गया है लेकिन फिर भी अप्रैल में इससे 11747 नए लोग जुड़े जबकि मार्च में 27773 लोग इस पेज से जुड़े। सितंबर के बाद सिर्फ 24 मार्च को इस पेज पर एक पोस्ट हुआ जिसमें लोगों को उनके नए पेज 'निर्मलबाबाजी' से जुड़ने की जानकारी दी गई। वहीं फिलहाल सक्रिय निर्मल बाबा का पेज 5 नवंबर 2010 को शुरु हुआ था जिससे अब तक कुल 3 लाख 53 हजार से भी अधिक लोग जुड़ चुके हैं। निर्मल बाबा के चमत्कारों को लेकर इस पेज पर गंभीर बहस हो रही है। इस पेज पर अंतिम पोस्ट 6 अप्रैल 2012 को किया गया था जिसमें भक्तों को पूर्णमासी कार्यक्रम के समाप्त किए जाने की जानकारी दी गई है।

लेकिन आप यह जानकर चौंक जाएंगे कि इस पोस्ट को जहां 17 हजार से ज्यादा लोगों ने लाइक किया वहीं 421 ने शेयर किया। अकेले इस पोस्ट पर ही लगभग 18 हजार टिप्पणियां की गई हैं जिनमें से अधिकतर में बाबा की आलोचना है और उनके तौर-तरीकों पर प्रश्न खड़े किए गए हैं। बाबा के कुछ भक्तों का यह भी कहना था कि बाबा अब काफी लोकप्रिय हो गए हैं। उन्हें अब अपने विज्ञापन बंद कर देने चाहिए। यहां पर कुछ लोग निर्मल बाबा का उपहास उड़ा कर उनसे अपने ऊपर भी कृपा करने के लिए कह रहे हैं। लेकिन सबसे ज्यादा लोग उनके कृपा के कारोबार पर प्रश्नचिन्ह उठा रहे हैं। इस पोस्ट पर टिप्पणियों में कुछ फेसबुक यूजर निर्मल बाबा को गालियां भी दे रहे हैं।

बाबा के फेसबुक पेज पर सिर्फ अंतिम पोस्ट पर आई टिप्पणियों का अध्ययन करने पर यह भी पता चला कि बाबा के समर्थन में ज्यादातर टिप्पणियां महिलाओं ने की थी। वहीं जिन पुरुषों ने बाबा के समर्थन में वहां पर अपनी बात रखी उनके प्रोफाइल फर्जी ज्यादा प्रतीत हो रहे थे। इन प्रोफाइलों में से ज्यादातर प्रोफाइल मार्च या अप्रैल में ही बनाए गए हैं। इससे ऐसा भी प्रतीत होता है कि बाबा ने टीवी के बाद फेसबुक के जरिए भी मोर्चा लेने की पूरी तैयारी की है।

बाबा के बारे में यह भी कहा जा रहा है कि वो जूनियर आर्टिस्टों को पैसा देकर अपने समागम में प्रश्न करवाते थे और अपने अनुसार बुलवाते थे लेकिन उनके फेसबुक पेज का अध्ययन करने के बाद यह और स्पष्ट हो गया है कि फर्जी प्रोफाइलों का सहारा लेकर उनका पक्ष रखा जा रहा है। माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर पर भी निर्मल बाबा की लोकप्रियता कोई कम नहीं है। उन्हें यहा पर भी 42 हजार से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं।

बाबा के बारे में बढ़ रही लोगों की रुचि (वीडियो) को सिर्फ सकारात्मक नहीं माना जा सकता क्योंकि उनके फेसबुक पेज पर पोस्ट की गई ज्यादातर टिप्पणियों में उनकी कृपा के तौर तरीकों पर ही प्रश्न उठाए गए हैं। वहीं यूट्यूब पर बाबा की तीसरी आंख के वीडियो दिखाने वाले चैनल पर भी टिप्पणी करना प्रतिबंधित हैं।
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फेसबुक पर भी खूब चर्चित हैं निर्मल बाबाः
फेसबुक पर निर्मल बाबा के दो पेज हैं। एक पेज 23 जुलाई 2011 को शुरू किया गया था। शुरू में तो यह लोकप्रिय नहीं था। लेकिन अब इस पेज से एक लाख 13 हजार से ज्यादा लोग जुड़े हैं। इस पेज पर सितंबर 2011 के बाद से कोई अपडेट नहीं किया गया है लेकिन फिर भी अप्रैल में इससे 11747 नए लोग जुड़े जबकि मार्च में 27773 लोग इस पेज से जुड़े। सितंबर के बाद सिर्फ 24 मार्च को इस पेज पर एक पोस्ट हुआ जिसमें लोगों को उनके नए पेज 'निर्मलबाबाजी' से जुड़ने की जानकारी दी गई। वहीं फिलहाल सक्रिय निर्मल बाबा का पेज 5 नवंबर 2010 को शुरु हुआ था जिससे अब तक कुल 3 लाख 53 हजार से भी अधिक लोग जुड़ चुके हैं। निर्मल बाबा के चमत्कारों को लेकर इस पेज पर गंभीर बहस हो रही है। इस पेज पर अंतिम पोस्ट 6 अप्रैल 2012 को किया गया था जिसमें भक्तों को पूर्णमासी कार्यक्रम के समाप्त किए जाने की जानकारी दी गई है।
लेकिन आप यह जानकर चौंक जाएंगे कि इस पोस्ट को जहां 17 हजार से ज्यादा लोगों ने लाइक किया वहीं 421 ने शेयर किया। अकेले इस पोस्ट पर ही लगभग 18 हजार टिप्पणियां की गई हैं जिनमें से अधिकतर में बाबा की आलोचना है और उनके तौर-तरीकों पर प्रश्न खड़े किए गए हैं। बाबा के कुछ भक्तों का यह भी कहना था कि बाबा अब काफी लोकप्रिय हो गए हैं। उन्हें अब अपने विज्ञापन बंद कर देने चाहिए। यहां पर कुछ लोग निर्मल बाबा का उपहास उड़ा कर उनसे अपने ऊपर भी कृपा करने के लिए कह रहे हैं। लेकिन सबसे ज्यादा लोग उनके कृपा के कारोबार पर प्रश्नचिन्ह उठा रहे हैं। इस पोस्ट पर टिप्पणियों में कुछ फेसबुक यूजर निर्मल बाबा को गालियां भी दे रहे हैं।

बाबा के फेसबुक पेज पर सिर्फ अंतिम पोस्ट पर आई टिप्पणियों का अध्ययन करने पर यह भी पता चला कि बाबा के समर्थन में ज्यादातर टिप्पणियां महिलाओं ने की थी। वहीं जिन पुरुषों ने बाबा के समर्थन में वहां पर अपनी बात रखी उनके प्रोफाइल फर्जी ज्यादा प्रतीत हो रहे थे। इन प्रोफाइलों में से ज्यादातर प्रोफाइल मार्च या अप्रैल में ही बनाए गए हैं। इससे ऐसा भी प्रतीत होता है कि बाबा ने टीवी के बाद फेसबुक के जरिए भी मोर्चा लेने की पूरी तैयारी की है।

बाबा के बारे में यह भी कहा जा रहा है कि वो जूनियर आर्टिस्टों को पैसा देकर अपने समागम में प्रश्न करवाते थे और अपने अनुसार बुलवाते थे लेकिन उनके फेसबुक पेज का अध्ययन करने के बाद यह और स्पष्ट हो गया है कि फर्जी प्रोफाइलों का सहारा लेकर उनका पक्ष रखा जा रहा है। माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर पर भी निर्मल बाबा की लोकप्रियता कोई कम नहीं है। उन्हें यहा पर भी 42 हजार से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं।

बाबा के बारे में बढ़ रही लोगों की रुचि (वीडियो) को सिर्फ सकारात्मक नहीं माना जा सकता क्योंकि उनके फेसबुक पेज पर पोस्ट की गई ज्यादातर टिप्पणियों में उनकी कृपा के तौर तरीकों पर ही प्रश्न उठाए गए हैं। वहीं यूट्यूब पर बाबा की तीसरी आंख के वीडियो दिखाने वाले चैनल पर भी टिप्पणी करना प्रतिबंधित हैं।
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बाबा के फेसबुक पेज पर सिर्फ अंतिम पोस्ट पर आई टिप्पणियों का अध्ययन करने पर यह भी पता चला कि बाबा के समर्थन में ज्यादातर टिप्पणियां महिलाओं ने की थी। वहीं जिन पुरुषों ने बाबा के समर्थन में वहां पर अपनी बात रखी उनके प्रोफाइल फर्जी ज्यादा प्रतीत हो रहे थे। इन प्रोफाइलों में से ज्यादातर प्रोफाइल मार्च या अप्रैल में ही बनाए गए हैं। इससे ऐसा भी प्रतीत होता है कि बाबा ने टीवी के बाद फेसबुक के जरिए भी मोर्चा लेने की पूरी तैयारी की है।

बाबा के बारे में यह भी कहा जा रहा है कि वो जूनियर आर्टिस्टों को पैसा देकर अपने समागम में प्रश्न करवाते थे और अपने अनुसार बुलवाते थे लेकिन उनके फेसबुक पेज का अध्ययन करने के बाद यह और स्पष्ट हो गया है कि फर्जी प्रोफाइलों का सहारा लेकर उनका पक्ष रखा जा रहा है। माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर पर भी निर्मल बाबा की लोकप्रियता कोई कम नहीं है। उन्हें यहा पर भी 42 हजार से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं।

