तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे भाषा के विशेषज्ञ पढ़कर कहें कि ये कलम का छोटा सिपाही ऐसा है तो भीष्म साहनी, प्रेमचंद, महादेवी वर्मा, जयशंकर प्रसाद, सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला', हरिवंश राय बच्चन, फणीश्वर नाथ रेणु आदि कैसे रहे होंगे... गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.

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सचिन ने कहा आईपीएल को अलविदा

कोलकाता के ईडन गार्डेन में मुंबई इंडियंस के क्लिक करेंआईपीएल 6 का चैम्पियन बनने के साथ ही सचिन तेंदुलकर ने इस टूर्नामेंट को अलविदा कहने का फ़ैसला कर लिया.

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यह मेरा आखिरी आईपीएल था. मैं समझता हूं कि यह आईपीएल को अलविदा कहने का सही समय है. मुझे वास्तविकता स्वीकार करनी होगी. मैंने फैसला किया है कि यह मेरा आखिरी आईपीएल है. इससे बढिया समापन नहीं हो सकता."-सचिन तेंदुलकर

आईपीएल 6 का फाइनल - तस्वीरों में

तेंदुलकर ने अपनी टीम की खिताबी जीत के तुरंत बाद कहा, ‘यह मेरा आखिरी आईपीएल था. मैं समझता हूं कि यह आईपीएल को अलविदा कहने का सही समय है. मुझे वास्तविकता स्वीकार करनी होगी. मैंने फैसला किया है कि यह मेरा आखिरी आईपीएल है. इससे बढिया समापन नहीं हो सकता.’
लंबा इंतज़ार

सचिन के संन्यास के बारे में जब महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने उनसे पूछा कि क्या वह अगले साल वानखेड़े में मुंबई इंडियंस का पहला मैच खेलकर संन्यास लेना पसंद नहीं करेंगे? इस पर सचिन का जवाब था, ‘मैंने विश्वकप के लिए 21 साल तक इंतजार किया लेकिन आईपीएल खिताब के लिए केवल छह साल तक इंतजार करना पड़ा. यह मेरे लिए बहुत खास है.’

उन्होंने कहा, ‘मैं ट्रॉफी चूमने के लिए बेताब हूं. यह सभी को शुक्रिया कहने का सही समय है.’

सचिन जब आईपीएल से संन्यास लेने का ऐलान कर रहे थे, तब दर्शक दीर्घा में उनकी पत्नी डॉक्टर अंजलि, बेटा अर्जुन और बेटी सारा भी मौजूद थीं.

पिछले साल दिसंबर में एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने वाले तेंदुलकर इस बार आईपीएल में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाए थे.

उन्होंने 14 मैचों में 22.07 की औसत से 287 रन बनाए और उनका उच्चतम स्कोर 54 रन रहा.

तेंदुलकर 13 मई को सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ मैच में बल्लेबाजी के दौरान चोटिल हो गए थे और इसके बाद वह किसी मैच में नहीं खेल पाए.

वो साल 2008 में आईपीएल की शुरुआत से ही मुंबई इंडियंस का हिस्सा थे.

सचिन ने इंडियन प्रीमियर लीग में 78 मैचों में 34.83 की औसत से 2334 रन बनाए, जिसमें एक शतक और 13 अर्धशतक शामिल हैं.
कुछ ही समय पहले उन्होंने एक दिवसीय मैच से संन्यास की घोषणा की थी.

RAJESH MISHRA, KOLKATA

Sachin Tendulkar Photos

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सचिन के वनडे से संन्यास के मायने...


