तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे भाषा के विशेषज्ञ पढ़कर कहें कि ये कलम का छोटा सिपाही ऐसा है तो भीष्म साहनी, प्रेमचंद, महादेवी वर्मा, जयशंकर प्रसाद, सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला', हरिवंश राय बच्चन, फणीश्वर नाथ रेणु आदि कैसे रहे होंगे... गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.

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सचिन ने कहा आईपीएल को अलविदा

कोलकाता के ईडन गार्डेन में मुंबई इंडियंस के क्लिक करेंआईपीएल 6 का चैम्पियन बनने के साथ ही सचिन तेंदुलकर ने इस टूर्नामेंट को अलविदा कहने का फ़ैसला कर लिया.

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यह मेरा आखिरी आईपीएल था. मैं समझता हूं कि यह आईपीएल को अलविदा कहने का सही समय है. मुझे वास्तविकता स्वीकार करनी होगी. मैंने फैसला किया है कि यह मेरा आखिरी आईपीएल है. इससे बढिया समापन नहीं हो सकता."-सचिन तेंदुलकर

आईपीएल 6 का फाइनल - तस्वीरों में

तेंदुलकर ने अपनी टीम की खिताबी जीत के तुरंत बाद कहा, ‘यह मेरा आखिरी आईपीएल था. मैं समझता हूं कि यह आईपीएल को अलविदा कहने का सही समय है. मुझे वास्तविकता स्वीकार करनी होगी. मैंने फैसला किया है कि यह मेरा आखिरी आईपीएल है. इससे बढिया समापन नहीं हो सकता.’
लंबा इंतज़ार

सचिन के संन्यास के बारे में जब महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने उनसे पूछा कि क्या वह अगले साल वानखेड़े में मुंबई इंडियंस का पहला मैच खेलकर संन्यास लेना पसंद नहीं करेंगे? इस पर सचिन का जवाब था, ‘मैंने विश्वकप के लिए 21 साल तक इंतजार किया लेकिन आईपीएल खिताब के लिए केवल छह साल तक इंतजार करना पड़ा. यह मेरे लिए बहुत खास है.’

उन्होंने कहा, ‘मैं ट्रॉफी चूमने के लिए बेताब हूं. यह सभी को शुक्रिया कहने का सही समय है.’

सचिन जब आईपीएल से संन्यास लेने का ऐलान कर रहे थे, तब दर्शक दीर्घा में उनकी पत्नी डॉक्टर अंजलि, बेटा अर्जुन और बेटी सारा भी मौजूद थीं.

पिछले साल दिसंबर में एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने वाले तेंदुलकर इस बार आईपीएल में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाए थे.

उन्होंने 14 मैचों में 22.07 की औसत से 287 रन बनाए और उनका उच्चतम स्कोर 54 रन रहा.

तेंदुलकर 13 मई को सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ मैच में बल्लेबाजी के दौरान चोटिल हो गए थे और इसके बाद वह किसी मैच में नहीं खेल पाए.

वो साल 2008 में आईपीएल की शुरुआत से ही मुंबई इंडियंस का हिस्सा थे.

सचिन ने इंडियन प्रीमियर लीग में 78 मैचों में 34.83 की औसत से 2334 रन बनाए, जिसमें एक शतक और 13 अर्धशतक शामिल हैं.
कुछ ही समय पहले उन्होंने एक दिवसीय मैच से संन्यास की घोषणा की थी.

RAJESH MISHRA, KOLKATA

टेस्ट क्रिकेट को सम्मान देते थे राहुल द्रविड़

Rahul Dravid
एक दौर था जब विश्व के महान खिलाड़ी राहुल द्रविड़ को लेकर चर्चा होती थी कि आखिरकार राहुल द्रविड़ इतने धीरे क्यों खेलते हैं. असल में उनके धीरे खेलने की वजह यह नहीं हैं कि वह तेज खेलना नहीं जानते बल्कि वह कोशिश करते थे कि वह अपना विकेट सस्ते में न दें. वह रन के भूखे थे इसलिए वह सबसे पहले पिच के मिजाज को समझते तब अपने शॉट को चुनते. आज की तरह नहीं कि मैदान पर आते ही खिलाड़ी ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करें और अगले ही ओवर में अपना विकेट गवां दें.

राहुल द्रविड़ जीवन और कॅरियर

राहुल द्रविड़ का जन्म 11 जनवरी, 1973 को मध्य प्रदेश के इंदौर में ब्राह्मण परिवार में हुआ. मध्यक्रम के भरोसेमंद बल्लेबाज का पूरा नाम राहुल शरद द्रविड़ है. जन्म के बाद ही उनका परिवार कर्नाटक चला गया. राहुल द्रविड़ ने स्कूली शिक्षा बैंग्लोर के सेंट जोसेफ बॉयज हाई स्कूल से की जबकि बैंग्लोर के ही जोसेफ कॉलेज ऑफ कॉमर्स से डिग्री प्राप्त की. राहुल द्रविड़ ने 12 साल की उम्र से ही क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था. उन्होंने अंडर-15, अंडर-17 और अंडर-19 के लिए कर्नाटक का प्रतिनिधित्व किया. इनका खेलने का अंदाज औरों से बिलकुल अलग था. यही कारण था कि बचपन में ही पूर्व क्रिकेटर केकी तारापोर ने उनके टैलेंट को परख लिया. राहुल द्रविड़ ने 2003 में विजेता पंधेरकर से शादी की जिनसे उनके दो बेटे हैं.

राहुल द्रविड़ का क्रिकेटिंग कॅरियर

भारतीय क्रिकेट में दीवार के रूप में पहचाने जाने वाले राहुल द्रविड़ ने फरवरी 1991 में रणजी ट्रॉफी में खेलकर क्रिकेट में प्रदार्पण किया. उन्होंने अपने पहले मैच में 82 रन की जबर्दस्त पारी खेली. द्रविड़ को अंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय मैच में खेलने का मौका श्रीलंका के खिलाफ अप्रैल 1996 में मिला जबकि टेस्ट में उन्होंने अपना पहला मैच जून 1996 में इंग्लैंड के खिलाफ खेला. उन्होंने टेस्ट की 164 पारियों में 52.31 की औसत से 13288 रन बनाए जबकि वनडे में 344 मैच खेलकर 39.16 की औसत से 10889 रन बनाए. कॅरियर के आठवें साल में राहुल द्रविड़ को टीम इंडिया का कप्तान नियुक्त किया गया. लगभग चार वर्ष तक उन्होंने इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाया, लेकिन इस दौरान टीम इंडिया के लिए राहुल कोई चमत्कार नहीं कर पाए.

