तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे भाषा के विशेषज्ञ पढ़कर कहें कि ये कलम का छोटा सिपाही ऐसा है तो भीष्म साहनी, प्रेमचंद, महादेवी वर्मा, जयशंकर प्रसाद, सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला', हरिवंश राय बच्चन, फणीश्वर नाथ रेणु आदि कैसे रहे होंगे... गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.

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बिस्कुट में गाय और सूअर का मांस


विदेशी कंपनी के बिस्कुट में गाय और सूअर का मांस

तरुण जैन
रेवाड़ी शहर व गांवों में बिक रहे गाय के मांस युक्त बिस्कुट के पैकेट।
 बिस्कुट में गाय का मांस होने की बात आज तक किसी ने नहीं सुनी थी। यदि आप और आपके बच्चे बिस्कुट खाने के शौकीन हैं तो सावधान हो जाइए। हो सकता है कि आप शाकाहारी बिस्कुट के नाम पर गाय का मांस भी खा रहे हों। यह काम किया है स्विट्ज़रलेंड की एक बिस्कुट विक्रेता कम्पनी ने। उसने निर्मित बिस्कुटों में 20 प्रतिशत गौ मांस मिला कर इसकी आपूर्ति पूरे भारत में की है। इतना ही नहीं इन में सूअर का मांस भी मिलाया गया है। ये बिस्कुट प्रदेश, शहर रेवाड़ी के साथ-साथ गांवों में भी  धड़ल्ले से बिक रहे हैं। विक्रेता व उपभोक्ताओं को भी इस बात का पता  ही नहीं है कि वे मांसाहारी बिस्कुट बेच व खा रहे हैं। इस गोमांस के मामले की भनक जैसे ही हिन्दू संगठनों को मिली तो उनमें उबाल आ गया और उन्होंने सड़कों पर उतरने की धमकी दे डाली है।
इस सारे मामले का पता उस समय लगा, जब एक  जागरूक नागरिक अशोक कुमार ने अपने गांव लिसान रेवाड़ी की एक दुकान से इस बिस्कुट का पैकेट एक रुपए में खरीदा। विदेशी कम्पनी का पैकेट होने के कारण उन्होंने जब उसके कन्टेंट्स   को पढ़ा तो वह दंग रह गया। उसमें साफ लिखा था कि बिस्कुट में ‘बीफÓ यानी गाय का मांस और  ‘हैमÓ यानी सूअर का मांस है।  हैरानी की बात यह है कि इस पैकेट पर भारतीय मानकों के अनुसार मांसाहारी व शाकाहारी के लिये अंकित किए जाने वाले लाल व हरे रंग कोई भी चिन्ह नहीं है, जबकि भारत  में मांसाहारी वस्तुओं के पैकेट पर लाल चिन्ह बना होता है।
अशोक कुमार ने तुरंत इसकी सूचना  इस संवाददाता को दी और बताया कि किस तरह विदेशी कम्पनी हिन्दू मतावलम्बियों का धर्म भ्रष्ट कर रही हैं। उन्होंने सरकार व प्रशासन से मांग की है कि ऐसे बिस्कुटों की खेप को तुरंत बाजारों से जब्त किया जाए।
उधर इस बात का पता जैसे ही हिन्दू संगठनों व राजनीतिक दलों के नेताओं को लगा तो उनमें रोष उत्पन्न हो गया। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष कृष्णपाल गुर्जर ने फोन पर इसकी कटु निंदा करते हुए कहा है कि इस तरह के बिस्कुट हरियाणा में बिल्कुल नहीं बिकने दिए जाएंगे। उनकी पार्टी हर स्तर पर इसका विरोध व आंदोलन करेगी। उन्होंने इन बिस्कुटों को बाजार से तुरंत जब्त करने की मांग की।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रदेश कार्यवाह प्रो. डीपी भाद्वाज ने कहा कि विदेशी कम्पनियां भारतीय संस्कृति व धर्म को नष्ट करने का पूरा प्रयास कर रही है। विदेशों से गाय मांस से बने बिस्कुट भारत में आ रहे हैं और भारत सरकार को इसकी खबर तक नहीं हो, ऐसा नहीं हो सकता है। इसका डट कर विरोध किया जाएगा और ऐसे बिस्कुटों की होली जला कर हिन्दू समाज को जागृत किया जाएगा। भारतीय शिव सेना के प्रदेश प्रभारी दीपक गोयल ने कहा कि यह सब विदेशी शक्तियों से साजबाज होकर किया जा रहा है।  उन्होंने इस विदेशी कम्पनी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग भी की।  वीर सावरकर विचार मंच के संस्थापक श्रीनिवास शर्मा शास्त्री ने मांग की कि इस बात की राष्ट्रीय व उच्च स्तर पर जांच होनी चाहिए।

Tribal Women dance Two video!

आदिवासी महिलाओं को नचाने के दो और वीडियो!
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अंडमान के आदिवासियों के शोषण का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा कि ऐसे दो और वीडियो सामने आ गए हैं। इन वीडियो में आदिवासियों को विदेशी सैलानियों के सामने नचाने में स्‍थानीय पुलिसवालों की कथित तौर पर मिलीभगत सामने आ गई है।वीडियो को देखकर कहा जा सकता है कि कथित तौर पुलिस ने उन विदेशी सैलानियों की मदद की जो कुछ पैसों और खाना का लालच देकर आदिवासियों को अर्धनग्‍न अवस्‍था में नाचने पर मजबूर करते हैं। वीडियो में एक पुलिसवाला दिखाई देता है जो नाच रही आदिवासी महिलाओं के सामने आराम से बैठा है। ब्रिटिश अखबार ‘ऑब्‍जर्वर’ ने दावा किया है कि उसके पास ऐसे दो नए वीडियो हैं। अखबार ने जब इससे पहले (रिलेटेड लिंक पर क्लिक करें) खबर दी थी तो काफी हो हल्‍ला मचा था। लेकिन अब माना जा रहा है कि ये वीडियो इस मामले में कथित तौर पर सुरक्षाकर्मियों के लिप्त होने के ताज़ा सबूत हैं। अखबार के एक पत्रकार को हासिल हुआ पहला वीडियो तीन मिनट 19 सेकेंड का है और एक मोबाइल फोन के जरिए लिया गया है।इस वीडियो में जारवा युवतियों को कथित तौर पर पुलिस अधिकारियों के सामने नाचते हुए दिखाया गया है। इस वीडियो में सुरक्षाकर्मियों की कुछ टिप्पणियां भी स्‍क्रीन पर दिखती हैं। पहली बार वीडियो जारी होने के समय अंडमान निकोबार प्रशासन ने दावा किया था वीडियो में जिस व्यक्ति ने जारवा महिलाओं को डांस करने के लिए कहा है, वह पुलिस वाला नहीं है।अंडमान-निकोबार प्रशासन ने दोषियों के खिलाफ कड़ा कदम उठाने की बात कहने की बजाय उन टीवी चैनलों को नोटिस देने का फैसला किया, जिन्होंने आदिवासी महिलाओं को डांस करते हुए दिखाया। प्रशासन ने उस वक्‍त दावा किया था वीडियो में जिस व्यक्ति ने जरवा महिलाओं को डांस करने के लिए कहा है, वह पुलिस वाला नहीं है।
लालच देकर यूं कराया जाता है इंसानियत का नंगा नाच!