19 साल का एक नौजवान ब्रैडमैन के देश ऑस्ट्रेलिया जाता है और पर्थ के पारंपरिक तेज विकेट पर दुनिया की नंबर एक टीम के खिलाफ लोहा लेता है। पर्थ के वाका ग्राउंड की एतिहासिक पहचान क्रिकेट के जानकारों में ऐसे मैदान की है जहां 1932 में डॉन ब्रैडमैन पहली बार क्रिकेट खेलने आए और मैच को देखने के लिए रिकॉर्ड 20 हजार लोग आए। युवा सचिन की पारी को मीडिया सेंटर में देख रहे क्रिकेट पत्रकार जॉन वुडकॉक अपने चेयर से अचानक उठते हैं और कहते हैं 'मैंने अपनी पूरी जिंदगी में इससे बेहतर क्रिकेट पारी नहीं देखी' और हां, यहां बैठे लोगों में मैं एकलौता हूं जिन्हें डॉन ब्रैडमैन की चुनिंदा पारियों को देखने का सौभाग्य है। क्रिकेट समाज के दूसरी विधाओं की तरह अलग-अलग दौर में एक महानायक छोड़ जाता है, जो तय सांचे से हटकर अपनी लकीरें खुद खींचता है, डॉन और सचिन अपने-अपने दौर के ऐसे ही महानायक हैं।
लेकिन सचिन ने शायद अपने पूरे करियर के अधिकतर मौके पर 20 हजार से कम दर्शकों के बीच नहीं खेला, 16 साल की उम्र में संभावनाओं की नींव पर ऐसी ईमारत बनाई जो 23 साल तक जिंदा रहा और वो भी एक ऐसे मुल्क में जहां खेल का मतलब क्रिकेट है और क्रिकेट का मतलब सचिन रमेश तेंदुलकर। पश्चिमी देशों में तो कई ऐसे शोध हुए हैं, जिन्हें लिविंद विद ए ग्रेट फेनोमेना का नाम दिया गया है, लेकिन आधुनिक काल में सचिन तेंदुलकर इसके लिविंग लेबोरेट्री यानी जीते जागते प्रयोगशाला हैं।
आखिर लिविंग विद ए ग्रेट फेनोमेना क्या है? समाज में अकसर अलग-अलग विधाओं में अलग-अलग दौर पर ऐसा वक्त आता है, जब महानतम लेजेंड जी रहे होते हैं। 1989 से 2012 तक हिन्दुस्तान के एक बड़े तबके ने सचिन के साथ जिया वीपी, वाजपेयी से होते हुए मनमोहन तक, राजनीति ने ना जाने कितने थपेड़े देखे, लाइसेंस कोटा परमिट राज खुले बाजार में बदल गया, मैं आजाद हूं के अमिताभ बेटे अभिषेक के साथ पॉ के अमिताभ बन गए और गिने चुने घरों में लैंडलाइन ने 3जी और अब 4जी टेक्नोलॉजी की जगह ले ली। कितना कुछ बदल गया, लेकिन ना बदला तो सचिन रमेश तेंदुलकर।
दिल्ली यूनिवर्सिटी के जाने माने समाज शास्त्री सुरंजन सिन्हा की मानें तो 1989 से लेकर 2012 के हिन्दुस्तान में एक बड़ा तबका ऐसा है, जो सचिन के साथ लड़कपन से जवान हुआ और इस वर्ग में सचिन की जगह को भर पाना अगर नामुमकिन नहीं तो मुश्किल जरूर होगा। ये वो जेनेरेशन है जिसने मैदान पर आक्रामक सचिन को देखा ही जिसे विश्व क्रिकेट के मान चित्र में नम्बर एक माना गया, मैदान के बाहर एक आदर्श रोल मॉडल को देखा। स्वर्गीय प्रभाष जोशी ने एक बार सचिन के बारे में कहा था 'देश चाहता है कि सपूत हो तो तेंदुलकर जैसा, टीम चाहती है कि खिलाड़ी हो तो सचिन जैसा, माता-पिता चाहते हैं कि बेटा हो तो तेंदुलकर जैसा, गुरू चाहते हैं कि शिष्य हो तो तेंदुलकर जैसे और अब तो बेटा-बेटी चाहते हैं कि पापा हो तो तेंदुलकर जैसे।' सचिन इस मामले में वाकई विरले हैं और कम से कम इस जेनेरेशन को नाज रहेगा कि उन्होंने सचिन के साथ जिया। अब सवाल ये है कि क्या 23 पन्नों की इस यादगार किताब के आखिरी दो पन्ने क्या बाकी 21 पन्नों की तरह हो सकते थे।
पूर्व क्रिकेटर और मशहूर कामेंटेटर रवि शास्त्री ने अगर ये कहा था कि ऊपर वाले ने सचिन को धरती पर सिर्फ क्रिकेट खेलने के लिए भेजा है, तो ऑस्ट्रेलिया के मशहूर क्रिकेट लेखक पीटर रोबक ने कहा है कि सचिन की ड्रीम स्क्रिप्ट को ऊपरवाले ने लिखा, रोबक ने आगे कहा था कि क्या इस स्क्रिप्ट का क्लायमेक्स पूरी स्टोरी के हिसाब से होगा, इस बात को उन्हें इंतेजार रहेगा। रोबक आज इस दुनिया में नहीं हैं, 2011 वर्ल्ड कप के बाद महानायक के करियर की पटकथा किसी केस स्टडी से कम नहीं है। वो लम्हा आज भी सामने आ जाता है जब वर्ल्ड कप 2011 में जीत के बाद मुंबई के बांद्रा कुर्ला कांप्लैक्स में सचिन तेंदुलकर इंटरव्यू के लिए आए। 23 साल के मैराथन करियर में शायद किसी ने सचिन के चेहरे पर संतुष्टी के ऐसे भाव को किसी ने नहीं देखा था। '1983 में कपिल पाजी की टीम को वर्ल्ड कप जीतते देखा था, तभी देश के लिए खेलने की ललक जगी। करियर में काफी कुछ मिला, लेकिन इसकी बराबरी कोई नहीं कर सकता' सचिन के इन शब्दों की गूंज अब भी कल की बात लगती है। वर्ल्ड कप में जीत की खुमारी पूरी तरह से उतरी नहीं थी कि आईपीएल शुरू हो गया। आईपीएल के बीच में खबर आई कि सचिन वेस्टइंडीज में टेस्ट दौरे के लिए नहीं जाना चाहते। सचिन को करीबी से जानने वाला एक क्रिकेटर हैरान थे और उन्होंने कहा कि पूरे करियर में पहली बार ऐसा हुआ है कि वो फिट हैं, लेकिन सफेद कपड़ों में नहीं खेलना चाहते। अगर पुराने सचिन होते, तो आईपीएल छोड़ देते और पूरा फोकस वेस्टइंडीज में टेस्ट सीरीज पर लगाते। आखिर सैंकड़ों का सैंकड़ा इंतजार कर रहा है।
लार्ड्स से लेकर एडिलेड तक सचिन ने पूरी मशक्कत की, लेकिन वो एक सैंकड़े के लिए तरस गए। आखिर सचिन को वनडे का सहारा लेना पड़ा और वो सैंकड़ा एशिया कप में बांग्लादेश के खिलाफ आया और मैच में टीम इंडिया की हार के शक्ल में आया। सचिन को करीबी से जानने वाले इस क्रिकेटर ने दोबारा फोन करके कहा- सचमुच, ऊपर वाले से बड़ा कोई नहीं होता, क्रिकेट इतिहास का महानतम क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर भी नहीं, इस ड्रीम स्क्रिप्ट में फाल्टलाइन मुझे दिखने लगे हैं, रोमेंटिक स्टोरी का ट्रैजिक एंड का डर सताने लगा है। न्यूजीलैंड और इंग्लैंड के बाद ये डर जब हकीकत होती दिख रही थी, तभी सचिन तेंदुलकर ने वनडे क्रिकेट से संन्यास ले लिया। इस मायने में नागपुर टेस्ट मैच से लेकर मुंबई में पाकिस्तान सीरीज के लिए टीम सेलेक्शन के बीच की घटनाक्रम अहम है। 2009 के बाद सचिन तेंदुलकर वनडे सीरीज अपनी फिटनेस को देख अपने हिसाब से खेलते और छोड़ते थे, सेलेक्शन कमेटी सचिन से पूछती थी कि वो अगले वनडे सीरीज में खेलने के लिए तैयार हैं या नहीं। बीसीसीआई और सेलेक्शन कमेटी में सूत्रों की मानें तो इंग्लैंड के खिलाफ नागपुर टेस्ट मैच के बाद सेलेक्शन कमेटी ने सचिन को संपर्क नहीं किया। बीसीसीआई के एक बड़े अधिकारी की मानें तो बोर्ड साफ संकेत देना चाहता था कि वो 2015 वर्ल्ड कप में नहीं खेलेंगे और इस वजह से बेहतर ये होगा कि अगले ढाई साल में किसी युवा क्रिकेटर को एक्सपोजर मिले। इस बीच सचिन पाकिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज खेलने को तैयार थे, इस संदेश को बोर्ड तक पहुंचाया और आखिरकार जब बात समझ में आई तो टीम हित में वनडे से संन्यास का ऐलान कर दिया।
सचिन जैसे विरले क्रिकेटर का एक्जिट फॉर्मूला किसी बोर्ड के लिए आसान नहीं होता, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसे पेशेवर क्रिकेट बोर्ड के लिए भी, बीसीसीआई के लिए तो ये और भी मुश्किल है खासकर जिस तरह से सौरव से लेकर लक्ष्मण के मामले में देखा गया है। दूसरी बात, जो फैसला श्रीकांत एंड टीम को वर्ल्ड कप 2011 के बाद लेना चाहिए था, उस फैसले को संदीप पाटिल की टीम को 2012 के अंत में लेना पड़ा। तीसरी बात और सबसे अहम बात ये है कि अपने एक्जिट का प्लान महान से महान किरदार भी नहीं बना सकते, सचिन जैसे महानायक भी नहीं जिन्होंने पूरे करियर में कम से कम 95 फीसदी सही फैसले लिए। जिस मैदान में हमारी बोलती थी उस मैदान को आखिर क्यों छोड़ जाउं। सचिन ने अपने करियर के आखिरी पन्ने को यादगार बनाने के लिए आखिरी दांव खेला, ऑस्ट्रेलिया और फिर अगर संभव हुआ तो दक्षिण अफ्रीका टेस्ट सीरीज पर फोकस करने का दांव। अगर ये दांव कामयाब हो पाता है, तो अंतिम पन्ने की स्क्रिप्ट को वो बेहतर तरह से छोड़ पाएंगे। 2013 के साल का इस मायने में सचिन और उनसे अधिक उनके साथ के जेनेरेशन को जीने वाले को इंतजार रहेगा।