भरोसेमंद खिलाड़ी

राहुल द्रविड़ को हमेशा मुसीबत के समय टीम में याद किया जाता है. उन्होंने भारतीय टीम के लिए कई ऐसी पारियां खेली हैं जिसमें भारत की हार लगभग तय मानी जाती थी. कोलकाता में 2001 में लक्ष्मण के साथ खेली गई उस पारी को कौन भूल सकता है जिसमें भारत ने आस्ट्रेलिया को हराकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी. द्रविड़ ने इस मैच में 180 रन बनाए. ऐसा नहीं है कि राहुल केवल बल्लेबाजी के लिए याद किए जाते थे. जब-जब टीम को एक विकेट कीपर की जरूरत थी तो राहुल द्रविड़ ने यह भूमिका भी निभाई.

स्वभाव में शांत

शांत स्वभाव के राहुल द्रविड़ को क्रिकेट का एक कुशल कलाकार कहा जाता है. इस समय विश्व क्रिकेट में उनकी तरह की तकनीकी क्षमता बहुत ही कम खिलाड़ियों के पास है. धैर्य और मजबूती ने उन्हें मिस्टर वॉल की संज्ञा दिलाई है तो मुसीबत के समय टीम की मदद करने की वजह से उन्हें मिस्टर भरोसेमंद कहा जाता है. इस समय भारतीय क्रिकेट खेल के हर फॉर्मेट में बुरे दौर से गुजर रहा है. टेस्ट में भारत की और भी बुरी स्थिति है. जहां पहले राहुल द्रविड़ जैसे खिलाड़ी मैदान पर रुककर टेस्ट क्रिकेट को सम्मान देते थे वहीं आज के नए खिलाड़ी ठीक से विरोधी टीमों के गेंदबाजों खेल भी नहीं पाते.

मार्च 2012 में द्रविड़ ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट सहित फर्स्ट क्लास क्रिकेट से भी संन्यास ले लिया. इसी साल आईपीएल 2012 में उन्होंने राजस्थान रॉयल की तरफ से कप्तानी भी की थी.

द्रविड़ के रिकॉर्ड

1. पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर और मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के बाद वे तीसरे ऐसे बल्लेबाज हैं, जिन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 10 हजार से अधिन रन बनाए हैं.
2. वह दुनिया के तीसरे ऐसे बल्लेबाज हैं जिनके नाम 10 हजार से अधिक रन हैं.
3. भारत में सचिन तेंदुलकर के बाद राहुल द्रविड़ (36 शतक) के पास सबसे अधिक शतक हैं जबकि वह विश्व में वह चौथे स्थान पर हैं.
4. टेस्ट इतिहास में राहुल द्रविड़ सबसे अधिक कैच लेने वाले खिलाड़ी हैं जिनके नाम 200 कैच हैं.

राहुल द्रविड़ को पुरस्कार

1. अर्जुन अवार्ड: 1998 में राहुल द्रविड़ को अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया गया था.
2. विजडन क़्रिकेटर ऑफ द ईयर 2000 (Wisden Cricketer of the Year 2000)
3. पद्म श्री: 2004 में राहुल को पद्म श्री से सम्मानित किया गया था.
4. आईसीसी प्लेयर ऑफ द ईयर: 2004 में ही राहुल द्रविड़ को आईसीसी प्लेयर ऑफ द ईयर के खिताब से नवाजा गया था.

Sachin Tendulkar Photos

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सचिन के वनडे से संन्यास के मायने...