बाबा के बारे में बढ़ रही लोगों की रुचि (वीडियो) को सिर्फ सकारात्मक नहीं माना जा सकता क्योंकि उनके फेसबुक पेज पर पोस्ट की गई ज्यादातर टिप्पणियों में उनकी कृपा के तौर तरीकों पर ही प्रश्न उठाए गए हैं। वहीं यूट्यूब पर बाबा की तीसरी आंख के वीडियो दिखाने वाले चैनल पर भी टिप्पणी करना प्रतिबंधित हैं।
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बाबा के बारे में यह भी कहा जा रहा है कि वो जूनियर आर्टिस्टों को पैसा देकर अपने समागम में प्रश्न करवाते थे और अपने अनुसार बुलवाते थे लेकिन उनके फेसबुक पेज का अध्ययन करने के बाद यह और स्पष्ट हो गया है कि फर्जी प्रोफाइलों का सहारा लेकर उनका पक्ष रखा जा रहा है। माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर पर भी निर्मल बाबा की लोकप्रियता कोई कम नहीं है। उन्हें यहा पर भी 42 हजार से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं।

बाबा के बारे में बढ़ रही लोगों की रुचि (वीडियो) को सिर्फ सकारात्मक नहीं माना जा सकता क्योंकि उनके फेसबुक पेज पर पोस्ट की गई ज्यादातर टिप्पणियों में उनकी कृपा के तौर तरीकों पर ही प्रश्न उठाए गए हैं। वहीं यूट्यूब पर बाबा की तीसरी आंख के वीडियो दिखाने वाले चैनल पर भी टिप्पणी करना प्रतिबंधित हैं।
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बाबा के बारे में यह भी कहा जा रहा है कि वो जूनियर आर्टिस्टों को पैसा देकर अपने समागम में प्रश्न करवाते थे और अपने अनुसार बुलवाते थे लेकिन उनके फेसबुक पेज का अध्ययन करने के बाद यह और स्पष्ट हो गया है कि फर्जी प्रोफाइलों का सहारा लेकर उनका पक्ष रखा जा रहा है। माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर पर भी निर्मल बाबा की लोकप्रियता कोई कम नहीं है। उन्हें यहा पर भी 42 हजार से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं।
बाबा के बारे में बढ़ रही लोगों की रुचि (वीडियो) को सिर्फ सकारात्मक नहीं माना जा सकता क्योंकि उनके फेसबुक पेज पर पोस्ट की गई ज्यादातर टिप्पणियों में उनकी कृपा के तौर तरीकों पर ही प्रश्न उठाए गए हैं। वहीं यूट्यूब पर बाबा की तीसरी आंख के वीडियो दिखाने वाले चैनल पर भी टिप्पणी करना प्रतिबंधित हैं।
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बाबा के बारे में बढ़ रही लोगों की रुचि (वीडियो) को सिर्फ सकारात्मक नहीं माना जा सकता क्योंकि उनके फेसबुक पेज पर पोस्ट की गई ज्यादातर टिप्पणियों में उनकी कृपा के तौर तरीकों पर ही प्रश्न उठाए गए हैं। वहीं यूट्यूब पर बाबा की तीसरी आंख के वीडियो दिखाने वाले चैनल पर भी टिप्पणी करना प्रतिबंधित हैं।
चार अलग-अलग शहरों-लखनऊ, रायपुर, भोपाल और फतेहपुर में निर्मल बाबा के खिलाफ शिकायत दर्ज की जा चुकी है। संभव है, बाबा के खिलाफ आज लखनऊ में एफआईआर भी दर्ज हो जाए। इसके लिए दो बच्‍चों ने पुलिस में शिकायत दर्ज की है। वे आज एफआईआर दर्ज करने की मांग करने वाले हैं। यह मांग नहीं माने जाने पर वे कोर्ट की शरण में जाने वाले हैं।

टीवी के जरिए घर-घर पहुंच चुके इस बाबा के बारे में गूगल टूल्स के जरिए रिसर्च करने पर पता चला कि उनके बारे में लोगों की दिलचस्पी में पिछले तीन माह में जबरदस्त इजाफा हुआ है। तीन साल पहले तक वह लगभग गुमनाम थे। अगस्त 2009 में गूगल में सबसे पहले निर्मल बाबा को सर्च किया गया। साल 2010 के अंत तक भी उनमें लोगों की कोई खास रुचि नहीं थी और गिने चुने लोग ही इंटरनेट पर उनके बारे में जानकारी तलाशने की कोशिश करते थे। सितंबर 2011 से लोगों ने इंटरनेट पर निर्मल बाबा के बारे में जानने में दिलचस्पी दिखाई और तब से यह ग्राफ लगातार बढ़ता ही जा रहा है। निर्मल बाबा इंटरनेट जगत पर सबसे ज्यादा चर्चित साल 2012 में ही हुए।
2011 के अंत में निर्मल बाबा से जुड़ी जानकारियां खोजने में लोगों की रुचि इतनी बढ़ी कि सर्च ट्रेंड के मानकों को तोड़ते हुए यह ब्रेकआउट सूची में आ गए। गूगल के सर्च टूल्स से जुटाए आंकड़ों और जानकारी के मुताबिक साल 2011 में निर्मल बाबा के समागम, निर्मल दरबार, फेसबुक पेज, तस्वीरों, वॉलपेपर, वेबसाइट, फोटो और उनके यूट्यूब वीडियो को सबसे ज्यादा खोजा गया। तब तक सिर्फ भारत से ही निर्मल बाबा के बारे में लोग सर्च करते थे। यदि सर्च को सौ के स्केल पर नापें तो लगभग एक प्रतिशत यानि नजरअंदाज करने लायक लोग अमेरिका से भी निर्मल बाबा के बारे में जानकारी तलाशते थे। लेकिन पिछले तीन महीनों में निर्मल बाबा के बारे में लोगों की रुचि का पैमाना बदला है।
भारत में जहां उनमें लोगों की दिलचस्पी और भी ज्यादा बढ़ी है वहीं नेपाल, चीन और ब्रिटेन से भी उन्हें इंटरनेट पर खोजा जा रहा है। लेकिन यहां सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि मीडिया में उनके बारे में नकारात्मक खबरें आने और फेसबुक और ब्लॉग्स में उनके तरीकों पर हो रही खुली चर्चा के बाद अब 'निर्मल बाबा फ्रॉड' की वर्ड से गूगल पर खूब सर्च हो रहे हैं।

पिछले तीन महीनों में लोगों ने निर्मल बाबा के जीवन और उनकी सच्चाई के बारे में सर्च करने में ज्यादा रुचि दिखाई है (ग्राफ देखने के लिए क्लिक करें) । पिछले एक हफ्ते में लोगों की दिलचस्पी निर्मल बाबा के अतीत को जानने में भी जगी है। लोग अब उनकी बायोग्रॉफी और हिस्ट्री को भी गूगल में तलाश रहे हैं। यही नहीं निर्मल बाबा की वेबसाइट और उनसे मिलने के लिए अपाइंटमेंट फिक्स करने में भी लोगों की रुचि इसी रफ्तार से बढ़ रही है। हालांकि उन्‍होंने आजकल निजी तौर पर लोगों से मिलना बंद कर रखा है।