सचिन का रिकॉर्ड ही सब कुछ कहता है


मौजूदा समय में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज और क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन रमेश तेंदुलकर किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। मास्टर 4लास्टर सचिन तेंदुलकर को अगर चलती-फिरती रिकॉर्ड बुक बोला जाए तो कुछ गलत नहीं होगा। सचिन ने अपने 23 साल के लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर में एक बल्लेबाज के तौर पर लगभग सारे ही रिकॉर्ड अपने नाम कर लिए हैं। सचिन के नाम वनडे और टेस्ट मैचों में सबसे ज्यादा रन और शतक जड़ने का रिकॉर्ड है। टेस्ट क्रिकेट में सचिन अपने शतकों का अर्धशतक भी बना चुके हैं। इतना ही नहीं सचिन एकमात्र ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने वनडे मैचों में दोहरा शतक ठोका है। कभी टेनिस एल्बो तो कभी कमर दर्द से परेशान होकर सचिन को क्रिकेट से दूर भी होना पड़ा है, लेकिन मास्टर 4लास्टर हर मुश्किल परिस्थितियों से निकल कर इस मुकाम पर पहुंचे हैं।
सचिन ने महज 16 साल की उम्र में क्रिकेट में पदार्पण किया। 1989 में इस धुरंधर बल्लेबाज ने पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट मैच से अपना अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का सफर शुरू किया। सचिन 15 रन पर वकार यूनुस की गेंद बोल्ड हो गए। लेकिन सचिन ने जिस तरह पाक के तेज गेंदबाजों का सामना किया वह काबिल-ए-तारीफ था। सियालकोट में हुए फाइनल टेस्ट में सचिन को एक बाउंसर गेंद नाक पर लगी, उनकी नाक से खून निकलने लगा। लेकिन सचिन ने प्राथमिक चिकित्सा नहीं ली और बल्लेबाजी के लिए फिर से तैयार हो गए। आज सचिन को क्रिकेट का भगवान कहा जाता है। हालांकि सचिन ऐसा नहीं मानते हैं। सचिन जितने अच्छे खिलाड़ी हैं उतने ही अच्छे इंसान भी हैं। हालांकि सचिन टीम इंडिया के सफल कप्तान नहीं बन सके। सचिन ने खुद इसको स्वीकार किया और कप्तानी छोड़ दी। जब भी सचिन के खेल की आलोचना हुई है इस बल्लेबाज ने जवाब हमेशा अपने बल्ले से दिया है। सचिन के खौफ का यह आलम था कि दुनिया के महान लेग स्पिनर शेन वार्न ने कहा था कि सचिन उनके सपने में आकर उनकी गेंदों पर शॉट मारते हैं। भारत का कोई ऐसा स6मान नहीं है जिससे इस बल्लेबाज को नवाजा नहीं गया हो। उन्हें राजीव गांधी 2ोल रत्‍‌न और पद्वि5ाूषण से स6मानित किया गया है।
सचिन ने अब तक 463 वनडे मैच 2ोले हैं जिसमें उन्होंने 49 शतक और 96 अर्धशतकों की मदद से कुल 18426 रन बनाए हैं। उनका बल्लेबाजी औसत लग5ाग 46 का है। इनके नाम टेस्ट और वनडे में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड है। इसके साथ ही उन्होंने वनडे में 154 विकेट 5ाी चटकाए हैं।
24 अप्रैल 1973 को मराठा परिवार में पैदा हुए सचिन का नाम उनके पिता के चहेते संगीतकार सचिन देव बर्मन के नाम पर र2ा गया था। उनके बड़े 5ाई अजीत तेंदुलकर ने उन्हें 2ोलने के लिए प्रोत्साहित किया था। उनके एक और 5ाई नितिन तेंदुलकर और बहन सवितई तेंदुलकर हैं। 1995 में उन्होंने पेशे से डॉ1टर और खुद से पांच साल बड़ी अंजलि से शादी की थी। उनके दो बच्चे हैं अर्जुन और सारा।
सचिन ने मुंबई स्थित शारद आश्रम विद्यामंदिर से स्कूल शिक्षा ग्रहण की। वहीं पर उन्होंने कोच रमाकांत अचरेकर के सान्निध्य में अपने क्रिकेट जीवन का आगाज किया। पहले तेज गेंदबाज बनने के लिए उन्होंने एमआरएफ पेस फाउंडेशन के अ5यास कार्यक्रम में शिरकत की। लेकिन वहां गेंदबाज कोच डेनिस लिली ने पूर्ण रूप से अपनी बल्लेबाजी पर ध्यान केंद्रित करने को कहा।शुरुआती क्रिकेट जीवन में सचिन अपने कोच के साथ अ5यास करते थे। उनके कोच स्टंप्स पर एक रुपये का सि1का र2ा देते थे और जो गेंदबाज सचिन को आउट करता उसे वह मिल जाता था। यदि सचिन आउट हुए बिना पूरे समय बल्लेबाजी करने में सफल रहते थे तो ये सिक्का उन्हें मिलता था। उस समय के 13 सि1के सचिन के पास आज 5ाी मौजूद हैं, जो उन्हें बेहद प्रिय हैं।
1988 में एक स्कूली टूर्नामेंट में उन्होंने अपने साथी बल्लेबाज विनोद कांबली के साथ 664 रनों की ऐतिहासिक साझेदारी की थी। इस धमाकेदार जोड़ी के अद्वितीय प्रदर्शन के कारण एक गेंदबाज तो रो ही दिया और विपक्षी टीम ने 2ोलने से इन्कार कर दिया। सचिन ने इस मैच में 320 रन और टूर्नामेंट में एक हजार से 5ाी ज्यादा रन बनाए।
सचिन का क्रिकेट के आलावा दूसरा पक्ष 5ाी है। वह अपनालय नाम के एक एनजीइओ के 200 बच्चों के पालन-पोषण की जि6मेदारी 5ाी उठाते हैं। इसके साथ ही वह अपने ही नाम के एक सफल रेस्टोरेंट के मालिक 5ाी हैं।