19 साल का एक नौजवान ब्रैडमैन के देश ऑस्ट्रेलिया जाता है और पर्थ के पारंपरिक तेज विकेट पर दुनिया की नंबर एक टीम के खिलाफ लोहा लेता है। पर्थ के वाका ग्राउंड की एतिहासिक पहचान क्रिकेट के जानकारों में ऐसे मैदान की है जहां 1932 में डॉन ब्रैडमैन पहली बार क्रिकेट खेलने आए और मैच को देखने के लिए रिकॉर्ड 20 हजार लोग आए। युवा सचिन की पारी को मीडिया सेंटर में देख रहे क्रिकेट पत्रकार जॉन वुडकॉक अपने चेयर से अचानक उठते हैं और कहते हैं 'मैंने अपनी पूरी जिंदगी में इससे बेहतर क्रिकेट पारी नहीं देखी' और हां, यहां बैठे लोगों में मैं एकलौता हूं जिन्हें डॉन ब्रैडमैन की चुनिंदा पारियों को देखने का सौभाग्य है। क्रिकेट समाज के दूसरी विधाओं की तरह अलग-अलग दौर में एक महानायक छोड़ जाता है, जो तय सांचे से हटकर अपनी लकीरें खुद खींचता है, डॉन और सचिन अपने-अपने दौर के ऐसे ही महानायक हैं।
लेकिन सचिन ने शायद अपने पूरे करियर के अधिकतर मौके पर 20 हजार से कम दर्शकों के बीच नहीं खेला, 16 साल की उम्र में संभावनाओं की नींव पर ऐसी ईमारत बनाई जो 23 साल तक जिंदा रहा और वो भी एक ऐसे मुल्क में जहां खेल का मतलब क्रिकेट है और क्रिकेट का मतलब सचिन रमेश तेंदुलकर। पश्चिमी देशों में तो कई ऐसे शोध हुए हैं, जिन्हें लिविंद विद ए ग्रेट फेनोमेना का नाम दिया गया है, लेकिन आधुनिक काल में सचिन तेंदुलकर इसके लिविंग लेबोरेट्री यानी जीते जागते प्रयोगशाला हैं।
आखिर लिविंग विद ए ग्रेट फेनोमेना क्या है? समाज में अकसर अलग-अलग विधाओं में अलग-अलग दौर पर ऐसा वक्त आता है, जब महानतम लेजेंड जी रहे होते हैं। 1989 से 2012 तक हिन्दुस्तान के एक बड़े तबके ने सचिन के साथ जिया वीपी, वाजपेयी से होते हुए मनमोहन तक, राजनीति ने ना जाने कितने थपेड़े देखे, लाइसेंस कोटा परमिट राज खुले बाजार में बदल गया, मैं आजाद हूं के अमिताभ बेटे अभिषेक के साथ पॉ के अमिताभ बन गए और गिने चुने घरों में लैंडलाइन ने 3जी और अब 4जी टेक्नोलॉजी की जगह ले ली। कितना कुछ बदल गया, लेकिन ना बदला तो सचिन रमेश तेंदुलकर।
दिल्ली यूनिवर्सिटी के जाने माने समाज शास्त्री सुरंजन सिन्हा की मानें तो 1989 से लेकर 2012 के हिन्दुस्तान में एक बड़ा तबका ऐसा है, जो सचिन के साथ लड़कपन से जवान हुआ और इस वर्ग में सचिन की जगह को भर पाना अगर नामुमकिन नहीं तो मुश्किल जरूर होगा। ये वो जेनेरेशन है जिसने मैदान पर आक्रामक सचिन को देखा ही जिसे विश्व क्रिकेट के मान चित्र में नम्बर एक माना गया, मैदान के बाहर एक आदर्श रोल मॉडल को देखा। स्वर्गीय प्रभाष जोशी ने एक बार सचिन के बारे में कहा था 'देश चाहता है कि सपूत हो तो तेंदुलकर जैसा, टीम चाहती है कि खिलाड़ी हो तो सचिन जैसा, माता-पिता चाहते हैं कि बेटा हो तो तेंदुलकर जैसा, गुरू चाहते हैं कि शिष्य हो तो तेंदुलकर जैसे और अब तो बेटा-बेटी चाहते हैं कि पापा हो तो तेंदुलकर जैसे।' सचिन इस मामले में वाकई विरले हैं और कम से कम इस जेनेरेशन को नाज रहेगा कि उन्होंने सचिन के साथ जिया। अब सवाल ये है कि क्या 23 पन्नों की इस यादगार किताब के आखिरी दो पन्ने क्या बाकी 21 पन्नों की तरह हो सकते थे।
पूर्व क्रिकेटर और मशहूर कामेंटेटर रवि शास्त्री ने अगर ये कहा था कि ऊपर वाले ने सचिन को धरती पर सिर्फ क्रिकेट खेलने के लिए भेजा है, तो ऑस्ट्रेलिया के मशहूर क्रिकेट लेखक पीटर रोबक ने कहा है कि सचिन की ड्रीम स्क्रिप्ट को ऊपरवाले ने लिखा, रोबक ने आगे कहा था कि क्या इस स्क्रिप्ट का क्लायमेक्स पूरी स्टोरी के हिसाब से होगा, इस बात को उन्हें इंतेजार रहेगा। रोबक आज इस दुनिया में नहीं हैं, 2011 वर्ल्ड कप के बाद महानायक के करियर की पटकथा किसी केस स्टडी से कम नहीं है। वो लम्हा आज भी सामने आ जाता है जब वर्ल्ड कप 2011 में जीत के बाद मुंबई के बांद्रा कुर्ला कांप्लैक्स में सचिन तेंदुलकर इंटरव्यू के लिए आए। 23 साल के मैराथन करियर में शायद किसी ने सचिन के चेहरे पर संतुष्टी के ऐसे भाव को किसी ने नहीं देखा था। '1983 में कपिल पाजी की टीम को वर्ल्ड कप जीतते देखा था, तभी देश के लिए खेलने की ललक जगी। करियर में काफी कुछ मिला, लेकिन इसकी बराबरी कोई नहीं कर सकता' सचिन के इन शब्दों की गूंज अब भी कल की बात लगती है। वर्ल्ड कप में जीत की खुमारी पूरी तरह से उतरी नहीं थी कि आईपीएल शुरू हो गया। आईपीएल के बीच में खबर आई कि सचिन वेस्टइंडीज में टेस्ट दौरे के लिए नहीं जाना चाहते। सचिन को करीबी से जानने वाला एक क्रिकेटर हैरान थे और उन्होंने कहा कि पूरे करियर में पहली बार ऐसा हुआ है कि वो फिट हैं, लेकिन सफेद कपड़ों में नहीं खेलना चाहते। अगर पुराने सचिन होते, तो आईपीएल छोड़ देते और पूरा फोकस वेस्टइंडीज में टेस्ट सीरीज पर लगाते। आखिर सैंकड़ों का सैंकड़ा इंतजार कर रहा है।
लार्ड्स से लेकर एडिलेड तक सचिन ने पूरी मशक्कत की, लेकिन वो एक सैंकड़े के लिए तरस गए। आखिर सचिन को वनडे का सहारा लेना पड़ा और वो सैंकड़ा एशिया कप में बांग्लादेश के खिलाफ आया और मैच में टीम इंडिया की हार के शक्ल में आया। सचिन को करीबी से जानने वाले इस क्रिकेटर ने दोबारा फोन करके कहा- सचमुच, ऊपर वाले से बड़ा कोई नहीं होता, क्रिकेट इतिहास का महानतम क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर भी नहीं, इस ड्रीम स्क्रिप्ट में फाल्टलाइन मुझे दिखने लगे हैं, रोमेंटिक स्टोरी का ट्रैजिक एंड का डर सताने लगा है। न्यूजीलैंड और इंग्लैंड के बाद ये डर जब हकीकत होती दिख रही थी, तभी सचिन तेंदुलकर ने वनडे क्रिकेट से संन्यास ले लिया। इस मायने में नागपुर टेस्ट मैच से लेकर मुंबई में पाकिस्तान सीरीज के लिए टीम सेलेक्शन के बीच की घटनाक्रम अहम है। 2009 के बाद सचिन तेंदुलकर वनडे सीरीज अपनी फिटनेस को देख अपने हिसाब से खेलते और छोड़ते थे, सेलेक्शन कमेटी सचिन से पूछती थी कि वो अगले वनडे सीरीज में खेलने के लिए तैयार हैं या नहीं। बीसीसीआई और सेलेक्शन कमेटी में सूत्रों की मानें तो इंग्लैंड के खिलाफ नागपुर टेस्ट मैच के बाद सेलेक्शन कमेटी ने सचिन को संपर्क नहीं किया। बीसीसीआई के एक बड़े अधिकारी की मानें तो बोर्ड साफ संकेत देना चाहता था कि वो 2015 वर्ल्ड कप में नहीं खेलेंगे और इस वजह से बेहतर ये होगा कि अगले ढाई साल में किसी युवा क्रिकेटर को एक्सपोजर मिले। इस बीच सचिन पाकिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज खेलने को तैयार थे, इस संदेश को बोर्ड तक पहुंचाया और आखिरकार जब बात समझ में आई तो टीम हित में वनडे से संन्यास का ऐलान कर दिया।
सचिन जैसे विरले क्रिकेटर का एक्जिट फॉर्मूला किसी बोर्ड के लिए आसान नहीं होता, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसे पेशेवर क्रिकेट बोर्ड के लिए भी, बीसीसीआई के लिए तो ये और भी मुश्किल है खासकर जिस तरह से सौरव से लेकर लक्ष्मण के मामले में देखा गया है। दूसरी बात, जो फैसला श्रीकांत एंड टीम को वर्ल्ड कप 2011 के बाद लेना चाहिए था, उस फैसले को संदीप पाटिल की टीम को 2012 के अंत में लेना पड़ा। तीसरी बात और सबसे अहम बात ये है कि अपने एक्जिट का प्लान महान से महान किरदार भी नहीं बना सकते, सचिन जैसे महानायक भी नहीं जिन्होंने पूरे करियर में कम से कम 95 फीसदी सही फैसले लिए। जिस मैदान में हमारी बोलती थी उस मैदान को आखिर क्यों छोड़ जाउं। सचिन ने अपने करियर के आखिरी पन्ने को यादगार बनाने के लिए आखिरी दांव खेला, ऑस्ट्रेलिया और फिर अगर संभव हुआ तो दक्षिण अफ्रीका टेस्ट सीरीज पर फोकस करने का दांव। अगर ये दांव कामयाब हो पाता है, तो अंतिम पन्ने की स्क्रिप्ट को वो बेहतर तरह से छोड़ पाएंगे। 2013 के साल का इस मायने में सचिन और उनसे अधिक उनके साथ के जेनेरेशन को जीने वाले को इंतजार रहेगा।