उन्हें देखने रोज हजारों पर्यटक पहुंचते हैं। उन्हें नाचने को कहा जाता है। उन्हें उनके पहनावे के लिए चिढ़ाया जाता है। उनके ऊपर खाने-पीने की चीजें फेंकी जाती हैं।...पर ये बेहद शर्मनाक है। क्योंकि वे जानवर नहीं हैं। हमारी-आपकी तरह ही वे भी इंसान हैं। ये दर्द है अंडमान द्वीप के जंगलों में रहने वाली आदिवासी जनजाति ‘जरावा’ के लोगों का।

वे पर्यटकों की भाषा नहीं समझते। और न चाहते हुए भी हर दिन तमाशा बने रहते हैं। टूर ऑपरेटर मात्र करीब 25,000 रुपए प्रति वाहन की दर पर इस जनजाति को किसी चिड़ियाघर की तरह दिखाने ले जाते हैं। इस गैरकानूनी कमाई का एक हिस्सा स्थानीय पुलिस को भी जाता है।

कानून की उड़ रही धज्जियां

सरकारी आंकड़ों में जरावा जनजाति के लोगों की संख्या करीब 403 है। सरकार ने इनसे दूर रहने के सख्त नियम बना रखे हैं। इनके क्षेत्र में सरकार ने इनसे दूर रहने व खाने-पीने की चीजें नहीं देने जैसे बोर्ड भी लगा रखे हैं। लेकिन टूर ऑपरेटरों और पुलिस की मिलीभगत से इन्हें जानवरों की तरह दिखाने का खेल खुलेआम चल रहा है और कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

ये है जरावा जनजाति

: 1990 में ये पहली बार बाहरी दुनिया के संपर्क में आए।
: ये जंगलों में रहने वाली आदिवासी प्रजाति है।
: ये अंडमान द्वीप के हिंद महासागर से लगते उत्तरी छोर पर रहते हैं।
: पुरुष व महिलाएं सिर्फ निचले धड़ पर पत्ते या कपड़े के छोटे टुकड़े पहनते हैं।



STOP SMOKING PLS


मौत के आगोश में लिपटा एक कश जिंदगी का


देवानंद की एक फिल्म बरसों पहले आई थी, जिसमें वे गाते हुए कहते हैं '' हर फिक्र को धुएँ में उड़ाता चला गया। '' वह समय ऐसा था, जब हर फिक्र को धुएँ में उड़ाया जा सकता था, पर अब ऐसी स्थिति नहीं है, अब तो लोग इससे भी आगे बढ़कर न जाने किस-किस तरह के नशे का सेवन करने लगे हैं। हमारे समाज में पुरुषयदि धूम्रपान करे, तो उसे आजकल बुरा नहीं माना जाता, किंतु यदि महिलाओं के होठों पर सुलगती सिगरेट देखें, तो एक बार लगता है कि ये क्या हो रहा है। पर सच यही है कि पूरे विश्व में धूम्रपान से हर साल करीब 50 लाख मौतें होती हैं, उसमें से 8 से 9 लाख लोग भारतीय होते हैं। इसके बाद भी हमारे देश में धूम्रपान करने वाली महिलाओं की संख्या में लगातर वृद्धि हो रही है। वे भी अब हर फिक्र को धुएँ में उड़ा रही हैं।
हमारे देश के महानगरों में चलने वाले कॉल सेंटर के बाहर रात का नजारा देखा है कभी आपने? न देखा हो, तो एक बार जरूर कोशिश करें। वहाँ आपको देखने को मिलेगा, मुँह से धुएँ के छलले निकालती युवतियाँ। ऐसा सभी कॉल सेंटर्स में दिखाई देगा। जिन्होंने यह दृश्य पहले कभी नहीं देखा है, उनके लिए यह अचरच भरा हो सकता है, पर आजकल यह सामान्य बनता जा रहा है कि युवतियाँ लड़खड़ाते कदमों से अस्त-व्यस्त हालत में कुछ न कुछ बड़बड़ाते हुए इधर-उधर भटकती रहती हैं। इधर कुछ वर्षों से यह देखने में आ रहा है कि केवल कॉल सेंटर्स में ही नहीं, बल्कि कार्यालयों में ऊँचा पद सँभालने वाली महिलाओं, क्लब-पार्टी में युवतियों के मुँह से निकलने वाले धुएँ के छलले अब आम होने लगे हैं। यह उनके लिए स्टाइल स्टेटमेंट बन गया है। इसके पीछे होने को तो बहुत से कारण हो सकते हैं, पर सबसे उभरकर आने वाला कारण है काम का दबाव। आपाधापी और प्रतिस्पर्धा के इस युग में आजकल महिलाओं पर भी काम का दबाव बढ़ गया है। घर और ऑफिस दोनों जिम्मेदारी निभाते हुए वह इतनी थक जाती है कि उसे शरीर को ऊर्जावान बनाने के लिए वह न चाहते हुए भी धूम्रपान का सहारा लेने लगी है। महिलाओं द्वारा धूम्रपान कोई आज की बात नहीं है। भारत के सुदूर ग्रामों में आज भी मजदूरी करने वाली महिलाएँ बीड़ी पीते हुए देखी जा सकती हैं। कई स्थानों पर पुरुषों की तरह शारीरिक परिश्रम करते हुए काम के बीच कुछ पल का समय निकालकर बीड़ी का कश ले लेती हैं। कुछ विशेषसम्प्रदाय की महिलाओं में बीड़ी या तम्बाखू का सेवन आम है। इसीलिए तम्बाखू का अधिक उपयोग करने वालों भारत का नम्बर तीसरा है। हर वर्षविश्व को करीब 50 लाख मौतें देने वाला यह पदार्थ न जाने और कितनी जानें लेगा। हालांकि भारत में तम्बाखू का सेवन करने वाली महिलाओं की संख्या अपेक्षाकृत अभी कम है, फिर भी इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है, यह विचारणीय है।

महानगर में रहने वाली युवतियाँ तो काम के दबाव में ऐसा कर रही हैं, यह समझ में आता है। इसके अलावा ऐसी युवतियों की संख्या भी बहुत अधिक है, जिन्होंने इसे केवल शौक के तौर पर अपनाया। पहले तो स्कूल-कॉलेज में मित्रों के बीच साथ देने के लिए एक सुट्टा लगा लिया, फिर धीरे-धीरे यह उनकी आदत में शामिल हो गया। उधर पार्टियों में शामिल होने वाली महिलाएँ एक-दूसरे की देखा-देखी में या फिर अपनी मित्र का साथ देने के लिए या फिर गँवार होने के आरोप से बचने के लिए केवल ''ट्राय'' के लिए अपने होठों के बीच सिगरेट रखती हैं, धीरे-धीरे यह नशा छाने लगता है। अपनी पसंदीदा अभिनेत्रियों को टीवी या फिल्म में जब युवतियाँ देखती हैं कि वे भी तनाव के क्षणों में किस तरह से सिगरेट के कश लगाती हैं, तब हम भी क्यों न तनाव में ऐसा करें? वे शायद यह समझ नहीं पाती कि उनकी पसंदीदा अभिनेत्री को यह सब करने के लिए लाखों रुपए मिलते हैं। ऐसा कहा जाता है कि 70 के दशक में जो महिलाएँ पार्टी में धूम्रपान नहीं करती थीं, उन्हें ''आऊट डेटेड '' माना जाता था। आज तो हालात और भी अधिक बुरे हैं।