आस्ट्रेलिया और श्रीलंका के खिलाफ सबसे ज्यादा सफल रहे सचिन


आस्ट्रेलिया और श्रीलंका के खिलाफ सबसे ज्यादा सफल रहे सचिन
एकदिवसीय क्रिकेट के बेताज बादशाह सचिन तेंदुलकर अपने शानदार वनडे करियर में आस्ट्रेलिया और श्रीलंका जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ सबसे ज्यादा सफल रहे हैं। सचिन ने रविवार को एकदिवसीय क्रिकेट से सन्यास लेने की घोषणा कर दी। 23 वर्षों के अपने शानदार करियर में 463 मैचों में 18426 रन बनाने वाले सचिन का औसत 44.83 रहा है और उन्होंने विश्व रिकार्ड 49 शतक तथा 96 अद्र्धशतक बनाए हैं।

अपने करियर में वह आस्ट्रेलिया तथा श्रीलंका के खिलाफ सबसे ज्यादा सफल रहे। अपने पहले वनडे में खाता नहीं खोल पाए सचिन ने एकदिवसीय क्रिकेट में रिकार्डों के इतने अंबार लगाए जिन्हें गिन पाना मुश्किल है। सचिन ने आस्ट्रेलिया और श्रीलंका के खिलाफ वनडे में 3000 से ज्यादा रन बनाए हैं। उन्होंने आस्ट्रेलिया के खिलाफ 71 मैचों में 3077 रन और श्रीलंका के खिलाफ 84 मैचों में 3113 रन बनाए हैं।

सचिन ने इसके अलावा पाकिस्तान के खिलाफ 69 मैचों में 2526 रन, दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 57 मैचों में 2001 रन, न्यूजीलैंड के खिलाफ 42 मैचों में 1750 रन, वेस्टइंडीज के विरद्ध 39 मैचों में 1573 रन, इंग्लैंड के खिलाफ 37 मैचों में 1455 रन और जिम्बाब्वे के खिलाफ 34 मैचों में 1377 रन बनाए हैं।

सचिन की रिकॉर्ड बादशाहत

<b>वनडे में भी सचिन की रिकॉर्ड बादशाहत</b>
क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने रविवार को एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया। 23 साल के अपने करियर में सचिन ने 463 वनडे मैच खेले और 44.83 की औसत से 18426 रन बनाए। 

इस महान खिलाड़ी ने अपने खेल से क्रिकेट को नई बुलंदियों पर तो पहुंचाया ही, साथ ही रिकॉर्ड की ऐसी फेहरिस्त बनाई जिसे हासिल करना प्रत्येक क्रिकेट खिलाड़ी का सपना हो सकता है। सचिन के रिकॉर्डों की सूची बहुत लंबी है। सचिन को यदि रिकॉर्डों का पर्याय कहा जाए तो वह अनुचित नहीं होगा। उनके वनडे करियर की महत्वपूर्ण उपलब्धियां कुछ इस प्रकार हैं- 