सचिन का रिकॉर्ड ही सब कुछ कहता है


मौजूदा समय में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज और क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन रमेश तेंदुलकर किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। मास्टर 4लास्टर सचिन तेंदुलकर को अगर चलती-फिरती रिकॉर्ड बुक बोला जाए तो कुछ गलत नहीं होगा। सचिन ने अपने 23 साल के लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर में एक बल्लेबाज के तौर पर लगभग सारे ही रिकॉर्ड अपने नाम कर लिए हैं। सचिन के नाम वनडे और टेस्ट मैचों में सबसे ज्यादा रन और शतक जड़ने का रिकॉर्ड है। टेस्ट क्रिकेट में सचिन अपने शतकों का अर्धशतक भी बना चुके हैं। इतना ही नहीं सचिन एकमात्र ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने वनडे मैचों में दोहरा शतक ठोका है। कभी टेनिस एल्बो तो कभी कमर दर्द से परेशान होकर सचिन को क्रिकेट से दूर भी होना पड़ा है, लेकिन मास्टर 4लास्टर हर मुश्किल परिस्थितियों से निकल कर इस मुकाम पर पहुंचे हैं।
सचिन ने महज 16 साल की उम्र में क्रिकेट में पदार्पण किया। 1989 में इस धुरंधर बल्लेबाज ने पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट मैच से अपना अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का सफर शुरू किया। सचिन 15 रन पर वकार यूनुस की गेंद बोल्ड हो गए। लेकिन सचिन ने जिस तरह पाक के तेज गेंदबाजों का सामना किया वह काबिल-ए-तारीफ था। सियालकोट में हुए फाइनल टेस्ट में सचिन को एक बाउंसर गेंद नाक पर लगी, उनकी नाक से खून निकलने लगा। लेकिन सचिन ने प्राथमिक चिकित्सा नहीं ली और बल्लेबाजी के लिए फिर से तैयार हो गए। आज सचिन को क्रिकेट का भगवान कहा जाता है। हालांकि सचिन ऐसा नहीं मानते हैं। सचिन जितने अच्छे खिलाड़ी हैं उतने ही अच्छे इंसान भी हैं। हालांकि सचिन टीम इंडिया के सफल कप्तान नहीं बन सके। सचिन ने खुद इसको स्वीकार किया और कप्तानी छोड़ दी। जब भी सचिन के खेल की आलोचना हुई है इस बल्लेबाज ने जवाब हमेशा अपने बल्ले से दिया है। सचिन के खौफ का यह आलम था कि दुनिया के महान लेग स्पिनर शेन वार्न ने कहा था कि सचिन उनके सपने में आकर उनकी गेंदों पर शॉट मारते हैं। भारत का कोई ऐसा स6मान नहीं है जिससे इस बल्लेबाज को नवाजा नहीं गया हो। उन्हें राजीव गांधी 2ोल रत्‍‌न और पद्वि5ाूषण से स6मानित किया गया है।
सचिन ने अब तक 463 वनडे मैच 2ोले हैं जिसमें उन्होंने 49 शतक और 96 अर्धशतकों की मदद से कुल 18426 रन बनाए हैं। उनका बल्लेबाजी औसत लग5ाग 46 का है। इनके नाम टेस्ट और वनडे में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड है। इसके साथ ही उन्होंने वनडे में 154 विकेट 5ाी चटकाए हैं।
24 अप्रैल 1973 को मराठा परिवार में पैदा हुए सचिन का नाम उनके पिता के चहेते संगीतकार सचिन देव बर्मन के नाम पर र2ा गया था। उनके बड़े 5ाई अजीत तेंदुलकर ने उन्हें 2ोलने के लिए प्रोत्साहित किया था। उनके एक और 5ाई नितिन तेंदुलकर और बहन सवितई तेंदुलकर हैं। 1995 में उन्होंने पेशे से डॉ1टर और खुद से पांच साल बड़ी अंजलि से शादी की थी। उनके दो बच्चे हैं अर्जुन और सारा।
सचिन ने मुंबई स्थित शारद आश्रम विद्यामंदिर से स्कूल शिक्षा ग्रहण की। वहीं पर उन्होंने कोच रमाकांत अचरेकर के सान्निध्य में अपने क्रिकेट जीवन का आगाज किया। पहले तेज गेंदबाज बनने के लिए उन्होंने एमआरएफ पेस फाउंडेशन के अ5यास कार्यक्रम में शिरकत की। लेकिन वहां गेंदबाज कोच डेनिस लिली ने पूर्ण रूप से अपनी बल्लेबाजी पर ध्यान केंद्रित करने को कहा।शुरुआती क्रिकेट जीवन में सचिन अपने कोच के साथ अ5यास करते थे। उनके कोच स्टंप्स पर एक रुपये का सि1का र2ा देते थे और जो गेंदबाज सचिन को आउट करता उसे वह मिल जाता था। यदि सचिन आउट हुए बिना पूरे समय बल्लेबाजी करने में सफल रहते थे तो ये सिक्का उन्हें मिलता था। उस समय के 13 सि1के सचिन के पास आज 5ाी मौजूद हैं, जो उन्हें बेहद प्रिय हैं।
1988 में एक स्कूली टूर्नामेंट में उन्होंने अपने साथी बल्लेबाज विनोद कांबली के साथ 664 रनों की ऐतिहासिक साझेदारी की थी। इस धमाकेदार जोड़ी के अद्वितीय प्रदर्शन के कारण एक गेंदबाज तो रो ही दिया और विपक्षी टीम ने 2ोलने से इन्कार कर दिया। सचिन ने इस मैच में 320 रन और टूर्नामेंट में एक हजार से 5ाी ज्यादा रन बनाए।
सचिन का क्रिकेट के आलावा दूसरा पक्ष 5ाी है। वह अपनालय नाम के एक एनजीइओ के 200 बच्चों के पालन-पोषण की जि6मेदारी 5ाी उठाते हैं। इसके साथ ही वह अपने ही नाम के एक सफल रेस्टोरेंट के मालिक 5ाी हैं।