इसी तरह धूम्रपान का शिकार बनी वनिता का कहना था-जब मैं कॉलेज में थी, तब मित्रों के कहने से मैंने पहली बार सिगरेट को हाथ लगाया, फिर इस डर से कि कहीं मैं इन मित्रों को न खो दूँ या यह सब मुझे अपने से दूर न कर दें, इसलिए मैंने इस व्यसन को जारी रखा। धीरे-धीरे यह मेरी आदत में शामिल हो गया। अब तक जब भी मौका मिलता, मैं सिगरेट सुलगाती और उसके कश लेने लगती। एक बार रात में मेरी खाँसी बढ़ गई, माता-पिता घबरा गए, वे मुझे डॉक्टर के पास ले गए, मैं समझ गई कि अब मेरा झूठ यहाँ नहीं चलेगा। तब मैंने डॉक्टर को एकांत में हकीकत बता दी और वादा किया कि मैं इस व्यसन को छोड़ दूँगी, पर मेरे माता-पिता को इस बारे में कुछ न बताया जाए। डॉक्टर मेरी बात सुनकर घबरा गए, पर उन्होंने स्थिति को सँभाला और मुझे इस व्यसन से मुक्त करने का फैसला किया। मुझे निकोटीन दिया जाता था, खास प्रकार के माउथ वॉश से कुल्ला करने का कहा जाता, मेरे लिए वे दिन बहुत ही यातनापूर्ण थे, इस व्यसन से मुक्ति के लिए मुझे मानसिक रूप से भी तैयार होना पड़ा। छह महीनों के इलाज से यह लाभ हुआ कि धूम्रपान से मेरे फेफड़ों को हुए नुकसान की भरपाई हो गई। उसके बाद तो मैंने धूम्रपान से तौबा ही कर ली। वनिता जैसी किस्मत सबकी नहीं होती, इसमें वनिता की इच्छा शक्ति ने कमाल किया। वर्ल्ड हेल्थ आर्गनाइजेशन (WHO) ने एक सर्वेक्षण में बताया कि धूम्रपान या तम्बाखू का सेवन छोड़ने का संकल्प कई लोग करते हैं, पर 71 प्रतिशत में से मात्र 3 प्रतिशत लोग ही इसमें सफल हो पाते हैं। बाकी लोग कुछ समय बाद फिर वही नशा करने लगते हैं। उनकी देखा-देखी में उनकी संतानों में भी यह प्रवृति देखने को मिलती है। जिन परिवारों में महिलाएँ धूम्रपान करती हैं, उन परिवारों में बच्चों को ऐसा कुछ अनोखा नहीं लगता। मुम्बई में हुए एक सर्वेक्षण्ा में यह पाया गया कि 33.4 प्रतिशत गर्भवती महिलाएँ, जो किसी न किसी प्रकार के तम्बाखू का सेवन करती हैं, ऐसी महिलाओं का गर्भपात, अधूरे महीने ही प्रसूति, अविकसित बच्चे को जन्म देना आदि घटनाएँ होती हैं। पति का साथ देने के लिए धूम्रपान, मद्यपान या फिर तम्बाखू का सेवन गर्भावस्था के दौरान भी करने वाली एक महिला ने बताया कि इस दौरान में काफी तकलीफों से गुजरना पड़ा। बच्चे के जन्म के बाद उसकी अच्छी परवरिश के लिए मैंने तम्बाखू का सेवन छोड़ दिया, पर इसे लम्ब समय तक अपने से दूर नहीं कर पाई, तक कई लोगों ने समझाया कि यह सेवन तुम्हारे बच्चे के लिए खतरनाक है, मैं इसे समझती, तब तक काफी देर हो चुकी थी, मेरा बच्चा बहुत ही छोटी उम्र में ही धूम्रपान की लत लग गई है।
तम्बाखू से होने वाले नुकसान से शिक्षित वर्ग बहुत अच्छी तरह से वाकिफ होता है, पर विडम्बना यह है कि महानगर की महिलाओं में धूम्रपान का शौक बुरी तरह से हावी हो रहा है। एक शोध के अनुसार एक सिगरेट में ''फिनोल'', सीसा, टार और केडियम जैसे 4800 खतरनाक केमिकल होते हैं, दूसरी ओर उसके धुएँ में 4000 केमिकल और 500 जहरीली गैसें होती हैं। यह जानते हुए भी इंसान फिर इसी लत का शिकार होता रहता है। आश्चर्य की बात यह है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं को तम्बाखू का व्यसन छोड़ने में अधिक मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। हमारे देश में 49 ये 59 वर्षतक महिलाओं में यह व्यसन सामान्य है, किंतु उसकी शुरुआत बाल्यकाल में ही हो जाती है। विद्यार्थियों में यह आदत दस वर्षकी उम्र या उसके पहले ही हो जाती है। भारत में तम्बाखू का सेवन उत्तर-पूर्व में होता है। परिवार में यदि बड़े लोग खुलेआम धूम्रपान करते हैं, तो उस परिवार के बच्चे भी इसे अपनाने में देर नहीं करते। बचपन की यह आदत युवावस्था में काम के दबाब को देखते हुए बढ़ जाती है। '' टोबेको कंट्रोल फाउंडेशन ऑफ इंडिया'' के प्रेसीडेंट डॉ. सजीला मैनी के अनुसार यदि भारतीय युवतियाँ 15 से 22 वर्षके बीच तम्बाखू का सेवन न करे, तो आमतौर पर इस व्यसन के शिकार की संभावना बहुत ही कम हो जाती है।
इसके बाद भी ''पीने वालों को पीने का बहाना चाहिए'' यह उक्ति उन लोगों के लिए सही बैठती है, जो रोज ही इस लत को छोड़ने का संकल्प लेते हैं और वह चीज सामने आते ही संकल्प भूल जाते हैं। इसलिए यह दावे के साथ नहीं कहा जा सकता कि उसने धूम्रपान छोड़ दिया। इसके लिए तो जरूरी यह है कि क्या वास्तव में धूम्रपान ने उसे छोड दिया है?