  • -अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शतकों का शतक बनाने वाले पहले खिलाड़ी।
  • -वनडे में दोहरा शतक जड़ने वाले पहले खिलाड़ी 
  • -वनडे मुकाबले में सबसे ज्यादा 49 शतक
  • -वनडे मुक़ाबले में सबसे ज्यादा मैन आफ् द सीरीज
  • -वनडे में सबसे ज्यादा मैन आफ् द मैच
  • -एकदिवसीय मैंचों में सर्वाधिक बार 90 रन से ऊपर आउट 
  • -वन डे में 1000 रन बनाने वाले पहले खिलाड़ी
  • -विश्व कप में सर्वाधिक रन बनाने का रिकार्ड
  • -विश्व कप में सर्वाधिक मैन आफ द मैच का खिताब
  • -2003 के विश्वकप में सर्वाधिक 673 रन 
  • -2003 के विश्वकप में मैन आफ द टूर्नामेंट का खिताब
  • -आईसीसी की टॉप 10 की रैंकिंग में 10 वर्षों तक कायम रहने वाले पहले खिलाड़ी
  • -राजीव गांधी खेल रत्न पाने वाले पहले एवं एकमात्र क्रिकेटर
  • -एक कैलेंडर वर्ष में वनडे में 1894 रन बनाने का रिकॉर्ड
  • -आस्ट्रेलिया के खिलाफ सर्वाधिक मैन आफ द मैच का खिताब
  • -सौरव गांगुली के साथ 128 मैचों में सर्वाधिक 6271 रनों का ओपनिंग रिकार्ड
  • -1999 के विश्वकप में राहुल द्रविड़ के साथ 331 रनों की सर्वाधिक साझेदारी का रिकॉर्ड
  • -छह बार 200 रन की साझेदारी निभाने का रिकॉर्ड 
  • -क्रिकेट खेलने वाले करीब सभी देशों के खिलाफ वनडे में 1000 रन का रिकार्ड
  • -तेंदुलकर 15000 रन बनाने के साथ 150 से ज्यादा विकेट लेने वाले पहले खिलाड़ी।

Aye Mere Watan ke logon Jara aankh men Bhar lo paani...


ए मेरे वतन के लोगों जरा आँख में भर लो पानी...

जी हाँ आज आस्ट्रेलिया के साथ पहले टेस्ट मैच, 20 -20 और अब एकदिवसीय मैच में जो  इंडिया टीम की दुर्गति हो रही है... उसे देखते हुए ... निचे दिए गए फोटो देखकर अश्चार्ज होता है... की यही वो टीम है... जो 8  माह पहले विश्व कप जीती थी....

DAY, APRIL 4, 2011

India wins ICC World Cup 2011 Final - Celebration photos

The World Champions - Indian Cricket Team


World Cup 2011 Final moment


Dhoni and Tendulkar - Moment of Joy


Yuvraj Singh celebrates win over Srilanka in World Cup 2011 final at Wankhede Stadium



Yuvraj with Gary Kirsten, coach of India



Sachin Tendulkar is chaired on a lap of honor after India's victory over Sri Lanka in the ICC World Cup 2011 Final


Team India celebrates World Cup 2011 win


Team India celebrates World Cup 2011 win


Team India celebrates World Cup 2011 win


Zaheer Khan with World Cup Trophy


Sachin with Son Arjun and Daughter sara


Sachin and Gambhir with World Cup Trophy



Coach of India,  Gary Kirsten in air


Sachin with fan


World cup 2011 India team


World cup final 2011 pictures


World cup final 2011 India team picture


World Cup Final India vs Sri Lanka. MS Dhoni guides the historical chase

जब सभी क्रिकेटर रो पड़े

एक बार जब कैप्टन कूल महेंद्र सिंह धौनी से जब पूछा गया कि वह विपरीत से विपरीत परिस्थिति में भी इतने कूल कैसे बने रहते हैं, तो उनका जवाब था, दवाब को चेहरे पर झलकने नहीं देता, वह दिमाग में कैद रहता है, इसीलिए मेरे सिर के बाल असमय सफेद हो चले हैं..। लेकिन यह क्या भावनाओं पर काबू करने वाले धौनी रो दिए?

जी हां, भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान इस साल अप्रैल में भारत के विश्व कप जीतने के बाद इतने भावुक हो गए थे कि वह खिताबी मुकाबले के बाद अपने साथी खिलाड़ियों के साथ रो पड़े थे। यह बात उन्होंने खुद बताई। 'सीएनएन आइबीएन स्पो‌र्ट्स पर्सन ऑफ द ईयर' बने धौनी ने समारोह के दौरान एक वीडियो संदेश के जरिए कहा, 'मैच खत्म होने के बाद सभी खिलाड़ी रोए थे। मैं भी रोया था, हालाकि इसका कोई भी फुटेज उपलब्ध नहीं है। भावनाओं पर नियंत्रण करना काफी मुश्किल था क्योंकि हम सभी विश्व कप जीतने का सपना देख रहे थे।' ऑस्ट्रेलिया पहुंच चुके धौनी ने वीडियो रिकॉर्डेड संदेश में कहा, 'मैं रो रहा था और जब मैंने ऊपर देखा तो सभी खिलाड़ी मुझे घेरकर खड़े हो गए। मैं ड्रेसिंग रूम की ओर दौड़ गया और वहा मैंने देखा दो खिलाड़ी रोते हुए मेरी तरफ दौड़ रहे हैं। मैं उन्हें देखकर और रो पड़ा। भावनाओं पर काबू करना मुश्किल था।'

Waiting for Sachin's ton 100

तेंदुलकर ने टेस्ट में 15000  रनके जादुई आकड़े को पार किया
इंतजार सचिन की 100वी सेंचुरी की




आज सबकी निगाहें तेंदुलकर पर रहेगी.... तीसरे दिन का खेल ख़त्म होने के समय तेंदुलकर 87  बाल खेलकर 33  रन बनाकर नाबाद पवेलियन लौटे हैं... आज उनके और पुरे विश्व के क्रिकेट प्रेमियों को उनके सौवें सेंचुरी का इंतजार रहेगा... आशा है जिस तरह से उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 15005  रन का जादुई आंकड़ा पर किया है उसी तरह आज सौवीं सेंचुरी पूराकर देश को एक अनमोल तोहफा और यादगार लम्हा भेंट करेंगे.. 