भारत ने पाकिस्तान को हराया, सेमीफाइनल की उम्मीदें बरकरार

कोलंबो।। T20 वर्ल्ड कप के एक अहम मैच में पाकिस्तान को हराकर भारत ने सेमीफाइनल में जाने की उम्मीदें बचा लीं। सुपर 8 के मैच में कोहली की 78 रनों की नॉटआउट पारी की बदौलत भारत ने पाकिस्तान को 8 विकेट से हराया। पाकिस्तान ने पहले बैटिंग करते हुए 128 रन बनाए, जिसके जवाब में भारत ने 17 ओवरों में ही टारगेट पा लिया। इस जीत के साथ भारत ने इस रेकॉर्ड को भी बरकरार रखा कि वह वर्ल्ड कप के किसी भी मैच में पाकिस्तान से नहीं हारा है। भारत की तरफ से बालाजी ने 3 विकेट झटके। युवराज और अश्विन ने 2-2 विकेट लिए। इरफान पठान और विराट कोहली को 1-1 विकेट मिला।
भारत की खराब शुरुआत
पाकिस्तान के 128 रनों के टारगेट का पीछा करने उतरे भारत की शुरुआत अच्छी नहीं रही। पहले ओवर में ही गंभीर बिना कोई रन बनाए आउट हो गए। गंभीर को रजा हसन ने अपनी ही गेंद पर कैचि किया।Virender Sehwag attempts a shot
सहवाग की वापसी
वीरेंद्र सहवाग को कई मैचों बाद टीम में शामिल में किया गया। सहवाग ने 24 गेंदों में 4 चौकों की मदद से 29 रन बनाए।
Virat Kohli plays a shot towards the off side
कोहली की विराट पारी
गंभीर के पहले ही ओवर में आउट होने से भारत की मुश्किलें बढ़ गई थीं। लेकिन एक बार फिर विराट कोहली ने भारत के लिए मैच जिताने वाली पारी खेली। विराट कोहली ने 61 गेंदों में 8 चौकों और 2 छक्कों की मदद से 78 रनों की नॉटआउट पारी खेली। विराट कोहली को मैन ऑफ द मैच भी चुना गया।
Virat Kohli plays a shot
युवराज भी रहे नॉटआउट
युवराज ने भी 16 गेंदों में नॉटआउट रहते हुए 19 रन बनाए। उन्होंने 2 चौके जड़े।

भारतीय बोलरों ने रखी जीत की नींव
टॉस जीतकर पहले बैटिंग करने उतरे पाकिस्तान की शुरुआत ठीक नहीं रही। दूसरे ओवर में इरफान पठान ने इमरान नजीर को एलबीडब्ल्यू कर दिया। पाकिस्तान ने शाहिद अफरीदी (12 गेंदों में 14 रन) को बैटिंग ऑर्डर में ऊपर भेजा। अफरीदी बालाजी की गेंद पर सुरेश रैना को आसान कैच दे बैठे।

युवराज की बोलिंग
धोनी ने सातवें ओवर में युवराज को बॉल थमाई, जिन्होंने चौथी गेंद पर ही नासिर जमशेद (04) को धोनी के हाथों कैच करा दिया। युवराज ने अगले ओवर में कामरान अकमल (05) को भी धोनी के हाथों कैच कराया।

विराट ने किया बोल्ड
विराट कोहली ने टिककर खेल रहे ओपनर हफीज को 10वें ओवर में बोल्ड करके पाकिस्तान की कमर तोड़ दी। कोहली की अंदर आती गेंद को हफीज विकेट पर खेल गए। उन्होंने 28 गेंदों की अपनी पारी में सिर्फ एक चौका जड़ा और 15 रन बनाए।

अश्विन की फिरकी
अश्विन ने बढ़िया खेल रहे शोएब मलिक को मिडविकेट पर रोहित शर्मा के हाथों कैच कराया। मलिक ने 22 गेंदों पर 28 रनों की अपनी पारी में तीन चौके जड़े। अश्विन ने अगले ओवर में उमर को भी रैना को हाथों कैच कराया।

बालाजी ने समेटी पारी
बालाजी ने आखिरी ओवर में उमर गुल (12 रन) और सईद अजमल (01) को पविलियन भेजकर पाकिस्तान की पारी 128 रनों पर खत्म कर दी।

टीम में बदलाव 
भारत ने टीम में दो बदलाव करते हुए हरभजन सिंह और पीयूष चावला की जगह वीरेंद्र सहवाग और बालाजी को टीम में शामिल किया था।

Aye Mere Watan ke logon Jara aankh men Bhar lo paani...


ए मेरे वतन के लोगों जरा आँख में भर लो पानी...

