तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे भाषा के विशेषज्ञ पढ़कर कहें कि ये कलम का छोटा सिपाही ऐसा है तो भीष्म साहनी, प्रेमचंद, महादेवी वर्मा, जयशंकर प्रसाद, सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला', हरिवंश राय बच्चन, फणीश्वर नाथ रेणु आदि कैसे रहे होंगे... गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.

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राज की दर्द भरी शायरी

Sad Hindi Shayri and Dard SMS


लव शायरी: हिन्दी दर्द भरी शायरी

जिनकी आंखें आंसू से नम नहीं
क्या समझते हो उसे कोई गम नहीं
तुम तड़प कर रो दिये तो क्या हुआ
गम छुपा के हंसने वाले "राज" भी कम नहीं।

jinki ankhe aansu se nam nahi,
kya samajte ho use koi gum nahi,
tum tadapke ro diye to kya hua,
gum chupake hasne wale "राज" be kam nahi..

नसीब से फरियाद तो कर सकते हैं
वीरानों को आबाद तो कर सकते हैं
क्या हुआ आप से मिल नहीं सकते
एस एम एस भेज कर आप को याद तो कर सकते हैं।

Naseeb se fariyaad to kar sakte hai,
virano ko abaad to kar sakte hai,
kya hua apse mil nahi sakte,
SMS bhej kar apko yaad to kar sakte hai.

काश कोई "राज" पर प्यार जताता
हमारी आंखों को अपने होंठों से छुपाता
हम जब पूछते कौन हो तुम
मुस्कुरा कर वो अपने आप को हमारी जान बताता।

Kash koi hm par pyar jatata
Humari ankho ko apne hatho se chupati
Hm jb puchte kaun ho tum
Muskurakar vo apne aap ko humari Jaan batati!

हमारी खामोशी हमारी आहट है
हमारी आंखें हमारी चाहत हैं
हमारी जिंदगी अगर खूबसूरत है
तो उसकी वजह बस "राज" की मुस्कुराहट है।

Hamari khamoshi hamari aahat hai,
Humari aankhe hamari chahat hai,
Humari zindgi agar khubsurat hai
to uski vajah bas aapki muskurahat hai.

दोस्तों में जब दरार बढ़ जाती है
तड़पने के लिये सिर्फ याद रह जाती है
क्या फर्क पड़ता है कागज हो या कोयला
जलने के बाद "राज" सिर्फ याद रह जाती है।

Dosto me jab dooria badh jati hai,
tadapne k liye sirf yaad rah jaati hai,
kya fark padta h kagaj ho ya koyla,
jalne k bad sirf rakh rah jati hain.

पानी से तसवीर कहां बनती है
ख्वाबों से तकदीर कहां बनती है
किसी से दोस्ती करो तो सच्चे दिल से
क्य़ॊंकि "राज" जिंदगी फिर कहां मिलती है …!!!

paani se tasvir kahan banti hai,
khwabo se taqdeer kaha banti hai,
kisi se dosti karo to sachhe dil se,
kyunki ye zindagi phir kahan milti hai….!!!

हर सुबह को अपनी सांसों में रखो
हर शाम को अपनी बाहों में रखो
हर जीत "राज" की है बस
अपनी मंजिल को अपनी निगाहों में रखो।

Har Subah Ko Apni Sanso Me Rakho
Har Shaam Ko Apni Baahon Me Rakho
Har “JEET” Aapki Hai Bus
Apni “MANZIL”Ko Apni Nigaho Me Rakho

तू कहीं भी रहे सर पर तेरे इलजाम तो है
तेरे होंठों की लकीरों पे मेरा नाम तो है
मुझको अपना बना या ना बना
तू मेरे नाम से बदनाम तो है।

Tu kahi bhi rahe sar par tere ilzaam to he
tere hatho ki lakiro me mera naam to he
mujhko apna bana ya n bana
tu mere nam se badnam to he

ऐसा नहीं कि आप याद आते नहीं
खता सिर्फ इतनी है कि हम बताते नहीं
रिश्ता आपका अनमोल है हमारे लिये
समझते हो आप इसलिये हम जताते नहीं।

Aisa nahi k aap yaad aate nahi,
khata sirf itni hai k hum batate nahi,
rishta aapka anmol hai hamare liye,
samjhte ho aap isleye hum jatate nahi…

उसकी आंखों में "राज" ने वफा देखी थी
महकती फूलों कि अदा देखी थी
ये ना सोचा था वो बेवफा होगा
उसमें तो चाहत की इंतहा देखी थी।

Uske ANKHO me WAFA dekhi thi,
MEHEKTI phulo ki ADA dekhi thi.
Ye na SOCHA thA wo BEWAFA hoga,
usme to CHAHAT ki INTEHA dekhi thi.