Why are baying for blood as his own


अपने ही खून के प्यासे
मेरठ से ख़बर मिली  कि वहां माल रोड पर एक आदमी ने अपने दोस्त के साथ मिलकर अपने दो मासूम बेटांे और पत्नी को काट डाला। अपने ही बच्चो का गले रेतते हुए इस ज़ालिम बाप को ज़रा भी तरस नहीं आया। पुलिस ने इस दर्दनाक हत्याकांड मंे बिना जांच के ही अवैध सम्बंधों का दावा कर केस की गंभीरता को कम करने का प्रयास किया।
अभी इस ख़बर की स्याही सूखी भी नहीं थी कि उरई से समाचार आया कि विदवा गांव में एक भाई ने अपने सगे भाई को कुल्हाड़ी से काट डाला। बताया जाता है यहंा दोनों भाइयों केे बीच प्रोपर्टी को लेकर विवाद चल रहा था। एक भाई ने जब दूसरे से सम्पत्ति बंटवारे पर ज़ोर दिया तो वह आपा खो बैठा और गुस्से में पागल होकर पास पड़ी कुल्हाड़ी से सगे भाई के खून से हाथ रंग लिये।
तीसरी ख़बर रामपुर के मिलक से आई है जिसमें तीन भतीजों ने मिलकर अपने चाचा को मौत के घाट उतार दिया। बताया जाता है कि काफी समय से परिवार के बीच शादी में न बुलाने को लेकर आपसी विवाद चल रहा था। एक भतीजा चाचा को मनाने गया तो नशे में देखकर चाचा ने उसको उल्टे पांव भगा दिया। विडंबना यह रही कि जो भतीजा मामले को निबटाने की नीयत से गया था वही खून ख़राबे की वजह बन गया।
हालांकि ये तीनों मामले यूपी के हैं और ऐसे अनेक मामले रोज़ ही हो रहे हैं लेकिन सब पुलिस और मीडिया तक नहीं पहंुचने से पूरे देश के आंकड़े इतने भयावह नहीं दिखाई पड़ते जितने कि खून के रिश्ते आज खून के प्यासे हो गये हैं। पति पत्नी के रिश्ते को हालांकि खून का नहीं माना जाता लेकिन जीवनभर साथ मरने साथ जीने की कसम खाने से यह रिश्ता भी खून के रिश्ते से कम अहम नहीं होता। फिर भी जब कोई पति अपनी पत्नी को मौत की नींद सुलाता है तो अकसर पुरूष प्रधान समाज मृतका के बारे में बिना जांच पड़ताल और ठोस सबूत के यह चर्चा शुरू कर देता है कि हत्या आरोपी की पत्नी के ज़रूर किसी पराये पुरूष से अवैध सम्बंध रहे होंगे। जिस तरह से बलात्कार के मामलों में अकसर मर्द औरतों की बोल्ड पौशाक को लेकर उत्तेजित करने का झूठा और घटिया आरोप उल्टे बलात्कार पीड़ित युवती या महिला पर ही लगाते हैं वैसे ही इन हत्याओं के मामलों में भी किया जाता है। अजीब बात यह है कि यहां पुलिस इस बहाने को मानने के लिये पहले से ही तैयार बैठी रहती है। पुलिस को इस तरह की कार्यशैली से एक तात्कालिक लाभ यह होता है कि जहां कानून व्यवस्था पर उठने वाली उंगली थम जाती है, वहीं पुलिस को यह कहने का बहाना मिल जाता है कि इस मामले में कानून एडवांस में क्या कर सकता है?
दरअसल पूंजीवाद और समाजवाद का अंतर धीरे धीरे हमारे सामने आने लगा है लेकिन दौलत और शौहरत के पुजारी मुट्ठीभर लोग इस सच्चाई को लगातार झुठलाने का प्रयास कर रहे हैं कि पैसा कमाने की होड़ समाज से रिश्ते नातों, धर्म, मर्यादा और नैतिकता को पूरी तरह ख़त्म करती जा रही है। पूंजीवाद के सबसे बड़े वैश्विक गढ़ अमेरिका की हालत दिन ब दिन पतली और समाजवाद के आज भी मज़बूत किले चीन की हालत लगातार मज़बूत होने से भी हमारी आंखे नहीं खुल रही हैं। सच यह है कि आज हम इतने स्वार्थी और एकांतवादी होते जा रहे हैं कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अपनी मनमानी करने के लिये हम रिश्तों नातों को कच्चे धागों की तरह तोड़ने में एक पल भी नहीं लगाते। अगर थोड़ा झगड़ा और रूठना मनाना होकर ये सम्बंध फिर से प्यार मुहब्बत की डोर में बंध जायें तो फिर भी आपसी तालमेल और साझा जीवन का एक रास्ता निकल सकता था लेकिन आज तो हालत यह हो गयी है कि साझा परिवार टूटते जा रहे हैं। कुछ लोग तो शादी से पहले ही लड़के के परिवार के सामने यह शर्त रख देते हैं कि उनकी लड़की शादी के बाद अलग रहना पसंद करेगी। वे यह कहते हुए ज़रा भी संकोच नहीं करते कि वे जिस परिवार से अपना रिश्ता जोड़ने जा रहे हैं उसको तोड़ने का प्रयास विवाह होने से पहले ही कर रहे हैं। कई परिवार तो इस शर्त को पहली बार में ही ठुकरा देते हैं लेकिन अधिकांश परिवार दहेज़ के लालच या किसी बड़े और प्रभावशाली खानदान से जुड़ने के मोह में यह नाजायज़ मांग स्वीकार कर लेते हैं।
अकसर यह भी देखने मंे भी आता है कि शादी के समय अगर यह शर्त न भी रखी जाये कि वधु अलग रहना चाहेगी तो यह पहले से ही मन बना होता है कि लड़की जब लड़के को अपनी मुट्ठी में कर लेगी तो यह कौनसा मुश्किल काम है कि लड़के को उसके परिवार से लेकर लड़की किसी कीमत पर भी अलग होने का अभियान शुरू कर दे। यहीं से अलगाव के बीज बो दिये जाते हैं। यह अजीब बात है कि लगभग सभी मांबाप अपनी लड़की को को यह समझाकर ससुराल भेजते हैं कि शादी के बाद अपने पति को अपने हिसाब से चलाने की पूरी कोशिश करना और मौका देखते ही अलग हो जाना जिससे सास ससुर और ननद, भावज, जेठ, जेठानी और देवर देवरानी की सेवा और ज़िम्मेदारी से बचा जा सके जबकि अपने घर आने वाली लड़के की बहू से सौ प्रतिशत यह आशा करते हैं कि वह अपने मायके को भूलकर लड़के के पूरे परिवार के हिसाब से चले। अगर अपने घर आई बहू लड़के को अलग करने के बारे में धेाखे से भी ज़बान खोले तो पूरी ससुराल उसके पीछे हाथ धेकर पड़ जाती है, जैसे उसने कोई बहुत बड़ा पाप कर दिया हो, लेकिन यही काम जब बाकायदा दूसरे घर जाकर उनकी कन्या करती है तो इस मुहिम को न केवल वध्ु पक्ष का पूरा समर्थन और आशीर्वाद होता है बल्कि उनके विचार और तर्क भी इस चाहत के पक्ष में हो जाते हैं। ये दो पैमाने ही आज खून के रिश्तों का खून होने के पीछे मौजूद हैं। जो भाई शादी से पहले अपने छोटे भाई को लक्ष्मण और बड़े भाई को राम का दर्जा देता है वही शादी के बाद उसके खून का प्यासा हो जाता है। ज़मीन जायदाद के बंटवारे की बात चल निकलती है और जब इसमें आनाकानी और मांबाप की तरफ से पक्षपात होता है तो फिर साज़िशें और नफ़रतें पनपने लगती हैं। जिन माता पिता के लिये उनका बेटा कभी आंख तारा हुआ करता था उनके लिये वह बोझ और मुसीबत बन जाता है। बात बढ़ते बढ़ते यहां तक जा पहंुचती है कि अपना हिस्सा अपनी मांग के हिसाब से न मिलने पर दोनों भाई न केवल लड़ने लगते हैं बल्कि एक दिन गाली गलौच और मारपीट के बाद मामला थाने तहसील पहुंच जाता है। यही हाल माता पिता में से अधिकांश मामलों में पिता के साथ होता है। अदालत में मुकद्मा शुरू होने के बाद बोलचाल तक बंद हो जाती है। उसके बाद दोनो पक्ष आपस में एक दूसरे से रंजिश रखने लगते हैं। यह पता ही नहीं चलता कि कब खून के रिश्ते एक दूसरे के खून के प्यासे हो गये। हर किसी को यह लगता है कि दूसरा उसको समझता ही नहीं । साथ साथ यह भी दुहायी दी जाती है कि उसकी ज़रूरत और भावनाओं का ख़याल नहीं रखा जा रहा है जबकि यह शिकायत करते समय वह खुद यह भूल जाता है कि उसने दूसरों की परवाह की है या वह खुद भी ‘मैं, मेरा और मेरा परिवार’ के एक सूत्रीय कार्यव्रफम पर चल रहा है। इसके बाद यह दरार यहीं ख़त्म नहीं होती बल्कि इस संकीर्णता और स्वार्थ का भी विस्तार होता है। दर्जन दो दर्जन से चार पांच लोगों की छोटी यूनिट में आध्ुनिक प्रगतिशील माता पिता के बोल्ड सोच के बच्चे चाहते हैं कि उनका अपना निजी कमरा, फोन, टीवी और अलग कंप्यूटर हो। कमरे में अटैच टॉयलेट बाथरूम हो। उनका कौन दोस्त या सहेली कब उनसे मिलने आये उसपर घर के लोगों की न केवल नज़र न हो बल्कि इस बारे में उनसे कोई सवाल तक न करे कि कौन कहां से कब क्यों उनसे मिलने आता है?
इस मामले में बहनों का मामला और पेचीदा है जहां वे अपना हक़ सम्पत्ति में मांग लेती है वहां उनको हिस्सा तो अकसर मिलता ही नहीं साथ ही परिवार से उनका बहिष्कार और शुरू हो जाता है। भाई ही नहीं प्रायः मातापिता भी अकसर ऐसा ही करते हैं। इस चक्कर में न केवल उनसे रिश्ता नाता ख़त्म कर दिया जाता है बल्कि मामला कभी कभी जीजा जी के सर थोपकर उनकी हत्या तक कर दी जाती है। हालांकि कुछ लोग जीजा साले के रिश्ते को खून का नहीं मानते लेकिन जिस रिश्ते से बहन बंधी हो उसमें बहनोई का सम्बंध सीधे न सही अप्रत्यक्ष रूप से खून से तो जुड़ ही जाता है। स्पश्ट है कि जब रिश्ता खून से जुड़ जाता है तो भौतिक विवादों को लेकर उनका भी वैसा ही हश्र होता है जैसा वास्तविक खून के रिश्तों का होता है। इसको और गहराई से समझना चाहें तो चचेरे, तयेरे और ममेरे भाइयों का भी पैसे और प्रोपर्टी के बंटवारे को लेकर यही हाल होता है।
कहने का मतलब यह है कि जब हम पूंजीवादी व्यवस्था में जी रहे हैं तो उसकी बुराइयां और कमियां भी हमको झेलनी होगी। यह नहीं हो सकता कि हम गुड़ खायें और गुलगुलों से परहेज़ करें। शिक्षा के साथ साथ जब तक हम सही शिक्षा, समाज व नैतिकता के बारे में नहीं सोचेंगे तब तक खून के रिश्तों का खून ऐसे ही नहीं बहता रहेगा बल्कि यह वारदातें और ख़तरनाक हादसे बढ़ते ही जायेंगे। एक शायर की चार लाइनें यहां पेश हैं-
0 अजीब लोग हैं क्या खूब मुंसफी की है,
हमारे क़त्ल को कहते हैं खुदकशी की है।
इसी लहू में तुम्हारा सफीना डूबेगा,
ये क़त्ल नहीं तुमने खुदकशी की है।।

थोड़ी देर में रिहा होंगे अन्ना हजारे

अन्ना हजारे 

सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे की रिहाई का आदेश जारी कर दिया गया है। दिल्ली पुलिस ने इससे संबंधित रिलीज वारंट तिहाड़ जेल प्रशासन को भेज दिया है। पुलिस ने उनपर लगाए गए सारे आरोप वापस ले लिए हैं। सूत्रों के अनुसार आज रात नौ बजे तक अन्ना को रिहा किया जा सकता है। उनकी रिहाई के बारे में प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उनके सहयोगी प्रशांत भूषण ने कहा कि यह देर से किया गया मगर अच्छा फैसला है।
इससे पहले दिल्ली पुलिस ने अन्ना हजारे पर लगाए गए सभी आरोपों को वापस ले लिया। जिसके बाद अन्ना की रिहाई चंद घंटे बाद संभव हुई. दिल्ली पुलिस ने अन्ना की रिहाई के लिए रिलीज वारंट तिहाड़ जेल के डीजी को भेजा। सूत्रों के मुताबिक अन्ना की रिहाई का फैसला प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और राहुल गांधी की बैठक में हुआ था। अन्ना के मुद्दे पर राहुल गांधी और प्रधानमंत्री के बीच आज शाम 4 बजे एक बैठक हुई थी, जिसमें रिहाई का फैसला लिया गया।