वेबसाइट भी है सुपरहिटः निर्मल बाबा की वेबसाइट भी पिछले 6 महीने में जबरदस्त लोकप्रिय हुई है। जून 2011 में जहां उनकी वेबसाइट पर हर महीने रोजाना पांच हजार से भी कम लोग आ रहे थे वहीं यह आंकड़ा अक्टूबर 2011 में रोजाना 20 हजार से भी अधिक हो गया। अप्रैल 2012 में यह बढ़कर 42 हजार विजिटर प्रतिदिन तक आ गया है। गूगल टूल्स के मुताबिक हर महीने करीब तीन लाख लोग लगभग 8 लाख बार निर्मल बाबा की वेबसाइट पर आते हैं जिनसे उनकी वेबसाइट को 18 लाख पेजव्यू मिलते हैं। यह आंकड़ा देश की कई छोटी-मोटी समाचार वेबसाइटों से भी ज्यादा है। प्रत्येक विजिटर उनकी वेबसाइट पर करीब साढ़े 6 मिनट बिताता है।
फेसबुक पर भी खूब चर्चित हैं निर्मल बाबाः
फेसबुक पर निर्मल बाबा के दो पेज हैं। एक पेज 23 जुलाई 2011 को शुरू किया गया था। शुरू में तो यह लोकप्रिय नहीं था। लेकिन अब इस पेज से एक लाख 13 हजार से ज्यादा लोग जुड़े हैं। इस पेज पर सितंबर 2011 के बाद से कोई अपडेट नहीं किया गया है लेकिन फिर भी अप्रैल में इससे 11747 नए लोग जुड़े जबकि मार्च में 27773 लोग इस पेज से जुड़े। सितंबर के बाद सिर्फ 24 मार्च को इस पेज पर एक पोस्ट हुआ जिसमें लोगों को उनके नए पेज 'निर्मलबाबाजी' से जुड़ने की जानकारी दी गई। वहीं फिलहाल सक्रिय निर्मल बाबा का पेज 5 नवंबर 2010 को शुरु हुआ था जिससे अब तक कुल 3 लाख 53 हजार से भी अधिक लोग जुड़ चुके हैं। निर्मल बाबा के चमत्कारों को लेकर इस पेज पर गंभीर बहस हो रही है। इस पेज पर अंतिम पोस्ट 6 अप्रैल 2012 को किया गया था जिसमें भक्तों को पूर्णमासी कार्यक्रम के समाप्त किए जाने की जानकारी दी गई है।
लेकिन आप यह जानकर चौंक जाएंगे कि इस पोस्ट को जहां 17 हजार से ज्यादा लोगों ने लाइक किया वहीं 421 ने शेयर किया। अकेले इस पोस्ट पर ही लगभग 18 हजार टिप्पणियां की गई हैं जिनमें से अधिकतर में बाबा की आलोचना है और उनके तौर-तरीकों पर प्रश्न खड़े किए गए हैं। बाबा के कुछ भक्तों का यह भी कहना था कि बाबा अब काफी लोकप्रिय हो गए हैं। उन्हें अब अपने विज्ञापन बंद कर देने चाहिए। यहां पर कुछ लोग निर्मल बाबा का उपहास उड़ा कर उनसे अपने ऊपर भी कृपा करने के लिए कह रहे हैं। लेकिन सबसे ज्यादा लोग उनके कृपा के कारोबार पर प्रश्नचिन्ह उठा रहे हैं। इस पोस्ट पर टिप्पणियों में कुछ फेसबुक यूजर निर्मल बाबा को गालियां भी दे रहे हैं।
बाबा के फेसबुक पेज पर सिर्फ अंतिम पोस्ट पर आई टिप्पणियों का अध्ययन करने पर यह भी पता चला कि बाबा के समर्थन में ज्यादातर टिप्पणियां महिलाओं ने की थी। वहीं जिन पुरुषों ने बाबा के समर्थन में वहां पर अपनी बात रखी उनके प्रोफाइल फर्जी ज्यादा प्रतीत हो रहे थे। इन प्रोफाइलों में से ज्यादातर प्रोफाइल मार्च या अप्रैल में ही बनाए गए हैं। इससे ऐसा भी प्रतीत होता है कि बाबा ने टीवी के बाद फेसबुक के जरिए भी मोर्चा लेने की पूरी तैयारी की है।

बाबा के बारे में यह भी कहा जा रहा है कि वो जूनियर आर्टिस्टों को पैसा देकर अपने समागम में प्रश्न करवाते थे और अपने अनुसार बुलवाते थे लेकिन उनके फेसबुक पेज का अध्ययन करने के बाद यह और स्पष्ट हो गया है कि फर्जी प्रोफाइलों का सहारा लेकर उनका पक्ष रखा जा रहा है। माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर पर भी निर्मल बाबा की लोकप्रियता कोई कम नहीं है। उन्हें यहा पर भी 42 हजार से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं।
बाबा के बारे में बढ़ रही लोगों की रुचि (वीडियो) को सिर्फ सकारात्मक नहीं माना जा सकता क्योंकि उनके फेसबुक पेज पर पोस्ट की गई ज्यादातर टिप्पणियों में उनकी कृपा के तौर तरीकों पर ही प्रश्न उठाए गए हैं। वहीं यूट्यूब पर बाबा की तीसरी आंख के वीडियो दिखाने वाले चैनल पर भी टिप्पणी करना प्रतिबंधित हैं।
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चार अलग-अलग शहरों-लखनऊ, रायपुर, भोपाल और फतेहपुर में निर्मल बाबा के खिलाफ शिकायत दर्ज की जा चुकी है। संभव है, बाबा के खिलाफ आज लखनऊ में एफआईआर भी दर्ज हो जाए। इसके लिए दो बच्‍चों ने पुलिस में शिकायत दर्ज की है। वे आज एफआईआर दर्ज करने की मांग करने वाले हैं। यह मांग नहीं माने जाने पर वे कोर्ट की शरण में जाने वाले हैं।

टीवी के जरिए घर-घर पहुंच चुके इस बाबा के बारे में गूगल टूल्स के जरिए रिसर्च करने पर पता चला कि उनके बारे में लोगों की दिलचस्पी में पिछले तीन माह में जबरदस्त इजाफा हुआ है। तीन साल पहले तक वह लगभग गुमनाम थे। अगस्त 2009 में गूगल में सबसे पहले निर्मल बाबा को सर्च किया गया। साल 2010 के अंत तक भी उनमें लोगों की कोई खास रुचि नहीं थी और गिने चुने लोग ही इंटरनेट पर उनके बारे में जानकारी तलाशने की कोशिश करते थे। सितंबर 2011 से लोगों ने इंटरनेट पर निर्मल बाबा के बारे में जानने में दिलचस्पी दिखाई और तब से यह ग्राफ लगातार बढ़ता ही जा रहा है। निर्मल बाबा इंटरनेट जगत पर सबसे ज्यादा चर्चित साल 2012 में ही हुए।

2011 के अंत में निर्मल बाबा से जुड़ी जानकारियां खोजने में लोगों की रुचि इतनी बढ़ी कि सर्च ट्रेंड के मानकों को तोड़ते हुए यह ब्रेकआउट सूची में आ गए। गूगल के सर्च टूल्स से जुटाए आंकड़ों और जानकारी के मुताबिक साल 2011 में निर्मल बाबा के समागम, निर्मल दरबार, फेसबुक पेज, तस्वीरों, वॉलपेपर, वेबसाइट, फोटो और उनके यूट्यूब वीडियो को सबसे ज्यादा खोजा गया। तब तक सिर्फ भारत से ही निर्मल बाबा के बारे में लोग सर्च करते थे। यदि सर्च को सौ के स्केल पर नापें तो लगभग एक प्रतिशत यानि नजरअंदाज करने लायक लोग अमेरिका से भी निर्मल बाबा के बारे में जानकारी तलाशते थे। लेकिन पिछले तीन महीनों में निर्मल बाबा के बारे में लोगों की रुचि का पैमाना बदला है।

भारत में जहां उनमें लोगों की दिलचस्पी और भी ज्यादा बढ़ी है वहीं नेपाल, चीन और ब्रिटेन से भी उन्हें इंटरनेट पर खोजा जा रहा है। लेकिन यहां सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि मीडिया में उनके बारे में नकारात्मक खबरें आने और फेसबुक और ब्लॉग्स में उनके तरीकों पर हो रही खुली चर्चा के बाद अब 'निर्मल बाबा फ्रॉड' की वर्ड से गूगल पर खूब सर्च हो रहे हैं।

पिछले तीन महीनों में लोगों ने निर्मल बाबा के जीवन और उनकी सच्चाई के बारे में सर्च करने में ज्यादा रुचि दिखाई है (ग्राफ देखने के लिए क्लिक करें) । पिछले एक हफ्ते में लोगों की दिलचस्पी निर्मल बाबा के अतीत को जानने में भी जगी है। लोग अब उनकी बायोग्रॉफी और हिस्ट्री को भी गूगल में तलाश रहे हैं। यही नहीं निर्मल बाबा की वेबसाइट और उनसे मिलने के लिए अपाइंटमेंट फिक्स करने में भी लोगों की रुचि इसी रफ्तार से बढ़ रही है। हालांकि उन्‍होंने आजकल निजी तौर पर लोगों से मिलना बंद कर रखा है।

वेबसाइट भी है सुपरहिटः निर्मल बाबा की वेबसाइट भी पिछले 6 महीने में जबरदस्त लोकप्रिय हुई है। जून 2011 में जहां उनकी वेबसाइट पर हर महीने रोजाना पांच हजार से भी कम लोग आ रहे थे वहीं यह आंकड़ा अक्टूबर 2011 में रोजाना 20 हजार से भी अधिक हो गया। अप्रैल 2012 में यह बढ़कर 42 हजार विजिटर प्रतिदिन तक आ गया है। गूगल टूल्स के मुताबिक हर महीने करीब तीन लाख लोग लगभग 8 लाख बार निर्मल बाबा की वेबसाइट पर आते हैं जिनसे उनकी वेबसाइट को 18 लाख पेजव्यू मिलते हैं। यह आंकड़ा देश की कई छोटी-मोटी समाचार वेबसाइटों से भी ज्यादा है। प्रत्येक विजिटर उनकी वेबसाइट पर करीब साढ़े 6 मिनट बिताता है।

फेसबुक पर भी खूब चर्चित हैं निर्मल बाबाः
फेसबुक पर निर्मल बाबा के दो पेज हैं। एक पेज 23 जुलाई 2011 को शुरू किया गया था। शुरू में तो यह लोकप्रिय नहीं था। लेकिन अब इस पेज से एक लाख 13 हजार से ज्यादा लोग जुड़े हैं। इस पेज पर सितंबर 2011 के बाद से कोई अपडेट नहीं किया गया है लेकिन फिर भी अप्रैल में इससे 11747 नए लोग जुड़े जबकि मार्च में 27773 लोग इस पेज से जुड़े। सितंबर के बाद सिर्फ 24 मार्च को इस पेज पर एक पोस्ट हुआ जिसमें लोगों को उनके नए पेज 'निर्मलबाबाजी' से जुड़ने की जानकारी दी गई। वहीं फिलहाल सक्रिय निर्मल बाबा का पेज 5 नवंबर 2010 को शुरु हुआ था जिससे अब तक कुल 3 लाख 53 हजार से भी अधिक लोग जुड़ चुके हैं। निर्मल बाबा के चमत्कारों को लेकर इस पेज पर गंभीर बहस हो रही है। इस पेज पर अंतिम पोस्ट 6 अप्रैल 2012 को किया गया था जिसमें भक्तों को पूर्णमासी कार्यक्रम के समाप्त किए जाने की जानकारी दी गई है।