इतना बिजी भी ना रहा करो
कभी हमें भी याद कर लिया करो
शेरो शायरी ना आती हो ना सही
आये हुए मैसेज ही "राज" फारवर्ड कर दिया करो

Itna busy b na raha karo,
kabhi hame bhi yaad kar liya karo.
Shero-Shayari na aati ho na sahi.
Aaye hue Message hi forward kar diya karo.

वो "राज" को पत्थर और खुद को
फूल कह कर मुस्कुराया करते हैं
उन्हें क्या पता कि पत्थर तो पत्थर ही रहते हैं
फूल ही मुरझा जाया करते हैं।

Wo Hum Ko Pathar or Khud Ko
Phool Keh Kar Muskaraya Karte Hai
Unhain Kya Pata Ki Patthar To Patthar Hi Rehte Hai
Phool Hi Murjaya Karte Hai.

आज कुछ कमी है तेरे बगैर
ना रंग है ना रोशनी है तेरे बगैर
वक्त अपनी रफ्तार से चल रहा है
बस धड़कन सी थमी है तेरे बगैर।

Aaj kuch kami hai tere bagair,
Na rang hai na roshni hai tere bagair.
Waqt apni raftar se chal raha hai,
Bas dhadkan si thami hai tere bagair.

मुद्दत से तमन्ना हुई अफसाना न मिला ……
हम खोजते रहे मगर ठिकाना न मिला …………..
लो आज फिर चली गई जिंदगी नजरो के सामने से ……
और उसे कोई रुकने का बहाना न मिला

ज़रूरी काम है लेकिन रोज़ाना भूल जाता हूँ,
"राज" को तुम से मोहब्बत है बताना भूल जाता हूँ,
तेरी गलियों में फिरना इतना अच्छा लगता है,
मैं रास्ता याद रखता हूँ ठिकाना भूल जाता हूँ।


गम ने हसने न दिया, ज़माने ने रोने न दिया! 
इस उलझन ने चैन से जीने न दिया! 
थक के जब सितारों से पनाह ली! 
नींद आई तो "राज" को तेरी याद ने सोने न दिया!


मैंने अपनी हर एक सांस तुम्हारी गुलाम कर रखी हैं .. 
लोगो मैं ये ज़िन्दगी बदनाम कर रखी हैं .. 
अब ये आइना भी क्या काम का मेरे … 
मैंने तौ अपनी परछाई भी तुम्हारे नाम कर रखी हैं ….


तेरी आवाज़ की शहनाइयों से प्यार करते हैं….. 
तस्सवुर मैं तेरे तन्हाईओं से प्यार करते हैं ….. 
जो मेरे नाम से तेरे नाम को जोड़े ज़माने वाले … 
अब "राज" उन चर्चों से प्यार करते हैं …

अपने लफ़्ज़ों से चुकाया है किराया इसका, 
दिलों के दरमियां यूँ मुफ्त में नहीं रहती, 
साल दर साल मै ही उम्र न देता इसको, 
तो ज़माने में मोहब्बत जवां नहीं रहती…

ज़िन्दगी हसीन है , ज़िन्दगी से प्यार करो ….. 
हो रात तो सुबह का इंतज़ार करो ….. 
वो पल भी आएगा, जिस पल का इंतज़ार हैं आपको…. 
बस रब पर भरोसा और वक़्त पे ऐतबार करो ….

किसी के दिल में बसना कुछ बुरा तो नही; 
किसी को दिल में बसाना कोई खता तो नही; 
गुनाह हो यह ज़माने की नजर में तो क्या; 
यह ज़माने वाले कोई खुदा तो नही!