जी हाँ आज आस्ट्रेलिया के साथ पहले टेस्ट मैच, 20 -20 और अब एकदिवसीय मैच में जो  इंडिया टीम की दुर्गति हो रही है... उसे देखते हुए ... निचे दिए गए फोटो देखकर अश्चार्ज होता है... की यही वो टीम है... जो 8  माह पहले विश्व कप जीती थी....

DAY, APRIL 4, 2011

India wins ICC World Cup 2011 Final - Celebration photos

The World Champions - Indian Cricket Team


World Cup 2011 Final moment


Dhoni and Tendulkar - Moment of Joy


Yuvraj Singh celebrates win over Srilanka in World Cup 2011 final at Wankhede Stadium



Yuvraj with Gary Kirsten, coach of India



Sachin Tendulkar is chaired on a lap of honor after India's victory over Sri Lanka in the ICC World Cup 2011 Final


Team India celebrates World Cup 2011 win


Team India celebrates World Cup 2011 win


Team India celebrates World Cup 2011 win


Zaheer Khan with World Cup Trophy


Sachin with Son Arjun and Daughter sara


Sachin and Gambhir with World Cup Trophy



Coach of India,  Gary Kirsten in air


Sachin with fan


World cup 2011 India team


World cup final 2011 pictures


World cup final 2011 India team picture


World Cup Final India vs Sri Lanka. MS Dhoni guides the historical chase

जब सभी क्रिकेटर रो पड़े

एक बार जब कैप्टन कूल महेंद्र सिंह धौनी से जब पूछा गया कि वह विपरीत से विपरीत परिस्थिति में भी इतने कूल कैसे बने रहते हैं, तो उनका जवाब था, दवाब को चेहरे पर झलकने नहीं देता, वह दिमाग में कैद रहता है, इसीलिए मेरे सिर के बाल असमय सफेद हो चले हैं..। लेकिन यह क्या भावनाओं पर काबू करने वाले धौनी रो दिए?

जी हां, भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान इस साल अप्रैल में भारत के विश्व कप जीतने के बाद इतने भावुक हो गए थे कि वह खिताबी मुकाबले के बाद अपने साथी खिलाड़ियों के साथ रो पड़े थे। यह बात उन्होंने खुद बताई। 'सीएनएन आइबीएन स्पो‌र्ट्स पर्सन ऑफ द ईयर' बने धौनी ने समारोह के दौरान एक वीडियो संदेश के जरिए कहा, 'मैच खत्म होने के बाद सभी खिलाड़ी रोए थे। मैं भी रोया था, हालाकि इसका कोई भी फुटेज उपलब्ध नहीं है। भावनाओं पर नियंत्रण करना काफी मुश्किल था क्योंकि हम सभी विश्व कप जीतने का सपना देख रहे थे।' ऑस्ट्रेलिया पहुंच चुके धौनी ने वीडियो रिकॉर्डेड संदेश में कहा, 'मैं रो रहा था और जब मैंने ऊपर देखा तो सभी खिलाड़ी मुझे घेरकर खड़े हो गए। मैं ड्रेसिंग रूम की ओर दौड़ गया और वहा मैंने देखा दो खिलाड़ी रोते हुए मेरी तरफ दौड़ रहे हैं। मैं उन्हें देखकर और रो पड़ा। भावनाओं पर काबू करना मुश्किल था।'

Mahendra Singh Dhoni's Fanda

माहि को झारखंडी नहीं
उत्तराखंडी कहें जनाब
भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी अपनी पत्नी साक्षी के साथ 
दूर झारखंड के रांची जा कर बसे पान सिंह धोनी ने देहरादून में अपने बेटे और क्रिकेट जगत के देदीप्यमान नक्षत्र महेंद्र का विवाह देहरादून की साक्षी रावत के साथ करा कर पूरे 35 साल बाद अपनी जन्मभूमि से एक बार फिर टूटे तार जोड़ने की कोशिश की है.

उत्तराखंड के धोनी के प्रशंसक उनके यहां से शादी कर लेने में ही संतोष जता रहे हैं. यूं धोनी या उनके पिता ने उत्तराखंड से जाने और विश्व ख्याति अर्जित करने के बाद उत्तराखंड की उस ज़मीन को शायद ही याद किया हो जहां उनके पुरखे रहते आए थे. अल्मोड़ा जिले के लमगड़ा ब्लॉक के ल्वाली विनोला गांव में जन्में माही के पिता पान सिंह धोनी उत्तराखंड के लाखों अन्य पलायन कर चुके युवाओं की तरह 1975 में गांव छोड़ कर रोज़गार की तलाश में झारखंड के रांची गए थे.

दो भाइयों में एक पान सिंह मात्र पांचवी पास थे और गांव छोड़ कर जाने से पहले वो अपने गांव के पास धागानौला में एक राशन की दूकान में काम करते थे.पान सिंह धोनी को रांची में परिचितों के माध्यम से जलकल विभाग में फोर्थ क्लास की नौकरी मिल गई. एक क्लर्क को भी बार बार सलाम ठोंकने वाले पान सिंह को क्या पता था कि उसके घर में पैदा हुए बालक माही के कारण एक दिन दुनिया उसे सलाम ठोकेगी और पाई पाई जोड़ने वाले के कदमों में एक दिन बेशुमार दौलत का अंबार लगेगा.

पान सिंह ज़ाहिर है रांची का ये ऋण कभी नहीं चुका सकते. और रांची भी ज़ाहिर है पान सिंह और उनके बेटे पर हमेशा नाज़ करता रह सकता है. धोनी अब झारखंड के लाडले हैं और उत्तराखंड के लोगों को मलाल है कि धोनी अपने पुरखों की ज़मीन को भूल गए. अब धोनी ने देहरादून में शादी की और उनकी पत्नी भी उत्तराखंड की मूल निवासी है, तो यहां के लोगों में ख़ुशी राहत और गर्व की मिली जुली भावना देखी जा सकती है.

विनोला ग्राम पंचायत के ल्वाली गांव में जन्मे पान सिंह के बड़े भाई घनपत सिंहदसवीं तक पढ़े लिखे थे इसलिए उन्हें प्राइमेरी स्कूल में शिक्षक के तौर पर नौकरी मिल गई. घनपत भी अपनी पत्नी के साथ माही की शादी में शामिल होने के लिए देहरादून पहुंचे थे. ल्वाली गांव के पूर्व पोस्ट मास्टर धर्मसिंह धोनी का कहना है कि महेंद्र केवल एक बार अपने गांव अपने जनेउ संस्कार के लिए आया था.