सचिन तेंडुलकर की सौवीं सेंचुरी के साक्षात दर्शन करने की हरेक क्रिकेट प्रेमी की इच्छा होगी , ऐसा समझा जा रहा था। लेकिन वेस्ट इंडीज के खिलाफ फिरोजशाह कोटला पर शुरू हुए सीरीज के पहले टेस्ट के दुसरे दिन करीब नौ हजार दर्शक ही पहुंचे। करीब 42,000 दर्शकों की क्षमता वाले स्टेडियम मेंयह उपस्थिति काफी कम लग रही थी। जाहिर है भारत में इंग्लैंड के खिलाफ पिछले महीने खत्म हुई वन डे सीरीज में भी दर्शकों की रुचि कम ही रही थी। अब टेस्ट मैच में संडे के दिन यह हाल देखने से निश्चित रूप से बीसीसीआई को मैदान पर दर्शकों को खींचने के लिए कोई योजना बनानी होगी। बहरहाल, अब यह देखना बाकी है कि जब सचिन कल १०० सेंचुरी के लिए अग्रसर हो रहे होंगे, तो कितने लोग कोटला पहुंचे हैं। वैसे तो दर्शकों को आज ही उनके सेचुरी की बुनियाद की नीव देखने को मिल गई है... (33  नॉटआउट). और खेल में अभी 2 दिन बाकि है...

सचिन का क्रेज बरकरार :
कोटला पर भले ही दर्शकों की मौजूदगी कम थी। लेकिन तेंडुलकर का क्रेज उनमें अब भी बरकरार है। सचिन जब भी बाउंड्री के आसपास फील्डिंग करने आते थे, तो दर्शक सचिन-सचिन चिल्लाकर उनके करीब वाले एरिया की तरफ दौड़ पड़ते थे। जाहिर है कि अपनी सौवीं टेस्ट सेंचुरी से महज एक कदम दूरखड़े सचिन का जादू अब भी बरकरार है। खुद 'मास्टर ब्लास्टर' भी बीच-बीच में दर्शकों की तरफ हाथ हिलाकर उनका अभिवादन स्वीकार कर रहे थे।

बच्चों की पढ़ाई का ध्यान मेरी पत्नी रखती हैं : सचिन

मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने कहा है कि हालांकि वे अपने पुत्र को क्रिकेट खेलने के गुर सिखाते हैं और बेटी को टेनिस के बारे में भी कुछ समझा सकते है पर दोनों की पढ़ाई का ख्याल रखने की जिम्मेदारी उनकी पत्नी अंजली पर है।

रविवार को स्कूली बच्चों के साथ कोका कोला और एनडीटीवी द्वारा चलाए जा रहे एक संयुक्त अभियान के दौरान वीडियो क्रांफ्रेंस के दौरान सचिन ने कहा कि उन्हें अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए समय ही नहीं मिलता है। जब एक विद्यार्थी ने उन से यह पूछा कि वे अभी तक कैसे खेल पाते है तो उन्होने जवाब दिया बूस्ट इज द सीक्रेट ऑफ माय एनर्जी।

सचिन ने कहा कि उन का क्रिकेट के प्रति जूनून बचपन से ही था और इसलिए वे कभी भी इस खेल से थकते नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वे भविष्य में भी खेलते रहेंगे क्योंकि वे क्रिकेट के प्रति सर्मपित है और जब कोई किसी चीज के प्रति सर्मपित होता है तो वह उस से थकता नहीं हैं।
sachin tendulkar family photos

स्ट्रेट ड्राइव मेरा पसंदीदा शॉट है : तेंदुलकर

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भारतीय स्टार बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने कहा कि उनका पंसदीदा स्ट्रोक स्ट्रेट ड्राइव से गेंद को बाउंड्री तक पहुंचाना है। तेंदुलकर ने एनडीटीवी के एक विशेष कार्यक्रम में एक क्रिकेट प्रशंसक के सवाल के जवाब में कहा कि मेरा पसंदीदा शॉट स्ट्रेट ड्राइव है जो सीधे बल्ले से खेला जाता है, लेकिन कोई भी गेंदबाज बल्लेबाज का सीधा बल्ला नहीं देखना चाहता।

हाल में समाप्त हुई इंग्लैंड सीरीज में स्कोर नहीं बना पाने और शॉट चयन के बारे में पूछे गए सवालों के बारे में उन्होंने कहा कि वह दबाव कम करने के लिए अखबार नहीं पढ़ते। तेंदुलकर ने दबाव से निपटने के संबंध में पूछे गए सवाल के बारे में कहा कि लाखों लोग जो कहते हैं, मैं वैसा नहीं कर सकता क्योंकि खिलाड़ी को हमेशा अपने खेल पर ध्यान लगाना चाहिए क्योंकि सिर्फ खिलाड़ी को ही यह सब करना है।

उन्होंने बच्चों को सलाह देते हुए कहा कि उन्हें बीते समय के बारे में नहीं सोचना चाहिए। उन्होंने साथ ही अपने सपोर्ट माई स्कूल कैंपेन (मेरे स्कूल की मदद अभियान) में सभी से योगदान करने की अपील की। तेंदुलकर ने कहा कि अगर आप बीते समय के बारे में सोचोगे तो आप नकारात्मक ही सोचोगे। अगर आप भविष्य के बारे में सोचते हो तो आप चिंता करोगे कि आप स्कोर बना सकोगे कि नहीं। सिर्फ अपने काम पर ध्यान लगाना चाहिए।