इससे पहले प्रमुख समाजसेवी अन्‍ना हजारे और अरविंद केजरीवाल ने जेल प्रशासन से खाना खाने के लिए इनकार कर दिया था। जेल प्रशासन ने अन्ना हजारे और अरविंद केजरीवाल से तीन बार खाना खाने के लिए कहा था। भ्रष्टाचार के खिलाफ जन लोकपाल विधेयक लाने की मांग को लेकर आंदोलनरत सुप्रसिद्ध समाजसेवी अन्ना हजारे सहित पांच नेताओं को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। पुलिस ने इन्हें सुबह अलग-अलग स्थानों से एहतियातन हिरासत में लिया था और बाद में इन्हें 7 दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया था। तिहाड़ में अन्ना को जेल नंबर-4 में रखा गया है जहां सुरेश कलमाडी बंद हैं। वहीं अरविंद केजरीवाल को जेल नंबर -1 में रखा गया है जहां ए. राजा बंद है।

सूत्रों ने बताया कि हजारे, अरविन्द केजरीवाल एवं समाजसेवी मनीष सिसोदिया को पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार तथा पूर्व वरिष्ठ पुलिस अधिकारी किरण बेदी एवं एक अन्य नेता को राजघाट के निकट हिरासत में लिया गया था बाद में इन्‍हें सहायक पुलिस आयुक्त के समक्ष पेश किया गया।

समर्थकों ने सरकार विरोधी नारे लगाए
अन्ना हजारे एवं केजरीवाल सुप्रीम एनक्लेव स्थित फ्लेट से जयप्रकाश नारायण पार्क जाने के लिए निकल रहे थे तभी लिफ्ट के पास सादी वर्दी में खड़े लगभग 20 पुलिस अधिकारियों ने उन्हें हिरासत में ले लिया। अन्ना हजारे को हिरासत में लिए जाने के समय वहां मौजूद सैकड़ों समर्थकों ने सरकार विरोधी नारे लगाए। उन्होंने अन्ना हजारे के समर्थन में भी नारेबाजी की। किसी भी घटना से निपटने के लिए सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त किए गए थे। पुलिस ने सड़क पर किसी तरह की अनहोनी से बचने के लिए मानव श्रृंखला बना रखी थी।

आंदोलन को मत रुकने दीजिए : अन्ना
हिरासत में लिए जाने से पूर्व अन्ना हजारे ने एक समाचार चैनल से बातचीत में कहा कि मेरी गिरफ्तारी के बाद इस आंदोलन को मत रुकने दीजिए। यह आजादी की दूसरी लड़ाई है। पूरा विश्व जानता है कि भ्रष्टाचार किस कदर अपने पांव जमा चुका है। अन्ना हजारे ने कहा कि मैं आपसे अपील करता हूं कि इस आंदोलन में किसी तरह की हिंसा न होने पाए। मैं युवा और बुजुर्ग लोगों से अपील करता हूं कि यदि जेल भरो आंदोलन की आवश्यकता पड़े तो आप अपने आठ दिन देश को समर्पित कीजिए।

हिरासत में लेना गैरकानूनी और असंवैधानिक
अन्ना हजारे के एक सहयोगी प्रशांत भूषण ने कहा कि अन्ना हजारे को हिरासत में लेना गैरकानूनी एवं असंवैधानिक है। इस सराकर का लोकतांत्रित मूल्यों में कोई विश्वास नहीं है। रोमन मैग्सेसे पुरस्कार विजेता किरण बेदी को राजघाट से हिरासत में लिया गया। इसके बाद उन्होंने कहा कि जब अन्ना ने पुलिसकर्मियों से पूछा कि उन्हें किस आरोप में हिरासत में लिया जा रहा है। तो पुलिस ने कहा कि उन्हें ऐसा करने के आदेश दिए गए हैं।

‘निषेधाज्ञा उल्लंघन की संभावना पर हिरासत में’
अन्ना हजारे को हिरासत लेने पर सरकार की ओर से आई पहली प्रतिक्रिया में केंद्रीय गृह सचिव आर.के. सिंह ने कहा है कि उन्हें इसलिए हिरासत में लिया गया, क्योंकि वह निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने वाले थे। सिंह ने संवाददाताओं से कहा कि अन्ना हजारे ने कहा था कि वह निषेधाज्ञा का उल्लंघन करेंगे, इसलिए उन्हें हिरासत में लिया गया। अन्ना द्वारा दिल्ली पुलिस की शर्तें मानने से इंकार किए जाने के बाद पुलिस ने मध्य दिल्ली में स्थित अन्ना हजारे के प्रस्तावित अनशन स्थल, जे.पी. पार्क में और उसके आसपास इलाकों में निषेधाज्ञा लागू कर दिया था।

दिल्ली पुलिस पर राजनैतिक दबाव नहीं : सोनी
वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे के प्रस्तावित अनशन पर बैठने से पहले गिरफ्तारी कर लिए जाने के बाद केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने कहा कि उन्हें किसी राजनैतिक दबाव की वजह से गिरफ्तार नहीं किया गया है। ताजा राजनीतिक हालात पर राजनीतिक मामलों की कैबिनेट की बैठक के बाद अंबिका ने कहा कि पुलिस पर राजनैतिक दबाव नहीं था। उनकी गिरफ्तारी कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए की गई क्योंकि उनके समर्थकों की भीड़ में कुछ असामाजिक तत्वों के शामिल होने का अंदेशा था। अंबिका ने कहा कि संसद का सत्र चलते समय संवेदनशील इलाकों में धारा 144 लगाई जाती है। अन्ना हजारे को संसद सत्र के बाद अनशन करना चाहिए था। उन्होंने कहा कि देश में आपातकाल जैसी स्थिति बताना गलत है।