माही के उन दिनों की फोटो आज भी उनके चचेरे भाई बहन गर्व से लोगों को दिखाते हैं. उनके पिता का शुरू में अपने गांव आना जाना रहा मगर धीरे धीरे गांव की यादें धुंधली होते जाने के साथ ही उन्होंने भी गांव आना कम कर दिया.और जैसे ही महेंद्र का भारतीय क्रिकेट के आकाश में उदय हुआ तो पान सिंह शायद अपने उस गांव को भूल गए.

धर्मसिंह का कहना है कि ल्वाली गांव के लोगों को माही पर गर्व तो है मगर मलाल भी है कि उन्होंने कभी ल्वाली तो दूर रहा दूर, उत्तराखंड से भी अपना रिश्ता ज़ाहिर नहीं किया. माही की शादी पर उनके पैतृक गांव में सन्नाटा ही था. अलबत्ता कुछ टीवी कैमरे मिठाई के डिब्बों के बीच एक ख़ुशी दिखाते रहे लेकिन कोई भी समझ सकता था कि वो कितनी वास्तविक है. और उसमें क्या कसक है.

बच्चों की पढ़ाई का ध्यान मेरी पत्नी रखती हैं : सचिन

मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने कहा है कि हालांकि वे अपने पुत्र को क्रिकेट खेलने के गुर सिखाते हैं और बेटी को टेनिस के बारे में भी कुछ समझा सकते है पर दोनों की पढ़ाई का ख्याल रखने की जिम्मेदारी उनकी पत्नी अंजली पर है।

रविवार को स्कूली बच्चों के साथ कोका कोला और एनडीटीवी द्वारा चलाए जा रहे एक संयुक्त अभियान के दौरान वीडियो क्रांफ्रेंस के दौरान सचिन ने कहा कि उन्हें अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए समय ही नहीं मिलता है। जब एक विद्यार्थी ने उन से यह पूछा कि वे अभी तक कैसे खेल पाते है तो उन्होने जवाब दिया बूस्ट इज द सीक्रेट ऑफ माय एनर्जी।

सचिन ने कहा कि उन का क्रिकेट के प्रति जूनून बचपन से ही था और इसलिए वे कभी भी इस खेल से थकते नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वे भविष्य में भी खेलते रहेंगे क्योंकि वे क्रिकेट के प्रति सर्मपित है और जब कोई किसी चीज के प्रति सर्मपित होता है तो वह उस से थकता नहीं हैं।
sachin tendulkar family photos

SACHIN AND DHYANCHAND

सचिन और दद्दा दोनों ही 'भारत रत्न' के हकदार
भारत में खेल के दो अनमोल रत्न हैं : दद्दा ध्यानचंद और सचिन तेंडुलकर ध्यान चंद दुनिया में हॉकी के पर्याय हैं तो सचिन तेंडुलकर ने क्रिकेट में ऐसे शिखर चूमे हैं, जिन पर भारत नाज कर सकता है। सोमवार को हॉकी के 'जादूगर' का जन्मदिन है। खिलाड़ियों को भी भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' देने की मांग उठ रही है। इस बाबत सरकार भी शिद्दत से सोच रही है। बहस इस बात को लेकर है सबसे पहले यह सम्मान किसे दिया जाए। भारत के हॉकी और क्रिकेट दिग्गजों से इस सवाल का जवाब तलाशने की कोशिश की तो वे दोनों को इसका हकदार मानते हैं, लेकिन इसकी शुरुआत ध्यान चंद से करने के पक्ष में लगे। इन सभी का मानना है दद्दा के बाद यह अवार्ड सचिन तेंडुलकर को दिया जाए।

दद्दा के मंझले बेटे अशोक कुमार सिंह कहते हैं, 'दद्दा दुनिया में हॉकी का पर्याय हैं और रहेंगे। हॉकी में जो बुलंदियां दद्दा ने चूमीं, उसे दुनिया में कोई दूसरा नहीं चूम पाया। उनके जन्म दिन 29 अगस्त को सरकार ने 1995-96 में राष्ट्रीय खेल दिवस घोषित किया। ध्यानचंद के नाम ओलिंपिक में तीन गोल्ड मेडल हैं, जबकि तेंडुलकर के नाम केवल एक वर्ल्ड कप है। भारत में यदि किसी खिलाड़ी को 'भारत रत्न' देने की शुरुआत होती है तो यह ध्यानचंद से होनी चाहिए।'
BHARAT RATNA : RAJESH MISHRA
भारत के पूर्व कप्तान जफर इकबाल की राय है, 'ध्यानचंद ने आजादी से पहले भारत को ओलिंपिक में तीन गोल्ड जिताने में अहम रोल अदा किया है। इसमें कोई दो राय नहीं हो सकती कि खेलों में यदि किसी खिलाड़ी को भारत रत्न दिया जाए तो सबसे पहले इसके हकदार ध्यानचंद हैं।

ओलिंपियन जगबीर सिंह कहते हैं, 'भारतीय हॉकी दुनिया में दद्दा ध्यानचंद के नाम से ही जिंदा है। मेरी नजर में ध्यानचंद और तेंडुलकर दोनों ही बतौर खिलाड़ी इसके हकदार हैं। लेकिन यदि सरकार अवार्ड देने की शुरुआत करती है तो यह ध्यानचंद से ही होनी चाहिए।

सचिन के समकालीन रहे ओलिंपियन धनराज पिल्लै कहते हैं, 'मेरी राय में ध्यानचंद और सचिन दोनों की भारत रत्न के हकदार हैं। दोनों ने खेलों में देश का दुनिया में गौरव बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। दोनों ने खेल के लिए बहुत कुछ त्याग किया। फिर भी मैं यह कहूंगा कि सबसे पहले कोई हकदार है तो वह हैं ध्यानचंद।'

भारत के महान स्पिनर बिशन सिंह बेदी ने कहा, 'मेरा मानना है कि शुरुआत दद्दा ध्यान चंद से ही होनी चाहिए। सचिन की बारी तो आ ही जाएगी। मेरा मानना है कि दद्दा के नाम पर तो खुद सचिन को भी ऐतराज नहीं होगा। बलबीर सिंह सीनियर भी इसके हकदार हैं।'