लेकिन आप यह जानकर चौंक जाएंगे कि इस पोस्ट को जहां 17 हजार से ज्यादा लोगों ने लाइक किया वहीं 421 ने शेयर किया। अकेले इस पोस्ट पर ही लगभग 18 हजार टिप्पणियां की गई हैं जिनमें से अधिकतर में बाबा की आलोचना है और उनके तौर-तरीकों पर प्रश्न खड़े किए गए हैं। बाबा के कुछ भक्तों का यह भी कहना था कि बाबा अब काफी लोकप्रिय हो गए हैं। उन्हें अब अपने विज्ञापन बंद कर देने चाहिए। यहां पर कुछ लोग निर्मल बाबा का उपहास उड़ा कर उनसे अपने ऊपर भी कृपा करने के लिए कह रहे हैं। लेकिन सबसे ज्यादा लोग उनके कृपा के कारोबार पर प्रश्नचिन्ह उठा रहे हैं। इस पोस्ट पर टिप्पणियों में कुछ फेसबुक यूजर निर्मल बाबा को गालियां भी दे रहे हैं।

बाबा के फेसबुक पेज पर सिर्फ अंतिम पोस्ट पर आई टिप्पणियों का अध्ययन करने पर यह भी पता चला कि बाबा के समर्थन में ज्यादातर टिप्पणियां महिलाओं ने की थी। वहीं जिन पुरुषों ने बाबा के समर्थन में वहां पर अपनी बात रखी उनके प्रोफाइल फर्जी ज्यादा प्रतीत हो रहे थे। इन प्रोफाइलों में से ज्यादातर प्रोफाइल मार्च या अप्रैल में ही बनाए गए हैं। इससे ऐसा भी प्रतीत होता है कि बाबा ने टीवी के बाद फेसबुक के जरिए भी मोर्चा लेने की पूरी तैयारी की है।

बाबा के बारे में यह भी कहा जा रहा है कि वो जूनियर आर्टिस्टों को पैसा देकर अपने समागम में प्रश्न करवाते थे और अपने अनुसार बुलवाते थे लेकिन उनके फेसबुक पेज का अध्ययन करने के बाद यह और स्पष्ट हो गया है कि फर्जी प्रोफाइलों का सहारा लेकर उनका पक्ष रखा जा रहा है। माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर पर भी निर्मल बाबा की लोकप्रियता कोई कम नहीं है। उन्हें यहा पर भी 42 हजार से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं।

बाबा के बारे में बढ़ रही लोगों की रुचि (वीडियो) को सिर्फ सकारात्मक नहीं माना जा सकता क्योंकि उनके फेसबुक पेज पर पोस्ट की गई ज्यादातर टिप्पणियों में उनकी कृपा के तौर तरीकों पर ही प्रश्न उठाए गए हैं। वहीं यूट्यूब पर बाबा की तीसरी आंख के वीडियो दिखाने वाले चैनल पर भी टिप्पणी करना प्रतिबंधित हैं।
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टीवी के जरिए घर-घर पहुंच चुके इस बाबा के बारे में गूगल टूल्स के जरिए रिसर्च करने पर पता चला कि उनके बारे में लोगों की दिलचस्पी में पिछले तीन माह में जबरदस्त इजाफा हुआ है। तीन साल पहले तक वह लगभग गुमनाम थे। अगस्त 2009 में गूगल में सबसे पहले निर्मल बाबा को सर्च किया गया। साल 2010 के अंत तक भी उनमें लोगों की कोई खास रुचि नहीं थी और गिने चुने लोग ही इंटरनेट पर उनके बारे में जानकारी तलाशने की कोशिश करते थे। सितंबर 2011 से लोगों ने इंटरनेट पर निर्मल बाबा के बारे में जानने में दिलचस्पी दिखाई और तब से यह ग्राफ लगातार बढ़ता ही जा रहा है। निर्मल बाबा इंटरनेट जगत पर सबसे ज्यादा चर्चित साल 2012 में ही हुए।
2011 के अंत में निर्मल बाबा से जुड़ी जानकारियां खोजने में लोगों की रुचि इतनी बढ़ी कि सर्च ट्रेंड के मानकों को तोड़ते हुए यह ब्रेकआउट सूची में आ गए। गूगल के सर्च टूल्स से जुटाए आंकड़ों और जानकारी के मुताबिक साल 2011 में निर्मल बाबा के समागम, निर्मल दरबार, फेसबुक पेज, तस्वीरों, वॉलपेपर, वेबसाइट, फोटो और उनके यूट्यूब वीडियो को सबसे ज्यादा खोजा गया। तब तक सिर्फ भारत से ही निर्मल बाबा के बारे में लोग सर्च करते थे। यदि सर्च को सौ के स्केल पर नापें तो लगभग एक प्रतिशत यानि नजरअंदाज करने लायक लोग अमेरिका से भी निर्मल बाबा के बारे में जानकारी तलाशते थे। लेकिन पिछले तीन महीनों में निर्मल बाबा के बारे में लोगों की रुचि का पैमाना बदला है।

भारत में जहां उनमें लोगों की दिलचस्पी और भी ज्यादा बढ़ी है वहीं नेपाल, चीन और ब्रिटेन से भी उन्हें इंटरनेट पर खोजा जा रहा है। लेकिन यहां सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि मीडिया में उनके बारे में नकारात्मक खबरें आने और फेसबुक और ब्लॉग्स में उनके तरीकों पर हो रही खुली चर्चा के बाद अब 'निर्मल बाबा फ्रॉड' की वर्ड से गूगल पर खूब सर्च हो रहे हैं।

पिछले तीन महीनों में लोगों ने निर्मल बाबा के जीवन और उनकी सच्चाई के बारे में सर्च करने में ज्यादा रुचि दिखाई है (ग्राफ देखने के लिए क्लिक करें) । पिछले एक हफ्ते में लोगों की दिलचस्पी निर्मल बाबा के अतीत को जानने में भी जगी है। लोग अब उनकी बायोग्रॉफी और हिस्ट्री को भी गूगल में तलाश रहे हैं। यही नहीं निर्मल बाबा की वेबसाइट और उनसे मिलने के लिए अपाइंटमेंट फिक्स करने में भी लोगों की रुचि इसी रफ्तार से बढ़ रही है। हालांकि उन्‍होंने आजकल निजी तौर पर लोगों से मिलना बंद कर रखा है।

वेबसाइट भी है सुपरहिटः निर्मल बाबा की वेबसाइट भी पिछले 6 महीने में जबरदस्त लोकप्रिय हुई है। जून 2011 में जहां उनकी वेबसाइट पर हर महीने रोजाना पांच हजार से भी कम लोग आ रहे थे वहीं यह आंकड़ा अक्टूबर 2011 में रोजाना 20 हजार से भी अधिक हो गया। अप्रैल 2012 में यह बढ़कर 42 हजार विजिटर प्रतिदिन तक आ गया है। गूगल टूल्स के मुताबिक हर महीने करीब तीन लाख लोग लगभग 8 लाख बार निर्मल बाबा की वेबसाइट पर आते हैं जिनसे उनकी वेबसाइट को 18 लाख पेजव्यू मिलते हैं। यह आंकड़ा देश की कई छोटी-मोटी समाचार वेबसाइटों से भी ज्यादा है। प्रत्येक विजिटर उनकी वेबसाइट पर करीब साढ़े 6 मिनट बिताता है।

फेसबुक पर भी खूब चर्चित हैं निर्मल बाबाः
फेसबुक पर निर्मल बाबा के दो पेज हैं। एक पेज 23 जुलाई 2011 को शुरू किया गया था। शुरू में तो यह लोकप्रिय नहीं था। लेकिन अब इस पेज से एक लाख 13 हजार से ज्यादा लोग जुड़े हैं। इस पेज पर सितंबर 2011 के बाद से कोई अपडेट नहीं किया गया है लेकिन फिर भी अप्रैल में इससे 11747 नए लोग जुड़े जबकि मार्च में 27773 लोग इस पेज से जुड़े। सितंबर के बाद सिर्फ 24 मार्च को इस पेज पर एक पोस्ट हुआ जिसमें लोगों को उनके नए पेज 'निर्मलबाबाजी' से जुड़ने की जानकारी दी गई। वहीं फिलहाल सक्रिय निर्मल बाबा का पेज 5 नवंबर 2010 को शुरु हुआ था जिससे अब तक कुल 3 लाख 53 हजार से भी अधिक लोग जुड़ चुके हैं। निर्मल बाबा के चमत्कारों को लेकर इस पेज पर गंभीर बहस हो रही है। इस पेज पर अंतिम पोस्ट 6 अप्रैल 2012 को किया गया था जिसमें भक्तों को पूर्णमासी कार्यक्रम के समाप्त किए जाने की जानकारी दी गई है।