यह पूछने पर कि वह हाल में समाप्त हुई भारत-इंग्लैंड टेस्ट सीरीज में स्कोर क्यों नहीं कर सके तो उन्होंने कहा कि पूरे खेल को पूर्ण रूप से देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कभी बल्लेबाज अच्छी गेंद पर आउट हो जाता है तो कभी गलती से आउट हो जाता है।

SACHIN AND DHYANCHAND

सचिन और दद्दा दोनों ही 'भारत रत्न' के हकदार
भारत में खेल के दो अनमोल रत्न हैं : दद्दा ध्यानचंद और सचिन तेंडुलकर ध्यान चंद दुनिया में हॉकी के पर्याय हैं तो सचिन तेंडुलकर ने क्रिकेट में ऐसे शिखर चूमे हैं, जिन पर भारत नाज कर सकता है। सोमवार को हॉकी के 'जादूगर' का जन्मदिन है। खिलाड़ियों को भी भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' देने की मांग उठ रही है। इस बाबत सरकार भी शिद्दत से सोच रही है। बहस इस बात को लेकर है सबसे पहले यह सम्मान किसे दिया जाए। भारत के हॉकी और क्रिकेट दिग्गजों से इस सवाल का जवाब तलाशने की कोशिश की तो वे दोनों को इसका हकदार मानते हैं, लेकिन इसकी शुरुआत ध्यान चंद से करने के पक्ष में लगे। इन सभी का मानना है दद्दा के बाद यह अवार्ड सचिन तेंडुलकर को दिया जाए।

दद्दा के मंझले बेटे अशोक कुमार सिंह कहते हैं, 'दद्दा दुनिया में हॉकी का पर्याय हैं और रहेंगे। हॉकी में जो बुलंदियां दद्दा ने चूमीं, उसे दुनिया में कोई दूसरा नहीं चूम पाया। उनके जन्म दिन 29 अगस्त को सरकार ने 1995-96 में राष्ट्रीय खेल दिवस घोषित किया। ध्यानचंद के नाम ओलिंपिक में तीन गोल्ड मेडल हैं, जबकि तेंडुलकर के नाम केवल एक वर्ल्ड कप है। भारत में यदि किसी खिलाड़ी को 'भारत रत्न' देने की शुरुआत होती है तो यह ध्यानचंद से होनी चाहिए।'
BHARAT RATNA : RAJESH MISHRA
भारत के पूर्व कप्तान जफर इकबाल की राय है, 'ध्यानचंद ने आजादी से पहले भारत को ओलिंपिक में तीन गोल्ड जिताने में अहम रोल अदा किया है। इसमें कोई दो राय नहीं हो सकती कि खेलों में यदि किसी खिलाड़ी को भारत रत्न दिया जाए तो सबसे पहले इसके हकदार ध्यानचंद हैं।

ओलिंपियन जगबीर सिंह कहते हैं, 'भारतीय हॉकी दुनिया में दद्दा ध्यानचंद के नाम से ही जिंदा है। मेरी नजर में ध्यानचंद और तेंडुलकर दोनों ही बतौर खिलाड़ी इसके हकदार हैं। लेकिन यदि सरकार अवार्ड देने की शुरुआत करती है तो यह ध्यानचंद से ही होनी चाहिए।

सचिन के समकालीन रहे ओलिंपियन धनराज पिल्लै कहते हैं, 'मेरी राय में ध्यानचंद और सचिन दोनों की भारत रत्न के हकदार हैं। दोनों ने खेलों में देश का दुनिया में गौरव बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। दोनों ने खेल के लिए बहुत कुछ त्याग किया। फिर भी मैं यह कहूंगा कि सबसे पहले कोई हकदार है तो वह हैं ध्यानचंद।'

भारत के महान स्पिनर बिशन सिंह बेदी ने कहा, 'मेरा मानना है कि शुरुआत दद्दा ध्यान चंद से ही होनी चाहिए। सचिन की बारी तो आ ही जाएगी। मेरा मानना है कि दद्दा के नाम पर तो खुद सचिन को भी ऐतराज नहीं होगा। बलबीर सिंह सीनियर भी इसके हकदार हैं।'

ऑलराउंडर मदन लाल ने कहा, 'ध्यानचंद और सचिन दोनों ही भारत के महान खिलाड़ी हैं। दोनों का योगदान बेमिसाल है। फिर भी मैं यही कहूंगा कि सबसे पहले यह सम्मान ध्यानचंद जी को ही मिलना चाहिए।'

भारत के पूर्व लेफ्ट आर्म स्पिनर मनिंदर सिंह ने कहा, 'मैंने ध्यानचंद के बारे में केवल सुना है। इस लिहाज से मेरा उनकी बाबत टिप्पणी करना वाजिब नहीं होगा। मैंने सचिन को खेलते देखा है और मेरी राय में भारत रत्न के पहले हकदार वही हैं।
RAJESH MISHRA

22 VISHWA RICARDON KE BADSHAH "SACHIN TENDULKAR"

MASTER BLASTER SACHIN TENDULKAR
22 विश्व रिकॉर्डों के बादशाह सचिन तेंदुलकर

राजेश मिश्रा


अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में कीर्तिमानों के अंबार लगाने वाले अनुभवी बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर इस खेल में दो चार नहीं बल्कि 22 विश्व रिकॉर्डों के बेताज बादशाह हैं।

राजेश मिश्रा, कोलकाता, प. बंगाल

सचिन ने हाल में कोलंबो में समाप्त हुई त्रिकोणीय श्रृंखला के फाइनल में भारत को खिताबी जीत दिलाने में अपना 44वां एकदिवसीय शतक लगाया था जिसके बाद स्वाभाविक रूप से यह सवाल उठता है कि सचिन के नाम अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में कितने विश्व रिकॉर्ड हैं। सचिन के 19 वर्ष की क्रिकेट महागाथा के ये विश्व रिकॉर्ड इस प्रकार हैं-