अन्ना हजारे का संदेश, ज्यादा से ज्यादा लोग दें गिरफ्तारी


Anna Hazare


जेपी पार्क में प्रस्तावित अनशन से पूर्व मंगलवार सुबह दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में लिए गए अन्ना हजारे ने अपने समर्थकों को जारी संदेश में कहा कि अब वक्त आ गया है कि ज्यादा से ज्यादा लोग गिरफ्तारी दें क्योंकि यह आजादी की दूसरी लड़ाई है और भ्रष्टाचारियों की असलियत सामने आ गई है।
गांधीवादी कार्यकर्ता को दिल्ली पुलिस ने उनके प्रस्तावित अनशन से पहले अरविंद केजरीवाल और किरण बेदी के साथ आज सुबह हिरासत में ले लिया।
उनके आंदोलन 'इंडिया अगेन्स्ट करप्शन' के मुताबिक, हजारे ने कहा कि मेरी और मेरे साथ कई अन्य लोगों की गिरफ्तारी हो रही है, लेकिन यह आंदोलन रूकने नहीं दें। हमें यह लड़ाई जारी रखनी है। यह आजादी की दूसरी लड़ाई है। ..अब वक्त आ गया है कि ज्यादा से ज्यादा लोग गिरफ्तारियां दें और ऐसे प्रयास करें कि देश में कोई भी जेल खाली नहीं बचे।
उन्होंने कहा कि..मैं आप लोगों से विनती करता हूं कि आंदोलन को हिंसक नहीं होने दें। हमें अहिंसा के रास्ते पर चलना है। किसी भी सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचे और राह चलते लोगों को परेशानी नहीं हो।
हजारे ने पुलिस कार्रवाई के लिए सरकार को जाहिरा तौर पर आड़े हाथ लेते हुए कहा कि पूरी दुनिया को भ्रष्टाचारियों का असली रूप दिख गया है। इस बात को ध्यान में रखें कि यह लड़ाई परिवर्तन की है। जब तक परिवर्तन नहीं आएगा हमें सही मायने में गणतंत्र और लोकशाही हासिल नहीं होगी। उन्होंने कहा, 'परिवर्तन की इस लड़ाई में दूसरी पंक्ति के कार्यकर्ता अरविंद केजरीवाल, किरण बेदी, प्रशांत भूषण, शांति भूषण, पी वी राजगोपाल, अखिल गोगोई और मनीष सिसौदिया आदि के रूप में मौजूद हैं, इसलिए आंदोलन जारी रहना चाहिए।'
हजारे ने अपने समर्थकों से कहा कि वे आठ दिनों के लिए अपने काम से छुट्टी लें और इस आंदोलन में कूद पड़ें। लोगों के बड़ी तादाद में शामिल होने से ही यह आंदोलन मजबूत होगा।
सूत्रों के अनुसार जब अन्ना ने पुलिस अधिकारियों की बात मानने से इंकार किया तो उन्हें हिरासत में ले लिया गया। हजारे और केजरीवाल को हिरासत में लिए जाने के समय भारी तादाद में उनके समर्थक मयूर विहार में मौजूद थे और नारेबाजी कर रहे थे।
पुलिस की इस कार्रवाई पर पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण और पूर्व विधि मंत्री शांति भूषण ने सवाल उठाए हैं। किरण ने कहा कि यह हिरासत असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक है।
वहीं, लोकपाल विधेयक संयुक्त मसौदा समिति के सह-अध्यक्ष भूषण ने कहा कि हजारे को हिरासत में लिया जाना गैर-कानूनी है क्योंकि उन्होंने अब तक तो धारा-144 के तहत निषेधाज्ञा का उल्लंघन भी नहीं किया है। हजारे मयूर विहार स्थित मेरे फ्लैट पर मौजूद थे जब पुलिस आई और उन्हें ले गई। पुलिस ने हिरासत में लिए जाने का कारण नहीं बताया। उन्होंने संकेत दिए कि इस कार्रवाई के खिलाफ वह अदालत की शरण में जाएंगे। भूषण ने समाचार चैनलों से कहा कि पहले सरकार को तानाशाही कर लेने दीजिए। फिर हम अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।
इससे पहले, कल रात जयप्रकाश नारायण पार्क से भी पुलिस ने हजारे के करीब 50 समर्थकों को हिरासत में लिया था।
अन्ना को मनाने में नाकाम रही पुलिस
-दिल्ली पुलिस के आला अधिकारियों के 90 मिनट तक मनाने के बावजूद गाधीवादी अन्ना हजारे निषेधाज्ञा का उल्लंघन कर अनशन करने की अपनी योजना से तनिक भी नहीं डिगे। हजारे को ले जा रहे वाहन के चारों ओर उनके समर्थकों ने तिरंगा लहराते हुए 'भारत माता की जय' और 'वंदे मातरम' का उद्घोष किया।
सुबह करीब 7.30 बजे पुलिस ने सूचित किया था कि हजारे को हिरासत में लिया जा रहा है क्योंकि उन्हें अनशन त्यागने के लिए मनाने के सभी प्रयास नाकाम रहे। हजारे को दिल्ली के मयूर विहार इलाके से हिरासत में लिया गया।
दिल्ली पुलिस के आयुक्त [अपराध] अशोक चंाद ने मंगलवार की सुबह छह बजे मयूर विहार पहुंचकर हजारे को मनाने का प्रयास किया। देखते ही देखते वहा लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। हजारे को सुबह करीब 7:15 बजे हिरासत में लिया गया। सादे कपड़े में 10 पुलिसकर्मियों ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया। हजारे के समर्थकों ने इसका विरोध किया और नारेबाजी की।
हिरासत में लिए जाने की खबर आने के बाद उनके समर्थकों ने रास्ता रोक लिया और पुलिस के वाहन के सामने आ गए। उनके समर्थकों ने पुलिस को वाहन के चारों ओर से घेर लिया। पुलिस को दो किलोमीटर तक जाने में 45 मिनट का समय लग गया और इसके बाद वे हजारे को लेकर सिविल लाइंस रवाना हो पाए।
हजारे की हिरासत के विरोध में सिविल लाइंस में प्रदर्शन
-अन्ना हजारे के समर्थकों ने उत्तरी दिल्ली के सिविल लाइंस इलाके के उस सरकारी इमारत के बाहर प्रदर्शन किया जहा अन्ना हजारे, शाति भूषण और उनके अन्य सहयोगियों को हिरासत में लेने के बाद लाया गया। पुलिस ने सरकार विरोधी नारे लगा रहे इन लोगों को हटने का आदेश दिया और इसकी अवहेलना के बाद इनमें से कई लोगों को हिरासत में लिया गया।
इससे पहले इन लोगों ने काग्रेस और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की थी और पुलिस मेस के बाहर की सड़क पर धरने पर बैठ गए थे। इस इलाके में बैरिकेड लगाए गए हैं और भारी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।
गौरतलब है कि जन लोकपाल के मुद्दे पर अनशन करने के लिए जयप्रकाश नारायण पार्क में लागू निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने के बाद आज सुबह अन्ना हजारे, शाति भूषण, अरविंद केजरिवाल और किरण बेदी को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
हजारे और उनके सहयोगियों की रिहाई की माग कर रहे इन लोगों ने सरकार के इस कदम को अलोकतात्रिक बताया।

तिहाड़ में कलमाड़ी के साथ रखे गए हैं अन्ना

अनशन से पहले ही दिल्ली पुलिस ने अन्नाहजारे और उनके चार सहयोगियों को गिरफ्तार कर लिया गया। अन्ना के साथ अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को दिल्ली स्थित मयूर विहार में उनके घर सेहिरासत में लेने के बाद पुलिस अलीपुर रोड सिविल लाइंसमें पुलिस ऑफिसर्स मेस ले गई। बाद में किरन बेदी औरमशहूर वकील शांतिभूषण को भी हिरासत में लेकर यहांलाया गया। इसके बाद सभी पांचों लोगों को सरकारी काममें बाधा डालने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया।गिरफ्तार करने के बाद पांचों लोगों को छत्रसाल स्टेडियममें अस्थायी रूप से बनाई गई जेल ले जाया गया। भीड़ जमा होने के बाद उन लोगों को यहां से भी हटा लिया गया। अब अन्ना हजारे कहां है इसके बारे दिल्ली पुलिस के अधिकारी कुछ भी बताने से इनकार कर रहे हैं। 

अन्ना को 7 दिन की न्यायिक हिरासत 
अन्ना हजारे को न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। वहां पुलिस ने हालांकि उनके लिए हिरासत की जरूरत नहीं है। अगर वह चाहें तो निजी बॉन्ड भर कर छूट सकते हैं। उन्हें यह लिख कर देना होगा कि वह धारा 144 का उल्लंघन नहीं करेंगे और न ही लोगों से ऐसा करने की अपील करेंगे। मगर, अन्ना ने ऐसा कोई बॉन्ड भरने से इनकार कर दिया। इसके बाद मजिस्ट्रेट ने उन्हें 7 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। अन्ना को तिहाड़ जेल भेज दिया गया। उन्हें जेल नंबर 4 में रखा जाएगा। 

कलमाड़ी के साथ रखे गए हैं अन्ना 
अन्ना हजारे और उनके आठ साथियों को शाम सवा चार बजे तिहाड़ जेल भेज दिया गया है। अन्ना हजारे को तिहाड़ की उसी जेल नंबर-4 में रखा गया है जहां कॉमनवेल्थ घोटाले में फंसे सुरेश कलमाड़ी और कलैगनार टीवी के एमडी कुमार को रखा गया है। तिहाड़ जेल के डीएसपी आर. एन. शर्मा ने बताया कि चूंकि कलमाड़ी और अन्ना को एक ही वार्ड में नहीं रखा गया है, इसीलिए यह नहीं कहा जा सकता कि दोनों को साथ रखा गया है। उन्होंने कहा कि अन्ना को जेल नंबर चार के न्यू ऐडमिशन वॉर्ड में रखा गया है। इसके अलावा अरविंद केजरीवाल और बाकी लोगों को जेल नंबर एक में रखा गया है। इसमें स्पेक्ट्रम घोटाले में फंसे पूर्व टेलिकॉम मिनिस्टर ए. राजा और डीबी रिऐलिटी के एमडी शाहिद बलवा को रखा गया है। 

अन्ना को मजबूरी में किया गिरफ्तारः चिदंबरम 
इससे पहले कार्रवाई पर सफाई देते हुए गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने सुबह अन्ना से मुलाकात की थी और उनसे पूछा की उनकी क्या योजना है, तो उन्होंने कहा कि वह धारा-144 का उल्लंघन करते हुए जय नारायण पार्क जाएंगे। चिदंबरम ने कहा कि इसके बाद अन्ना और उनके सहयोगियों को गिरफ्तार करने के अलावा दिल्ली पुलिस के पास कोई चारा नहीं बचा था। अनशन के लिए शर्तों के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह दिल्ली पुलिस का फैसला था सरकार का इससे कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि 1200 से 1300 लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिन्हें छत्रसाल स्टेडियम में रखा गया है। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने कहा कि कानून व्यवस्था बिगड़ने की आशंका से लोगों की गिरफ्तारी सामान्य बात है। इसकी आपातकाल से तुलना करना गलत है। 

जेल में ही अन्ना ने शुरू किया अनशन 
गिरफ्तारी से बचे अन्ना की कोर टीम के सदस्य प्रशांत भूषण ने कहा कि अन्ना ने जेल में ही 10 बजे से अनशनशुरू कर दिया है। अन्ना ने पहले भी कहा था कि अगर उन्हें गिरफ्तार किया गया तो वह जेल में ही अनशन शुरूकर देंगे। इसके साथ ही प्रशांत भूषण ने कहा कि अन्ना हजारे और उनके समर्थकों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन से रोकनेके लिए की गई गिरफ्तारी को चुनौती देने के लिए वह आज ही सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेंगे। 