लेकिन आप यह जानकर चौंक जाएंगे कि इस पोस्ट को जहां 17 हजार से ज्यादा लोगों ने लाइक किया वहीं 421 ने शेयर किया। अकेले इस पोस्ट पर ही लगभग 18 हजार टिप्पणियां की गई हैं जिनमें से अधिकतर में बाबा की आलोचना है और उनके तौर-तरीकों पर प्रश्न खड़े किए गए हैं। बाबा के कुछ भक्तों का यह भी कहना था कि बाबा अब काफी लोकप्रिय हो गए हैं। उन्हें अब अपने विज्ञापन बंद कर देने चाहिए। यहां पर कुछ लोग निर्मल बाबा का उपहास उड़ा कर उनसे अपने ऊपर भी कृपा करने के लिए कह रहे हैं। लेकिन सबसे ज्यादा लोग उनके कृपा के कारोबार पर प्रश्नचिन्ह उठा रहे हैं। इस पोस्ट पर टिप्पणियों में कुछ फेसबुक यूजर निर्मल बाबा को गालियां भी दे रहे हैं।

बाबा के फेसबुक पेज पर सिर्फ अंतिम पोस्ट पर आई टिप्पणियों का अध्ययन करने पर यह भी पता चला कि बाबा के समर्थन में ज्यादातर टिप्पणियां महिलाओं ने की थी। वहीं जिन पुरुषों ने बाबा के समर्थन में वहां पर अपनी बात रखी उनके प्रोफाइल फर्जी ज्यादा प्रतीत हो रहे थे। इन प्रोफाइलों में से ज्यादातर प्रोफाइल मार्च या अप्रैल में ही बनाए गए हैं। इससे ऐसा भी प्रतीत होता है कि बाबा ने टीवी के बाद फेसबुक के जरिए भी मोर्चा लेने की पूरी तैयारी की है।

बाबा के बारे में यह भी कहा जा रहा है कि वो जूनियर आर्टिस्टों को पैसा देकर अपने समागम में प्रश्न करवाते थे और अपने अनुसार बुलवाते थे लेकिन उनके फेसबुक पेज का अध्ययन करने के बाद यह और स्पष्ट हो गया है कि फर्जी प्रोफाइलों का सहारा लेकर उनका पक्ष रखा जा रहा है। माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर पर भी निर्मल बाबा की लोकप्रियता कोई कम नहीं है। उन्हें यहा पर भी 42 हजार से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं।

बाबा के बारे में बढ़ रही लोगों की रुचि (वीडियो) को सिर्फ सकारात्मक नहीं माना जा सकता क्योंकि उनके फेसबुक पेज पर पोस्ट की गई ज्यादातर टिप्पणियों में उनकी कृपा के तौर तरीकों पर ही प्रश्न उठाए गए हैं। वहीं यूट्यूब पर बाबा की तीसरी आंख के वीडियो दिखाने वाले चैनल पर भी टिप्पणी करना प्रतिबंधित हैं।
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2011 के अंत में निर्मल बाबा से जुड़ी जानकारियां खोजने में लोगों की रुचि इतनी बढ़ी कि सर्च ट्रेंड के मानकों को तोड़ते हुए यह ब्रेकआउट सूची में आ गए। गूगल के सर्च टूल्स से जुटाए आंकड़ों और जानकारी के मुताबिक साल 2011 में निर्मल बाबा के समागम, निर्मल दरबार, फेसबुक पेज, तस्वीरों, वॉलपेपर, वेबसाइट, फोटो और उनके यूट्यूब वीडियो को सबसे ज्यादा खोजा गया। तब तक सिर्फ भारत से ही निर्मल बाबा के बारे में लोग सर्च करते थे। यदि सर्च को सौ के स्केल पर नापें तो लगभग एक प्रतिशत यानि नजरअंदाज करने लायक लोग अमेरिका से भी निर्मल बाबा के बारे में जानकारी तलाशते थे। लेकिन पिछले तीन महीनों में निर्मल बाबा के बारे में लोगों की रुचि का पैमाना बदला है।
भारत में जहां उनमें लोगों की दिलचस्पी और भी ज्यादा बढ़ी है वहीं नेपाल, चीन और ब्रिटेन से भी उन्हें इंटरनेट पर खोजा जा रहा है। लेकिन यहां सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि मीडिया में उनके बारे में नकारात्मक खबरें आने और फेसबुक और ब्लॉग्स में उनके तरीकों पर हो रही खुली चर्चा के बाद अब 'निर्मल बाबा फ्रॉड' की वर्ड से गूगल पर खूब सर्च हो रहे हैं।

पिछले तीन महीनों में लोगों ने निर्मल बाबा के जीवन और उनकी सच्चाई के बारे में सर्च करने में ज्यादा रुचि दिखाई है (ग्राफ देखने के लिए क्लिक करें) । पिछले एक हफ्ते में लोगों की दिलचस्पी निर्मल बाबा के अतीत को जानने में भी जगी है। लोग अब उनकी बायोग्रॉफी और हिस्ट्री को भी गूगल में तलाश रहे हैं। यही नहीं निर्मल बाबा की वेबसाइट और उनसे मिलने के लिए अपाइंटमेंट फिक्स करने में भी लोगों की रुचि इसी रफ्तार से बढ़ रही है। हालांकि उन्‍होंने आजकल निजी तौर पर लोगों से मिलना बंद कर रखा है।

वेबसाइट भी है सुपरहिटः निर्मल बाबा की वेबसाइट भी पिछले 6 महीने में जबरदस्त लोकप्रिय हुई है। जून 2011 में जहां उनकी वेबसाइट पर हर महीने रोजाना पांच हजार से भी कम लोग आ रहे थे वहीं यह आंकड़ा अक्टूबर 2011 में रोजाना 20 हजार से भी अधिक हो गया। अप्रैल 2012 में यह बढ़कर 42 हजार विजिटर प्रतिदिन तक आ गया है। गूगल टूल्स के मुताबिक हर महीने करीब तीन लाख लोग लगभग 8 लाख बार निर्मल बाबा की वेबसाइट पर आते हैं जिनसे उनकी वेबसाइट को 18 लाख पेजव्यू मिलते हैं। यह आंकड़ा देश की कई छोटी-मोटी समाचार वेबसाइटों से भी ज्यादा है। प्रत्येक विजिटर उनकी वेबसाइट पर करीब साढ़े 6 मिनट बिताता है।

फेसबुक पर भी खूब चर्चित हैं निर्मल बाबाः
फेसबुक पर निर्मल बाबा के दो पेज हैं। एक पेज 23 जुलाई 2011 को शुरू किया गया था। शुरू में तो यह लोकप्रिय नहीं था। लेकिन अब इस पेज से एक लाख 13 हजार से ज्यादा लोग जुड़े हैं। इस पेज पर सितंबर 2011 के बाद से कोई अपडेट नहीं किया गया है लेकिन फिर भी अप्रैल में इससे 11747 नए लोग जुड़े जबकि मार्च में 27773 लोग इस पेज से जुड़े। सितंबर के बाद सिर्फ 24 मार्च को इस पेज पर एक पोस्ट हुआ जिसमें लोगों को उनके नए पेज 'निर्मलबाबाजी' से जुड़ने की जानकारी दी गई। वहीं फिलहाल सक्रिय निर्मल बाबा का पेज 5 नवंबर 2010 को शुरु हुआ था जिससे अब तक कुल 3 लाख 53 हजार से भी अधिक लोग जुड़ चुके हैं। निर्मल बाबा के चमत्कारों को लेकर इस पेज पर गंभीर बहस हो रही है। इस पेज पर अंतिम पोस्ट 6 अप्रैल 2012 को किया गया था जिसमें भक्तों को पूर्णमासी कार्यक्रम के समाप्त किए जाने की जानकारी दी गई है।

लेकिन आप यह जानकर चौंक जाएंगे कि इस पोस्ट को जहां 17 हजार से ज्यादा लोगों ने लाइक किया वहीं 421 ने शेयर किया। अकेले इस पोस्ट पर ही लगभग 18 हजार टिप्पणियां की गई हैं जिनमें से अधिकतर में बाबा की आलोचना है और उनके तौर-तरीकों पर प्रश्न खड़े किए गए हैं। बाबा के कुछ भक्तों का यह भी कहना था कि बाबा अब काफी लोकप्रिय हो गए हैं। उन्हें अब अपने विज्ञापन बंद कर देने चाहिए। यहां पर कुछ लोग निर्मल बाबा का उपहास उड़ा कर उनसे अपने ऊपर भी कृपा करने के लिए कह रहे हैं। लेकिन सबसे ज्यादा लोग उनके कृपा के कारोबार पर प्रश्नचिन्ह उठा रहे हैं। इस पोस्ट पर टिप्पणियों में कुछ फेसबुक यूजर निर्मल बाबा को गालियां भी दे रहे हैं।

बाबा के फेसबुक पेज पर सिर्फ अंतिम पोस्ट पर आई टिप्पणियों का अध्ययन करने पर यह भी पता चला कि बाबा के समर्थन में ज्यादातर टिप्पणियां महिलाओं ने की थी। वहीं जिन पुरुषों ने बाबा के समर्थन में वहां पर अपनी बात रखी उनके प्रोफाइल फर्जी ज्यादा प्रतीत हो रहे थे। इन प्रोफाइलों में से ज्यादातर प्रोफाइल मार्च या अप्रैल में ही बनाए गए हैं। इससे ऐसा भी प्रतीत होता है कि बाबा ने टीवी के बाद फेसबुक के जरिए भी मोर्चा लेने की पूरी तैयारी की है।