ऑलराउंडर मदन लाल ने कहा, 'ध्यानचंद और सचिन दोनों ही भारत के महान खिलाड़ी हैं। दोनों का योगदान बेमिसाल है। फिर भी मैं यही कहूंगा कि सबसे पहले यह सम्मान ध्यानचंद जी को ही मिलना चाहिए।'

भारत के पूर्व लेफ्ट आर्म स्पिनर मनिंदर सिंह ने कहा, 'मैंने ध्यानचंद के बारे में केवल सुना है। इस लिहाज से मेरा उनकी बाबत टिप्पणी करना वाजिब नहीं होगा। मैंने सचिन को खेलते देखा है और मेरी राय में भारत रत्न के पहले हकदार वही हैं।
RAJESH MISHRA

22 VISHWA RICARDON KE BADSHAH "SACHIN TENDULKAR"

MASTER BLASTER SACHIN TENDULKAR
22 विश्व रिकॉर्डों के बादशाह सचिन तेंदुलकर

राजेश मिश्रा


अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में कीर्तिमानों के अंबार लगाने वाले अनुभवी बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर इस खेल में दो चार नहीं बल्कि 22 विश्व रिकॉर्डों के बेताज बादशाह हैं।

राजेश मिश्रा, कोलकाता, प. बंगाल

सचिन ने हाल में कोलंबो में समाप्त हुई त्रिकोणीय श्रृंखला के फाइनल में भारत को खिताबी जीत दिलाने में अपना 44वां एकदिवसीय शतक लगाया था जिसके बाद स्वाभाविक रूप से यह सवाल उठता है कि सचिन के नाम अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में कितने विश्व रिकॉर्ड हैं। सचिन के 19 वर्ष की क्रिकेट महागाथा के ये विश्व रिकॉर्ड इस प्रकार हैं-

टेस्ट क्रिकेट- सर्वाधिक रन- 12473, सर्वाधिक शतक- 42, सर्वाधिक 50 के स्कोर- 95 (42 शतक और 53 अर्धशतक) सर्वाधिक चौके- 1676

एकदिवसीय क्रिकेट- सर्वाधिक रन - 16895, सर्वाधिक शतक- 44, सर्वाधिक 50 के स्कोर 135 (44 शतक और 91 अर्धशतक)

एक कैलेंडर वर्ष में सर्वाधिक रन- 1894 रन (1998 में), एक कैलेंडर वर्ष में सर्वाधिक शतक- नौ शतक (1998 में)

एक विश्वकप में सर्वाधिक रन- 673 रन (2003 के विश्वकप में)

एक टीम के खिलाफ सर्वाधिक शतक- ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका के खिलाफ आठ-आठ शतक

सर्वाधिक नाइटीज- 17, सर्वाधिक 99- तीन बार, सर्वाधिक चौके- 1839, सर्वाधिक लगातार मैच- 185 (25 अप्रैल 1990 से 24 अप्रैल 1998 तक)

सर्वाधिक मैन ऑफ द मैच- 59, सर्वाधिक प्लेयर ऑफ द सीरीज- 14 (टेस्ट, एकदिवसीय और 20-20),

सर्वाधिक मैच- 588, सर्वाधिक रन- 29678, सर्वाधिक शतक- 86, सर्वाधिक 50 के स्कोर- 230, सर्वाधिक चौके- 3517 ।



सचिन तेंदुलकर को अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट खेलते हुए 20 साल हो चुके हैं लेकिन इतने लंबे रिश्ते के बावजूद इस खेल से उनकी मोहब्बत कम होने के बजाय लगातार बढ़ती ही जा रही है।

सचिन का इस खेल से लगाव करीब ढाई दशक पुराना है। लेकिन वक्त की सलवटें भी उन्हें इस प्यारी चीज से दूर नहीं कर पायी हैं। स्थिति तो यह हो गयी है कि सचिन की क्रिकेट के साथ चल रही मोहब्बत लगातार परवान चढ़ती जा रही है।

रिकॉर्डों के बादशाह सचिन का सिर्फ क्रिकेट में नहीं बल्कि इसके अलावा उनके कुछ अनोखे कारनामे भी हैं। जैसे कि लंदन में मोम की प्रतिमा बनाने वाली मैडम टुसॉड्स म्यूजियम ने क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर की मोम प्रतिमा बनाई। सचिन की ये प्रतिमा मैडम टुसॉड्स म्यूजियम के खेल विभाग में रखी गई है जहां खेल जगत की कई महान हस्तियां जैसे मोहम्मद अली, डेविड बेकहम, टाइगर वुड्स और शेन वॉर्न पहले से ही मौजूद हैं।

सचिन न सिर्फ क्रिकेट जगत में रिकॉर्डों के बेतजाज बादशाह हैं, बल्कि वे अभी भी अपने साथी क्रिकेटरों की अपेक्षा सर्वाधिक टैक्स देने वाले खिलाड़ी हैं।

सचिन सिर्फ क्रिकेट खेलते ही नहीं हैं बल्कि इसके भविष्य को लेकर भी चिंतित हैं। ट्वेंटी-20 के आगमन से एकदिवसीय के अस्तित्व पर मंडरा रहे गंभीर खतरे पर सचिन ने 50 ओवर के प्रारूप को बचाने के लिए इसे 25-25 ओवरों की चार पारियों में बांटने का सुझाव दिया। सचिन के इस विचार को क्रिकेट जगत ने स्वागत किया है। अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) जहां सचिन के इस सुझाव से सहमत हुई है वहीं पूर्व भारतीय क्रिकेटर कपिल देव ने इसे बकवास बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया।

सचिन की महानता यह भी है कि वे अपने साथी खिलाड़ियों को भी क्रिकेट के गुर सीखाते रहते हैं। हाल ही में एनसीए में आयोजित अभ्यास शिविर के दौर भारतीय बल्लेबाज सुरेश रैना को शॉर्टपिच गेंदें को खेलने में हो रही परेशानी से उबरने के उपाय बताए।

सचिन सिर्फ भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों को ही नहीं बल्कि विदेशी खिलाड़ियों को भी नुस्खे देते रहते हैं। कुछ दिनों पहले ऑस्ट्रेलिया के युवा सलामी बल्लेबाज फिलिप ह्यूज को टिप्स दिए।