सैकड़ों समर्थक भी हिरासत में लिए गए 
अन्ना के अलावा उनके कुछ समर्थकों को भी हिरासत में लिया गया है जिन्हें छत्रसाल स्टेडियम में रखा गया है।बताया जा रहा है कि अन्ना के ढाई से तीन हजार समर्थक यहां हिरासत में हैं। टीवी चैनलों को मुताबिक करीब इतने ही लोग यहां अपनी गिरफ्तारी की मांग भी कर रहे हैं। इससे पहले राजघाट में बापू की समाधि परश्रद्धांजलि देने पहुंची टीम अन्ना की सदस्य किरन बेदी को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया था। इस मौके परबेदी ने कहा कि जब अन्ना को हिरासत में लिया जा रहा था तो उन्होंने पूछा कि मेरा जुर्म क्या है तो दिल्लीपुलिस के अधिकारियों ने कहा कि हमें ऊपर से आदेश है। 

अन्ना हजारे के प्रस्तावित अनशन से ठीक पहले दिल्ली पुलिस ने उनके सैकड़ों समर्थकों को धारा 144 काउल्लंघन करने के लिए जयनारायण पार्क से हिरासत में ले लिया। पुलिस ने बताया कि हजारे के समर्थकों को पार्कके गेट से हिरासत में लेकर बस से पास के पुलिस थाने ले जाया गया। दिल्ली पुलिस ने हजारे को जयप्रकाशनारायण पार्क में अनशन की इजाजत नहीं दी है। समर्थक वहां पर सख्त लोकपाल के लिए हजारे का समर्थनजताने के लिए इकट्ठा हुए थे। 

इससे पहले दिल्ली पुलिस ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए सोमवार रात जयप्रकाश नारायण पार्क सहित सेंट्रलदिल्ली में कई स्थानों पर आईपीसी की धारा 144 लगा दी गई है। 

गिरफ्तारी से पहले अन्ना का संदेश 
हिरासत में लिए जाने से पहले अन्ना ने पूरे देश को संदेश देते हुए कहा कि देश की दूसरी आजादी में लोग बढ़ -चढ़ कर गिरफ्तारी दें। उन्होंने कहा कि लोग हिंसा का सहारा न लें लें। अन्ना हजारे ने कहा कि मुझे हिरासत मेंलेने से अनशन नहीं रुकेगा। उन्होंने कहा कि देश के लोग ये लड़ाई जारी रखें। उन्होंने कहा कि हमारी गिरफ्तारीके बाद सेकेंड लाइन लीडरशिप इस लड़ाई को आगे बढ़ाएगी। 

देश को अपने संबोधन में अन्ना हजारे ने कहा कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को गिरफ्तारी देनी होगी ताकि जेलों मेंजगह नहीं बचें। उन्होंने कहा कि आंदोलन में हिंसा नहीं हो। राष्ट्रीय संपत्ति या किसी की व्यक्तिगत संपत्ति कोनुकसान न पहुंचाया जाए।

who is anna hazare?

कौन हैं अन्‍ना हजारे?

अन्‍ना हजारे
ANNA HAZARE

अन्‍ना हजारे का वास्‍तविक नाम किसन बाबूराव हजारे है. 15 जून 1938 को महाराष्ट्र के अहमद नगर के भिंगर कस्बे में जन्मे अन्ना हजारे का बचपन बहुत गरीबी में गुजरा. पिता मजदूर थे, दादा फौज में थे. दादा की पोस्टिंग भिंगनगर में थी. अन्ना के पुश्‍तैनी गांव अहमद नगर जिले में स्थित रालेगन सिद्धि में था. दादा की मौत के सात साल बाद अन्ना का परिवार रालेगन आ गया. अन्ना के 6 भाई हैं.

परिवार में तंगी का आलम देखकर अन्ना की बुआ उन्हें मुम्बई ले गईं. वहां उन्होंने सातवीं तक पढ़ाई की. परिवार पर कष्टों का बोझ देखकर वह दादर स्टेशन के बाहर एक फूल बेचनेवाले की दुकान में 40 रुपये की पगार में काम करने लगे. इसके बाद उन्होंने फूलों की अपनी दुकान खोल ली और अपने दो भाइयों को भी रालेगन से बुला लिया.

छठे दशक के आसपास वह फौज में शामिल हो गए. उनकी पहली पोस्टिंग बतौर ड्राइवर पंजाब में हुई. यहीं पाकिस्तानी हमले में वह मौत को धता बता कर बचे थे. इसी दौरान नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से उन्होंने विवेकानंद की एक पुस्‍तक 'कॉल टु दि यूथ फॉर नेशन' खरीदी और उसको पढ़ने के बाद उन्होंने अपनी जिंदगी समाज को समर्पित कर दी. उन्होंने गांधी और विनोबा को भी पढ़ा.

1970 में उन्होंने आजीवन अविवाहित रहने का संकल्प किया. मुम्बई पोस्टिंग के दौरान वह अपने गांव रालेगन आते-जाते रहे. जम्मू पोस्टिंग के दौरान 15 साल फौज में पूरे होने पर 1975 में उन्होंने वीआरएस ले लिया और गांव में आकर डट गए. उन्होंने गांव की तस्वीर ही बदल दी. उन्होंने अपनी जमीन बच्चों के हॉस्टल के लिए दान कर दी.
आज उनकी पेंशन का सारा पैसा गांव के विकास में खर्च होता है. वह गांव के मंदिर में रहते हैं और हॉस्टल में रहने वाले बच्चों के लिए बनने वाला खाना ही खाते हैं. आज गांव का हर शख्स आत्मनिर्भर है. आस-पड़ोस के गांवों के लिए भी यहां से चारा, दूध आदि जाता है. गांव में एक तरह का रामराज है. गांव में तो उन्होंने रामराज स्थापित कर दिया है. अब वह अपने दल-बल के साथ देश में रामराज की स्थापना की मुहिम में निकले हैं.

मुंबई में फिर सीरियल ब्लास्ट

मुंबई में फिर सीरियल ब्लास्ट, 
20 मरे, झवेरी-दादर में हुआ धमाका



मुंबई एक बार फिर आतंकी हमले से दहल उठी है। मुंबई में शाम सात बजे सीरियल ब्लास्ट होने की खबर है। तीन ब्लास्ट हुए हैं। 

मुंबई के दादर, ओपेरा हाउस और झवेरी बाजार इलाके में धमाका हुआ है। तीनों भीड़-भाड़ वाले इलाके हैं। 20 लोगों के मरने और करीब 100 लोगों के घायल होने की अपुष्ट खबर है। 


The scene at the blast site near Opera House diamond market in Mumbai on Wednesday. Photo: Vivek Bendre
The scene at the blast site near Opera House diamond market
in Mumbai on Wednesday. Photo: Vivek Bendre

पहला धमाका झवेरी बाजार के डायमंड एरिया इलाके में हुआ। दूसरा धमाका दादर के कबूतरखाना इलाके में एक टैक्सी में हुआ। तीसरा धमाका चर्नीरोड स्टेशन के पास ओपेरा हाउस में हुआ। 
धमाके के जांच के लिए एनआईए की टीम मुंबई रवाना हो गई है। हताहतों के बारे में औपचारिक तौर पर कोई जानकारी नहीं है, लेकिन गैरसरकारी सूत्रों के मुताबिक 100 लोग घायल हुए हैं। 

@ 8.00 PM 
पुलिस ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि यह आतंकी हमला है। एनआईए की टीम मुंबई भेजी जा रही है। महाराष्ट्र एटीएस की टीमें भी मौके पर पहुंच रहा हैं। सभी राज्यों में हाई अलर्ट कर दिया गया है। पुलिस ने कहा है कि वह इन धमाकों की प्रकृति की जांच कर रही है। 

दिल्ली में उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि गृह मंत्रालय राज्य सरकार और मुंबई पुलिस के लगातार संपर्क में है। एनएसजी को सतर्क कर दिया गया है। मुंबई पुलिस ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को बताया कि तीनों धमाकों में आईईडी का इस्तेमाल किया गया है। 

@ 8.30 pm 
प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण से बात कर घटना की पूरी जानकारी ली। एनएसजी टीम मुंबई के लिए रवाना हो गई है। 
मुंबई में लोकल मोबाइल नेटवर्क जैम हो गया है। इस वजह से लोगों में और घबराहट फैल गई है। लोग अपने मित्रों-रिश्तेदारों की जानकारी नहीं ले पा रहे हैं। 
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि जहां तक हो सके बाहर न निकलें। क्योंकि और भी विस्फोटक छिपाए गए हो सकते हैं। 
इस बीच दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय बैठक शुरू हो गई है।

As of 80 trillion ...