बाबा के बारे में यह भी कहा जा रहा है कि वो जूनियर आर्टिस्टों को पैसा देकर अपने समागम में प्रश्न करवाते थे और अपने अनुसार बुलवाते थे लेकिन उनके फेसबुक पेज का अध्ययन करने के बाद यह और स्पष्ट हो गया है कि फर्जी प्रोफाइलों का सहारा लेकर उनका पक्ष रखा जा रहा है। माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर पर भी निर्मल बाबा की लोकप्रियता कोई कम नहीं है। उन्हें यहा पर भी 42 हजार से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं।

बाबा के बारे में बढ़ रही लोगों की रुचि (वीडियो) को सिर्फ सकारात्मक नहीं माना जा सकता क्योंकि उनके फेसबुक पेज पर पोस्ट की गई ज्यादातर टिप्पणियों में उनकी कृपा के तौर तरीकों पर ही प्रश्न उठाए गए हैं। वहीं यूट्यूब पर बाबा की तीसरी आंख के वीडियो दिखाने वाले चैनल पर भी टिप्पणी करना प्रतिबंधित हैं।
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भारत में जहां उनमें लोगों की दिलचस्पी और भी ज्यादा बढ़ी है वहीं नेपाल, चीन और ब्रिटेन से भी उन्हें इंटरनेट पर खोजा जा रहा है। लेकिन यहां सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि मीडिया में उनके बारे में नकारात्मक खबरें आने और फेसबुक और ब्लॉग्स में उनके तरीकों पर हो रही खुली चर्चा के बाद अब 'निर्मल बाबा फ्रॉड' की वर्ड से गूगल पर खूब सर्च हो रहे हैं।

पिछले तीन महीनों में लोगों ने निर्मल बाबा के जीवन और उनकी सच्चाई के बारे में सर्च करने में ज्यादा रुचि दिखाई है (ग्राफ देखने के लिए क्लिक करें) । पिछले एक हफ्ते में लोगों की दिलचस्पी निर्मल बाबा के अतीत को जानने में भी जगी है। लोग अब उनकी बायोग्रॉफी और हिस्ट्री को भी गूगल में तलाश रहे हैं। यही नहीं निर्मल बाबा की वेबसाइट और उनसे मिलने के लिए अपाइंटमेंट फिक्स करने में भी लोगों की रुचि इसी रफ्तार से बढ़ रही है। हालांकि उन्‍होंने आजकल निजी तौर पर लोगों से मिलना बंद कर रखा है।

वेबसाइट भी है सुपरहिटः निर्मल बाबा की वेबसाइट भी पिछले 6 महीने में जबरदस्त लोकप्रिय हुई है। जून 2011 में जहां उनकी वेबसाइट पर हर महीने रोजाना पांच हजार से भी कम लोग आ रहे थे वहीं यह आंकड़ा अक्टूबर 2011 में रोजाना 20 हजार से भी अधिक हो गया। अप्रैल 2012 में यह बढ़कर 42 हजार विजिटर प्रतिदिन तक आ गया है। गूगल टूल्स के मुताबिक हर महीने करीब तीन लाख लोग लगभग 8 लाख बार निर्मल बाबा की वेबसाइट पर आते हैं जिनसे उनकी वेबसाइट को 18 लाख पेजव्यू मिलते हैं। यह आंकड़ा देश की कई छोटी-मोटी समाचार वेबसाइटों से भी ज्यादा है। प्रत्येक विजिटर उनकी वेबसाइट पर करीब साढ़े 6 मिनट बिताता है।

फेसबुक पर भी खूब चर्चित हैं निर्मल बाबाः
फेसबुक पर निर्मल बाबा के दो पेज हैं। एक पेज 23 जुलाई 2011 को शुरू किया गया था। शुरू में तो यह लोकप्रिय नहीं था। लेकिन अब इस पेज से एक लाख 13 हजार से ज्यादा लोग जुड़े हैं। इस पेज पर सितंबर 2011 के बाद से कोई अपडेट नहीं किया गया है लेकिन फिर भी अप्रैल में इससे 11747 नए लोग जुड़े जबकि मार्च में 27773 लोग इस पेज से जुड़े। सितंबर के बाद सिर्फ 24 मार्च को इस पेज पर एक पोस्ट हुआ जिसमें लोगों को उनके नए पेज 'निर्मलबाबाजी' से जुड़ने की जानकारी दी गई। वहीं फिलहाल सक्रिय निर्मल बाबा का पेज 5 नवंबर 2010 को शुरु हुआ था जिससे अब तक कुल 3 लाख 53 हजार से भी अधिक लोग जुड़ चुके हैं। निर्मल बाबा के चमत्कारों को लेकर इस पेज पर गंभीर बहस हो रही है। इस पेज पर अंतिम पोस्ट 6 अप्रैल 2012 को किया गया था जिसमें भक्तों को पूर्णमासी कार्यक्रम के समाप्त किए जाने की जानकारी दी गई है।

लेकिन आप यह जानकर चौंक जाएंगे कि इस पोस्ट को जहां 17 हजार से ज्यादा लोगों ने लाइक किया वहीं 421 ने शेयर किया। अकेले इस पोस्ट पर ही लगभग 18 हजार टिप्पणियां की गई हैं जिनमें से अधिकतर में बाबा की आलोचना है और उनके तौर-तरीकों पर प्रश्न खड़े किए गए हैं। बाबा के कुछ भक्तों का यह भी कहना था कि बाबा अब काफी लोकप्रिय हो गए हैं। उन्हें अब अपने विज्ञापन बंद कर देने चाहिए। यहां पर कुछ लोग निर्मल बाबा का उपहास उड़ा कर उनसे अपने ऊपर भी कृपा करने के लिए कह रहे हैं। लेकिन सबसे ज्यादा लोग उनके कृपा के कारोबार पर प्रश्नचिन्ह उठा रहे हैं। इस पोस्ट पर टिप्पणियों में कुछ फेसबुक यूजर निर्मल बाबा को गालियां भी दे रहे हैं।

बाबा के फेसबुक पेज पर सिर्फ अंतिम पोस्ट पर आई टिप्पणियों का अध्ययन करने पर यह भी पता चला कि बाबा के समर्थन में ज्यादातर टिप्पणियां महिलाओं ने की थी। वहीं जिन पुरुषों ने बाबा के समर्थन में वहां पर अपनी बात रखी उनके प्रोफाइल फर्जी ज्यादा प्रतीत हो रहे थे। इन प्रोफाइलों में से ज्यादातर प्रोफाइल मार्च या अप्रैल में ही बनाए गए हैं। इससे ऐसा भी प्रतीत होता है कि बाबा ने टीवी के बाद फेसबुक के जरिए भी मोर्चा लेने की पूरी तैयारी की है।

बाबा के बारे में यह भी कहा जा रहा है कि वो जूनियर आर्टिस्टों को पैसा देकर अपने समागम में प्रश्न करवाते थे और अपने अनुसार बुलवाते थे लेकिन उनके फेसबुक पेज का अध्ययन करने के बाद यह और स्पष्ट हो गया है कि फर्जी प्रोफाइलों का सहारा लेकर उनका पक्ष रखा जा रहा है। माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर पर भी निर्मल बाबा की लोकप्रियता कोई कम नहीं है। उन्हें यहा पर भी 42 हजार से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं।

बाबा के बारे में बढ़ रही लोगों की रुचि (वीडियो) को सिर्फ सकारात्मक नहीं माना जा सकता क्योंकि उनके फेसबुक पेज पर पोस्ट की गई ज्यादातर टिप्पणियों में उनकी कृपा के तौर तरीकों पर ही प्रश्न उठाए गए हैं। वहीं यूट्यूब पर बाबा की तीसरी आंख के वीडियो दिखाने वाले चैनल पर भी टिप्पणी करना प्रतिबंधित हैं।
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पिछले तीन महीनों में लोगों ने निर्मल बाबा के जीवन और उनकी सच्चाई के बारे में सर्च करने में ज्यादा रुचि दिखाई है (ग्राफ देखने के लिए क्लिक करें) । पिछले एक हफ्ते में लोगों की दिलचस्पी निर्मल बाबा के अतीत को जानने में भी जगी है। लोग अब उनकी बायोग्रॉफी और हिस्ट्री को भी गूगल में तलाश रहे हैं। यही नहीं निर्मल बाबा की वेबसाइट और उनसे मिलने के लिए अपाइंटमेंट फिक्स करने में भी लोगों की रुचि इसी रफ्तार से बढ़ रही है। हालांकि उन्‍होंने आजकल निजी तौर पर लोगों से मिलना बंद कर रखा है।