टेस्ट क्रिकेट- सर्वाधिक रन- 12473, सर्वाधिक शतक- 42, सर्वाधिक 50 के स्कोर- 95 (42 शतक और 53 अर्धशतक) सर्वाधिक चौके- 1676

एकदिवसीय क्रिकेट- सर्वाधिक रन - 16895, सर्वाधिक शतक- 44, सर्वाधिक 50 के स्कोर 135 (44 शतक और 91 अर्धशतक)

एक कैलेंडर वर्ष में सर्वाधिक रन- 1894 रन (1998 में), एक कैलेंडर वर्ष में सर्वाधिक शतक- नौ शतक (1998 में)

एक विश्वकप में सर्वाधिक रन- 673 रन (2003 के विश्वकप में)

एक टीम के खिलाफ सर्वाधिक शतक- ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका के खिलाफ आठ-आठ शतक

सर्वाधिक नाइटीज- 17, सर्वाधिक 99- तीन बार, सर्वाधिक चौके- 1839, सर्वाधिक लगातार मैच- 185 (25 अप्रैल 1990 से 24 अप्रैल 1998 तक)

सर्वाधिक मैन ऑफ द मैच- 59, सर्वाधिक प्लेयर ऑफ द सीरीज- 14 (टेस्ट, एकदिवसीय और 20-20),

सर्वाधिक मैच- 588, सर्वाधिक रन- 29678, सर्वाधिक शतक- 86, सर्वाधिक 50 के स्कोर- 230, सर्वाधिक चौके- 3517 ।



सचिन तेंदुलकर को अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट खेलते हुए 20 साल हो चुके हैं लेकिन इतने लंबे रिश्ते के बावजूद इस खेल से उनकी मोहब्बत कम होने के बजाय लगातार बढ़ती ही जा रही है।

सचिन का इस खेल से लगाव करीब ढाई दशक पुराना है। लेकिन वक्त की सलवटें भी उन्हें इस प्यारी चीज से दूर नहीं कर पायी हैं। स्थिति तो यह हो गयी है कि सचिन की क्रिकेट के साथ चल रही मोहब्बत लगातार परवान चढ़ती जा रही है।

रिकॉर्डों के बादशाह सचिन का सिर्फ क्रिकेट में नहीं बल्कि इसके अलावा उनके कुछ अनोखे कारनामे भी हैं। जैसे कि लंदन में मोम की प्रतिमा बनाने वाली मैडम टुसॉड्स म्यूजियम ने क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर की मोम प्रतिमा बनाई। सचिन की ये प्रतिमा मैडम टुसॉड्स म्यूजियम के खेल विभाग में रखी गई है जहां खेल जगत की कई महान हस्तियां जैसे मोहम्मद अली, डेविड बेकहम, टाइगर वुड्स और शेन वॉर्न पहले से ही मौजूद हैं।

सचिन न सिर्फ क्रिकेट जगत में रिकॉर्डों के बेतजाज बादशाह हैं, बल्कि वे अभी भी अपने साथी क्रिकेटरों की अपेक्षा सर्वाधिक टैक्स देने वाले खिलाड़ी हैं।

सचिन सिर्फ क्रिकेट खेलते ही नहीं हैं बल्कि इसके भविष्य को लेकर भी चिंतित हैं। ट्वेंटी-20 के आगमन से एकदिवसीय के अस्तित्व पर मंडरा रहे गंभीर खतरे पर सचिन ने 50 ओवर के प्रारूप को बचाने के लिए इसे 25-25 ओवरों की चार पारियों में बांटने का सुझाव दिया। सचिन के इस विचार को क्रिकेट जगत ने स्वागत किया है। अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) जहां सचिन के इस सुझाव से सहमत हुई है वहीं पूर्व भारतीय क्रिकेटर कपिल देव ने इसे बकवास बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया।

सचिन की महानता यह भी है कि वे अपने साथी खिलाड़ियों को भी क्रिकेट के गुर सीखाते रहते हैं। हाल ही में एनसीए में आयोजित अभ्यास शिविर के दौर भारतीय बल्लेबाज सुरेश रैना को शॉर्टपिच गेंदें को खेलने में हो रही परेशानी से उबरने के उपाय बताए।

सचिन सिर्फ भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों को ही नहीं बल्कि विदेशी खिलाड़ियों को भी नुस्खे देते रहते हैं। कुछ दिनों पहले ऑस्ट्रेलिया के युवा सलामी बल्लेबाज फिलिप ह्यूज को टिप्स दिए।

Sachin Ka Cricket IPL -4 me Dhamaka

सचिन तेन्दुलकर का धमाका : ट्वेन्टी-२० में मारी सेन्चुरी

सचिन तेंदुलकर ने ट्वेन्टी-२० में भी आज सेन्चुरी (नॉटआउट 100) ठोक दी. सचिन ने 66 गेंदों पर 12 चौके और 3 छक्के लगाए, जबकि रायडू ने 33 गेंदों पर चार छक्के और तीन चौके जड़े। इससे पहले सचिन का सर्वश्रेष्ठ व्यक्तिगत योग 89 (नॉटआउट) था। 

टेस्ट मैचों में 51 सेंचुरी और वनडे मैचों में 49 शतक लगा चुके सचिन आईपीएल में शतक पूरा करने वाले पांचवें भारतीय बन गए हैं। उनसे पहले इस सीजन में मुरली विजय, मनीष पांडेय, यूसुफ पठान और पॉल वाल्थाती ने शतक लगाए हैं।

सचिन अपनी इस 100 रनों की पारी के साथ आईपीएल के इस सत्र में सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज बन गए हैं। सचिन ने सर्वाधिक रन बनाने की दौड़ में कोलकाता नाइट राइर्ड्स के जैक्स कालिस (187) को पीछे छोड़ते हुए ऑरेंज कैप अपने नाम किया।