80 लाख करोड़ का सवाल है ...


इसे इतना फॉरवर्ड करो की हर भारतीय पढ़े ...



SWIS BANK
भारतीय गरीब है लेकिन भारत देश कभी गरीब नहीं रहा"* ये कहना है स्विस बैंक के डाइरेक्टर का. स्विस बैंक के डाइरेक्टर ने यह भी कहा है कि भारत का लगभग 280 लाख करोड़ रुपये उनके स्विस बैंक में जमा है. ये रकम इतनी है कि भारत का आने वाले 30 सालों का बजट बिना टैक्स के बनाया जा सकता है. या यूँ कहें कि 60 करोड़ रोजगार के अवसर दिए जा सकते है. या यूँ भी कह सकते है. कि भारत के किसी भी गाँव से दिल्ली तक 4 लेन रोड बनाया जा सकता है. ऐसा भी कह सकते है कि 500 से ज्यादा सामाजिक प्रोजेक्ट पूर्ण किये जा सकते है. ये रकम इतनी ज्यादा है कि अगर हर भारतीय को 2000 रुपये हर महीने भी दिए जाये तो 60 साल तक ख़त्म ना हो. यानी भारत को किसी वर्ल्ड बैंक से लोन लेने कि कोई जरुरत नहीं है. जरा सोचिये ... हमारे भ्रष्ट राजनेताओं और नोकरशाहों ने कैसे देश को लूटा है और ये लूट का सिलसिला अभी तक 2011 तक जारी है. इस सिलसिले को अब रोकना बहुत ज्यादा जरूरी हो गया है. अंग्रेजो ने हमारे भारत पर करीब 200 सालो तक राज करके करीब 1 लाख करोड़ रुपये लूटा. मगर आजादी के केवल 64 सालों में हमारे भ्रस्टाचार ने 280 लाख करोड़ लूटा है. एक तरफ 200 साल में 1 लाख करोड़ है और दूसरी तरफ केवल 64 सालों में 280 लाख करोड़ है. यानि हर साल लगभग 4.37 लाख करोड़, या हर महीने करीब 36 हजार करोड़ भारतीय मुद्रा स्विस बैंक में इन भ्रष्ट लोगों द्वारा जमा करवाई गई है. भारत को किसी वर्ल्ड बैंक के लोन की कोई दरकार नहीं है. सोचो की कितना पैसा हमारे भ्रष्ट राजनेताओं और उच्च अधिकारीयों ने ब्लाक करके रखा हुआ है. हमे भ्रस्ट राजनेताओं और भ्रष्ट अधिकारीयों के खिलाफ जाने का पूर्ण अधिकार है. हाल ही में हुवे घोटालों का आप सभी को पता ही है - CWG घोटाला, २ जी स्पेक्ट्रुम घोटाला , आदर्श होउसिंग घोटाला ... और ना जाने कौन कौन से घोटाले अभी उजागर होने वाले है ........आप लोग जोक्स फॉरवर्ड करते ही हो. इसे भी इतना फॉरवर्ड करो की पूरा भारत इसे पढ़े ...

WHAT IS THIS : SHARM AATI HAI... YAHAN KI GOVT. PAR

  

 
VERY POOR : THIS IS INDIA MERI JAAN

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अगर इन्हें संरक्षण नहीं मिला तो आपके आने वाले
बच्चे सिर्फ नेट में ही देख पाएंगे... 
If they do not get protection if the
kids just see it in the net ...

RAJESH MISHRA, KOLKATA
Beautiful Birds pictures

The India - all over the place with Nepal, Brazil, Africa, America, France, Thailand,West Indies, Australia, England, Singapore, Sri Lanka, Pakistan, Bangladesh,Uganda, China, Malaysia, Zimbabwe, Saudi Arabia, Greece, including Nambibia are found all over the world ...
ये भारत के साथ-साथ सभी जगह नेपाल, ब्राज़ील, अफ्रीका, अमेरिका, फ्रांस, थाईलैंड,  वेस्ट इंडीज़, आस्ट्रेलिया, इंग्लॅण्ड, सिंगापूर, श्रीलंका, पाकिस्तान,  बंगलादेश, उगांडा, चीन, मलेशिया, ज़िम्बाब्वे, सउदी अरब, ग्रीक, नाम्बिबिया सहित पूरी दुनिया में पाए जाते हैं... 





































Beautiful Birds pictures, these birds are very attractive because of its color, almost every colour of the rainbow can be found on their feathers. You cannot see these birds everywhere, they can live according the weather of the region. most of the beautiful birds live in inaccessible, dense rainforest.Now the lovebirds business is attracted to maney because of its demand and profit.

Diesel prices hiked by Rs 3, kerosene and LPG to cost more


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Today, Spider-Man will swing away into eternity


The lights are going out for Peter Parker, the high school student bitten by a radioactive spider whose wall-crawling and web-slinging antics have made him a touchstone of Marvel Comics' universe of heroes and villains. 

The publisher said on Tuesday that Parker's alter ego, Spider-Man, will die, finally succumbing to one of his most pernicious foes in the final issue of "Ultimate Comics Spider-Man" due out Wednesday. 

Fans of Spider-Man need not worry much, though, because the Ultimates imprint is separate from Marvel's bigger universe. Whatever fate may befall Ultimate Spider-Man won't count in the pages of the other series, including Amazing Spider-Man. 

The death, while dramatic, is not entirely unexpected. In November, Marvel said that the Ultimate Spider-Man was going to face an uncertain fate in the latest storyline by writer Brian Michael Bendis fittingly titled 

"The Death of Spider-Man", an eight-issue arc that saw the return of original series artist Mark Bagley. Bendis and Bagley had worked together on the series for 111 issues. 

Bendis said that in issue No 160 Parker fights valiantly but will pass on, heroically, in a pitched fight. To whom? 

"He will pass heroically, but he will die at the hands of the Green Goblin," Bendis said. 

In Marvel's Ultimate Comics imprint, death is not something taken lightly. Characters in that universe are dead and gone, never to return. The roll of the deceased includes Magneto, Wasp and Wolverine.

मून को फिर संयुक्त राष्ट्र की कमान
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 192 देशों ने सर्वसम्मति से बान की मून को दोबारा पांच साल के लिए वैश्विक निकाय का महासचिव चुना है।

महासभा ने सर्वसम्मति से दक्षिण कोरिया के इस 67 वर्षीय नेता को संयुक्त राष्ट्र प्रमुख चुना। उनका दूसरा कार्यकाल एक जनवरी, 2012 से शुरू होगा।

बान को चुनौती देने के लिए उनका कोई दूसरा प्रतिद्वंद्वी नहीं था, इसलिए महासभा ने उन्हें सर्वसम्मति से चुन लिया। बान ने दो सप्ताह पहले खुद को इस पद का प्रत्याशी घोषित किया था।

बान ने अपने दोबारा चुने जाने को ‘बहुत बड़ा सम्मान’ बताया कि जिस पर प्रतिक्रिया नहीं दी जा सकती। उनका पहला कार्यकाल उनकी प्रशंसाओं और आलोचनाओं के चलते मिला-जुला रहा।

जहां एक ओर श्रीलंका और चीन में मानवाधिकार उल्लंघनों के मामलों से ठीक से न निपट पाने पर उनकी आलोचना हुई, वहीं जलवायु परिवर्तन, महिलाओं के अधिकार और पश्चिम एशिया में हाल ही में प्रदर्शनकारियों को कुचलने के विरोध में दी गई उनकी प्रतिक्रिया को सभी ने सराहा। लीबिया और आइवरी कोस्ट में सुरक्षा परिषद् के समर्थन से हुई निर्णायक कार्रवाई में भी उनकी भूमिका बहुत अहम रही।

बान के दोबारा चुने जाने का स्वागत करते हुए संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की राजदूत सुजैन राइस ने कहा कि कोई भी इस भूमिका की जिम्मेदारियों को उतने बेहतर तरीके से नहीं समझ सकता, जितना वह समझते हैं। हमारी सरकार इस बात को लेकर कृतज्ञ है कि वह इस भूमिका को आगे भी निभाने के इच्छुक हैं।

उन्होंने कहा कि महासचिव बान ऐसे नेता हैं, जो ऐसे लोगों की आवाज भी सुनते हैं, जिनकी आवाज कोई नहीं सुनता।