वेबसाइट भी है सुपरहिटः निर्मल बाबा की वेबसाइट भी पिछले 6 महीने में जबरदस्त लोकप्रिय हुई है। जून 2011 में जहां उनकी वेबसाइट पर हर महीने रोजाना पांच हजार से भी कम लोग आ रहे थे वहीं यह आंकड़ा अक्टूबर 2011 में रोजाना 20 हजार से भी अधिक हो गया। अप्रैल 2012 में यह बढ़कर 42 हजार विजिटर प्रतिदिन तक आ गया है। गूगल टूल्स के मुताबिक हर महीने करीब तीन लाख लोग लगभग 8 लाख बार निर्मल बाबा की वेबसाइट पर आते हैं जिनसे उनकी वेबसाइट को 18 लाख पेजव्यू मिलते हैं। यह आंकड़ा देश की कई छोटी-मोटी समाचार वेबसाइटों से भी ज्यादा है। प्रत्येक विजिटर उनकी वेबसाइट पर करीब साढ़े 6 मिनट बिताता है।

फेसबुक पर भी खूब चर्चित हैं निर्मल बाबाः
फेसबुक पर निर्मल बाबा के दो पेज हैं। एक पेज 23 जुलाई 2011 को शुरू किया गया था। शुरू में तो यह लोकप्रिय नहीं था। लेकिन अब इस पेज से एक लाख 13 हजार से ज्यादा लोग जुड़े हैं। इस पेज पर सितंबर 2011 के बाद से कोई अपडेट नहीं किया गया है लेकिन फिर भी अप्रैल में इससे 11747 नए लोग जुड़े जबकि मार्च में 27773 लोग इस पेज से जुड़े। सितंबर के बाद सिर्फ 24 मार्च को इस पेज पर एक पोस्ट हुआ जिसमें लोगों को उनके नए पेज 'निर्मलबाबाजी' से जुड़ने की जानकारी दी गई। वहीं फिलहाल सक्रिय निर्मल बाबा का पेज 5 नवंबर 2010 को शुरु हुआ था जिससे अब तक कुल 3 लाख 53 हजार से भी अधिक लोग जुड़ चुके हैं। निर्मल बाबा के चमत्कारों को लेकर इस पेज पर गंभीर बहस हो रही है। इस पेज पर अंतिम पोस्ट 6 अप्रैल 2012 को किया गया था जिसमें भक्तों को पूर्णमासी कार्यक्रम के समाप्त किए जाने की जानकारी दी गई है।

लेकिन आप यह जानकर चौंक जाएंगे कि इस पोस्ट को जहां 17 हजार से ज्यादा लोगों ने लाइक किया वहीं 421 ने शेयर किया। अकेले इस पोस्ट पर ही लगभग 18 हजार टिप्पणियां की गई हैं जिनमें से अधिकतर में बाबा की आलोचना है और उनके तौर-तरीकों पर प्रश्न खड़े किए गए हैं। बाबा के कुछ भक्तों का यह भी कहना था कि बाबा अब काफी लोकप्रिय हो गए हैं। उन्हें अब अपने विज्ञापन बंद कर देने चाहिए। यहां पर कुछ लोग निर्मल बाबा का उपहास उड़ा कर उनसे अपने ऊपर भी कृपा करने के लिए कह रहे हैं। लेकिन सबसे ज्यादा लोग उनके कृपा के कारोबार पर प्रश्नचिन्ह उठा रहे हैं। इस पोस्ट पर टिप्पणियों में कुछ फेसबुक यूजर निर्मल बाबा को गालियां भी दे रहे हैं।

बाबा के फेसबुक पेज पर सिर्फ अंतिम पोस्ट पर आई टिप्पणियों का अध्ययन करने पर यह भी पता चला कि बाबा के समर्थन में ज्यादातर टिप्पणियां महिलाओं ने की थी। वहीं जिन पुरुषों ने बाबा के समर्थन में वहां पर अपनी बात रखी उनके प्रोफाइल फर्जी ज्यादा प्रतीत हो रहे थे। इन प्रोफाइलों में से ज्यादातर प्रोफाइल मार्च या अप्रैल में ही बनाए गए हैं। इससे ऐसा भी प्रतीत होता है कि बाबा ने टीवी के बाद फेसबुक के जरिए भी मोर्चा लेने की पूरी तैयारी की है।

बाबा के बारे में यह भी कहा जा रहा है कि वो जूनियर आर्टिस्टों को पैसा देकर अपने समागम में प्रश्न करवाते थे और अपने अनुसार बुलवाते थे लेकिन उनके फेसबुक पेज का अध्ययन करने के बाद यह और स्पष्ट हो गया है कि फर्जी प्रोफाइलों का सहारा लेकर उनका पक्ष रखा जा रहा है। माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर पर भी निर्मल बाबा की लोकप्रियता कोई कम नहीं है। उन्हें यहा पर भी 42 हजार से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं।

बाबा के बारे में बढ़ रही लोगों की रुचि (वीडियो) को सिर्फ सकारात्मक नहीं माना जा सकता क्योंकि उनके फेसबुक पेज पर पोस्ट की गई ज्यादातर टिप्पणियों में उनकी कृपा के तौर तरीकों पर ही प्रश्न उठाए गए हैं। वहीं यूट्यूब पर बाबा की तीसरी आंख के वीडियो दिखाने वाले चैनल पर भी टिप्पणी करना प्रतिबंधित हैं।
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वेबसाइट भी है सुपरहिटः निर्मल बाबा की वेबसाइट भी पिछले 6 महीने में जबरदस्त लोकप्रिय हुई है। जून 2011 में जहां उनकी वेबसाइट पर हर महीने रोजाना पांच हजार से भी कम लोग आ रहे थे वहीं यह आंकड़ा अक्टूबर 2011 में रोजाना 20 हजार से भी अधिक हो गया। अप्रैल 2012 में यह बढ़कर 42 हजार विजिटर प्रतिदिन तक आ गया है। गूगल टूल्स के मुताबिक हर महीने करीब तीन लाख लोग लगभग 8 लाख बार निर्मल बाबा की वेबसाइट पर आते हैं जिनसे उनकी वेबसाइट को 18 लाख पेजव्यू मिलते हैं। यह आंकड़ा देश की कई छोटी-मोटी समाचार वेबसाइटों से भी ज्यादा है। प्रत्येक विजिटर उनकी वेबसाइट पर करीब साढ़े 6 मिनट बिताता है।
फेसबुक पर भी खूब चर्चित हैं निर्मल बाबाः
फेसबुक पर निर्मल बाबा के दो पेज हैं। एक पेज 23 जुलाई 2011 को शुरू किया गया था। शुरू में तो यह लोकप्रिय नहीं था। लेकिन अब इस पेज से एक लाख 13 हजार से ज्यादा लोग जुड़े हैं। इस पेज पर सितंबर 2011 के बाद से कोई अपडेट नहीं किया गया है लेकिन फिर भी अप्रैल में इससे 11747 नए लोग जुड़े जबकि मार्च में 27773 लोग इस पेज से जुड़े। सितंबर के बाद सिर्फ 24 मार्च को इस पेज पर एक पोस्ट हुआ जिसमें लोगों को उनके नए पेज 'निर्मलबाबाजी' से जुड़ने की जानकारी दी गई। वहीं फिलहाल सक्रिय निर्मल बाबा का पेज 5 नवंबर 2010 को शुरु हुआ था जिससे अब तक कुल 3 लाख 53 हजार से भी अधिक लोग जुड़ चुके हैं। निर्मल बाबा के चमत्कारों को लेकर इस पेज पर गंभीर बहस हो रही है। इस पेज पर अंतिम पोस्ट 6 अप्रैल 2012 को किया गया था जिसमें भक्तों को पूर्णमासी कार्यक्रम के समाप्त किए जाने की जानकारी दी गई है।

लेकिन आप यह जानकर चौंक जाएंगे कि इस पोस्ट को जहां 17 हजार से ज्यादा लोगों ने लाइक किया वहीं 421 ने शेयर किया। अकेले इस पोस्ट पर ही लगभग 18 हजार टिप्पणियां की गई हैं जिनमें से अधिकतर में बाबा की आलोचना है और उनके तौर-तरीकों पर प्रश्न खड़े किए गए हैं। बाबा के कुछ भक्तों का यह भी कहना था कि बाबा अब काफी लोकप्रिय हो गए हैं। उन्हें अब अपने विज्ञापन बंद कर देने चाहिए। यहां पर कुछ लोग निर्मल बाबा का उपहास उड़ा कर उनसे अपने ऊपर भी कृपा करने के लिए कह रहे हैं। लेकिन सबसे ज्यादा लोग उनके कृपा के कारोबार पर प्रश्नचिन्ह उठा रहे हैं। इस पोस्ट पर टिप्पणियों में कुछ फेसबुक यूजर निर्मल बाबा को गालियां भी दे रहे हैं।

बाबा के फेसबुक पेज पर सिर्फ अंतिम पोस्ट पर आई टिप्पणियों का अध्ययन करने पर यह भी पता चला कि बाबा के समर्थन में ज्यादातर टिप्पणियां महिलाओं ने की थी। वहीं जिन पुरुषों ने बाबा के समर्थन में वहां पर अपनी बात रखी उनके प्रोफाइल फर्जी ज्यादा प्रतीत हो रहे थे। इन प्रोफाइलों में से ज्यादातर प्रोफाइल मार्च या अप्रैल में ही बनाए गए हैं। इससे ऐसा भी प्रतीत होता है कि बाबा ने टीवी के बाद फेसबुक के जरिए भी मोर्चा लेने की पूरी तैयारी की है।

बाबा के बारे में यह भी कहा जा रहा है कि वो जूनियर आर्टिस्टों को पैसा देकर अपने समागम में प्रश्न करवाते थे और अपने अनुसार बुलवाते थे लेकिन उनके फेसबुक पेज का अध्ययन करने के बाद यह और स्पष्ट हो गया है कि फर्जी प्रोफाइलों का सहारा लेकर उनका पक्ष रखा जा रहा है। माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर पर भी निर्मल बाबा की लोकप्रियता कोई कम नहीं है। उन्हें यहा पर भी 42 हजार से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं।

बाबा के बारे में बढ़ रही लोगों की रुचि (वीडियो) को सिर्फ सकारात्मक नहीं माना जा सकता क्योंकि उनके फेसबुक पेज पर पोस्ट की गई ज्यादातर टिप्पणियों में उनकी कृपा के तौर तरीकों पर ही प्रश्न उठाए गए हैं। वहीं यूट्यूब पर बाबा की तीसरी आंख के वीडियो दिखाने वाले चैनल पर भी टिप्पणी करना प्रतिबंधित हैं।
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फेसबुक पर निर्मल बाबा के दो पेज हैं। एक पेज 23 जुलाई 2011 को शुरू किया गया था। शुरू में तो यह लोकप्रिय नहीं था। लेकिन अब इस पेज से एक लाख 13 हजार से ज्यादा लोग जुड़े हैं। इस पेज पर सितंबर 2011 के बाद से कोई अपडेट नहीं किया गया है लेकिन फिर भी अप्रैल में इससे 11747 नए लोग जुड़े जबकि मार्च में 27773 लोग इस पेज से जुड़े। सितंबर के बाद सिर्फ 24 मार्च को इस पेज पर एक पोस्ट हुआ जिसमें लोगों को उनके नए पेज 'निर्मलबाबाजी' से जुड़ने की जानकारी दी गई। वहीं फिलहाल सक्रिय निर्मल बाबा का पेज 5 नवंबर 2010 को शुरु हुआ था जिससे अब तक कुल 3 लाख 53 हजार से भी अधिक लोग जुड़ चुके हैं। निर्मल बाबा के चमत्कारों को लेकर इस पेज पर गंभीर बहस हो रही है। इस पेज पर अंतिम पोस्ट 6 अप्रैल 2012 को किया गया था जिसमें भक्तों को पूर्णमासी कार्यक्रम के समाप्त किए जाने की जानकारी दी गई है।
लेकिन आप यह जानकर चौंक जाएंगे कि इस पोस्ट को जहां 17 हजार से ज्यादा लोगों ने लाइक किया वहीं 421 ने शेयर किया। अकेले इस पोस्ट पर ही लगभग 18 हजार टिप्पणियां की गई हैं जिनमें से अधिकतर में बाबा की आलोचना है और उनके तौर-तरीकों पर प्रश्न खड़े किए गए हैं। बाबा के कुछ भक्तों का यह भी कहना था कि बाबा अब काफी लोकप्रिय हो गए हैं। उन्हें अब अपने विज्ञापन बंद कर देने चाहिए। यहां पर कुछ लोग निर्मल बाबा का उपहास उड़ा कर उनसे अपने ऊपर भी कृपा करने के लिए कह रहे हैं। लेकिन सबसे ज्यादा लोग उनके कृपा के कारोबार पर प्रश्नचिन्ह उठा रहे हैं। इस पोस्ट पर टिप्पणियों में कुछ फेसबुक यूजर निर्मल बाबा को गालियां भी दे रहे हैं।

बाबा के फेसबुक पेज पर सिर्फ अंतिम पोस्ट पर आई टिप्पणियों का अध्ययन करने पर यह भी पता चला कि बाबा के समर्थन में ज्यादातर टिप्पणियां महिलाओं ने की थी। वहीं जिन पुरुषों ने बाबा के समर्थन में वहां पर अपनी बात रखी उनके प्रोफाइल फर्जी ज्यादा प्रतीत हो रहे थे। इन प्रोफाइलों में से ज्यादातर प्रोफाइल मार्च या अप्रैल में ही बनाए गए हैं। इससे ऐसा भी प्रतीत होता है कि बाबा ने टीवी के बाद फेसबुक के जरिए भी मोर्चा लेने की पूरी तैयारी की है।

बाबा के बारे में यह भी कहा जा रहा है कि वो जूनियर आर्टिस्टों को पैसा देकर अपने समागम में प्रश्न करवाते थे और अपने अनुसार बुलवाते थे लेकिन उनके फेसबुक पेज का अध्ययन करने के बाद यह और स्पष्ट हो गया है कि फर्जी प्रोफाइलों का सहारा लेकर उनका पक्ष रखा जा रहा है। माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर पर भी निर्मल बाबा की लोकप्रियता कोई कम नहीं है। उन्हें यहा पर भी 42 हजार से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं।

बाबा के बारे में बढ़ रही लोगों की रुचि (वीडियो) को सिर्फ सकारात्मक नहीं माना जा सकता क्योंकि उनके फेसबुक पेज पर पोस्ट की गई ज्यादातर टिप्पणियों में उनकी कृपा के तौर तरीकों पर ही प्रश्न उठाए गए हैं। वहीं यूट्यूब पर बाबा की तीसरी आंख के वीडियो दिखाने वाले चैनल पर भी टिप्पणी करना प्रतिबंधित हैं।
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बाबा के फेसबुक पेज पर सिर्फ अंतिम पोस्ट पर आई टिप्पणियों का अध्ययन करने पर यह भी पता चला कि बाबा के समर्थन में ज्यादातर टिप्पणियां महिलाओं ने की थी। वहीं जिन पुरुषों ने बाबा के समर्थन में वहां पर अपनी बात रखी उनके प्रोफाइल फर्जी ज्यादा प्रतीत हो रहे थे। इन प्रोफाइलों में से ज्यादातर प्रोफाइल मार्च या अप्रैल में ही बनाए गए हैं। इससे ऐसा भी प्रतीत होता है कि बाबा ने टीवी के बाद फेसबुक के जरिए भी मोर्चा लेने की पूरी तैयारी की है।

बाबा के बारे में यह भी कहा जा रहा है कि वो जूनियर आर्टिस्टों को पैसा देकर अपने समागम में प्रश्न करवाते थे और अपने अनुसार बुलवाते थे लेकिन उनके फेसबुक पेज का अध्ययन करने के बाद यह और स्पष्ट हो गया है कि फर्जी प्रोफाइलों का सहारा लेकर उनका पक्ष रखा जा रहा है। माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर पर भी निर्मल बाबा की लोकप्रियता कोई कम नहीं है। उन्हें यहा पर भी 42 हजार से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं।

बाबा के बारे में बढ़ रही लोगों की रुचि (वीडियो) को सिर्फ सकारात्मक नहीं माना जा सकता क्योंकि उनके फेसबुक पेज पर पोस्ट की गई ज्यादातर टिप्पणियों में उनकी कृपा के तौर तरीकों पर ही प्रश्न उठाए गए हैं। वहीं यूट्यूब पर बाबा की तीसरी आंख के वीडियो दिखाने वाले चैनल पर भी टिप्पणी करना प्रतिबंधित हैं।
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बाबा के बारे में यह भी कहा जा रहा है कि वो जूनियर आर्टिस्टों को पैसा देकर अपने समागम में प्रश्न करवाते थे और अपने अनुसार बुलवाते थे लेकिन उनके फेसबुक पेज का अध्ययन करने के बाद यह और स्पष्ट हो गया है कि फर्जी प्रोफाइलों का सहारा लेकर उनका पक्ष रखा जा रहा है। माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर पर भी निर्मल बाबा की लोकप्रियता कोई कम नहीं है। उन्हें यहा पर भी 42 हजार से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं।

बाबा के बारे में बढ़ रही लोगों की रुचि (वीडियो) को सिर्फ सकारात्मक नहीं माना जा सकता क्योंकि उनके फेसबुक पेज पर पोस्ट की गई ज्यादातर टिप्पणियों में उनकी कृपा के तौर तरीकों पर ही प्रश्न उठाए गए हैं। वहीं यूट्यूब पर बाबा की तीसरी आंख के वीडियो दिखाने वाले चैनल पर भी टिप्पणी करना प्रतिबंधित हैं।
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बाबा के बारे में यह भी कहा जा रहा है कि वो जूनियर आर्टिस्टों को पैसा देकर अपने समागम में प्रश्न करवाते थे और अपने अनुसार बुलवाते थे लेकिन उनके फेसबुक पेज का अध्ययन करने के बाद यह और स्पष्ट हो गया है कि फर्जी प्रोफाइलों का सहारा लेकर उनका पक्ष रखा जा रहा है। माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर पर भी निर्मल बाबा की लोकप्रियता कोई कम नहीं है। उन्हें यहा पर भी 42 हजार से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं।
बाबा के बारे में बढ़ रही लोगों की रुचि (वीडियो) को सिर्फ सकारात्मक नहीं माना जा सकता क्योंकि उनके फेसबुक पेज पर पोस्ट की गई ज्यादातर टिप्पणियों में उनकी कृपा के तौर तरीकों पर ही प्रश्न उठाए गए हैं। वहीं यूट्यूब पर बाबा की तीसरी आंख के वीडियो दिखाने वाले चैनल पर भी टिप्पणी करना प्रतिबंधित हैं।
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