कोई शायर तो कोई फकीर बन जाये; 
आपको जो देखे वो खुद तस्वीर बन जाये; 
ना फूलों की ज़रूरत ना कलियों की; 
जहाँ आप पैर रख दो वहीं कश्मीर बन जाये।

जब भी तेरे बिना रात होती हैं ….. 
दीवारों से अक्सर बात होती हैं ……… 
सन्नटा पूछता हैं हमारा हाल हम से …… 
और बस तेरे नाम से ही शुरुआत होती हैं …..

किसी के दिल मैं बसना बुरा तो नहीं … 
किसी को दिल मैं बसाना खता तो खता तो नहीं … 
है, ये ज़माने के नज़र मैं बुरा तो क्या हुआ .. 
ज़माने वाले भी इंसान हैं कोई खुद तो नहीं
राजेश मिश्रा, कोलकाता 


भूकंप के तेज झटकों से हिला देश, कई मरे

Photo - भूकंप की त्रासदी



Photo - भूकंप की त्रासदी
तेज भूकंप के झटकों से रविवार की शामनेपाल भूटान बांग्लादेश सहित करीब आधा हिंदुस्तानहिल उठा। नॉर्थ ईस्ट बंगाल यूपी बिहार झारखंड ,राजस्थान के साथ साथ एनसीआर में भी झटके महसूसकिए गए। रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 6.9 मापीगई। अभी लोग इससे संभले भी नहीं थे कि करीब 30मिनट बाद सिक्किम फिर भूकंप के झटके महसूस किए गए।इस बार इसकी तीव्रता 4.8 थी। दोनों भूकंप के केंद्रसिक्किम में ही थे। सिक्किम नॉर्थ बंगाल और उत्तरी बिहारमें जमीन धंसने की खबरें आ रही हैं। फोन सेवा ठप हो गईहै। राहत और बचाव कार्य के लिए सुरक्षाबल के जवानरवाना हो गए हैं। वायुसेना के विमान भी गंगटोक केलिए रवाना हो गए हैं। सिक्किम में भारी बारिश के कारणबचाव में राहतकार्य में दिक्कत आ रही है। 


यहाँ यानि कोलकाता में कोई ज्यादा क्षति तो नहीं हुई पर लोगों में दहशत ज्यादा बनी हुई है... यहाँ के लोग इसलिए चिंतित हैं क्योंकि यहाँ आज भी 20% मकान ऐसे हैं जो सैकड़ों वर्ष पुराने हैं और जर्जर स्थिति में हैं. यहाँ पर आज विश्वकर्मा पूजा मनाई जा रही है.. मैं भी थका मंदा थोड़ा आराम के मूड में था, संयों की बात है.की मैं 6 बजे बिस्तर पड़ गया था और 6 .10 यह घटना घटी..  फिस्तेदारों का फोन आना शुरू हो गया.. मैं तुरंत ऑफिस से संपर्क साधा तो कहा गया ज्यादा नुकसान नहीं है.. आप देर से आयें तब भी कम हो जायेगा.. लेकिन सिलीगुड़ी की स्थिति काफी ख़राब हैं.. वहां के कई क्षेत्र में बिजली नदारद हो गए हैं.. जलपाईगुडी में जेल का गेट और खिड़की टूट जाने से कैदियों में अफरातफरी का माहौल बन गया लेकिन नियंत्रित कर लिया गया. पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण चितित होना स्वाभाविक है... हाँ बंगाल में अब तक ३ लोग और पुरे देश से 20 यानि कुल 23 लोगों की मरने की खबर आ चुकी है..

भूकंप के बाद नेपाल में 9 लोगों के मरने की पुष्टि हो गई है। सिक्किम में 4 लोगों की मौत हो गई है और 50 से ज्यादा घायल हैं। बिहार के दरभंगा और नालंदा में 1-1 मौत की खबर है। पटना में एक 3 मंजीला इमारत गिर गई है। बिहार के कई जिलों से बिल्डिंग गिरने की खबरें आ रही हैं। नालंदा और कटिहार में 2-2 मकानों के गिरने की खबर आ रही है। चीन बॉर्डर के पास आईटीबीपी की 2 इमारतें गिर गई हैं। 







जमीन धंसने से रास्तों के बंद होने के कारण सिक्किम और दार्जीलिंग में कई सैलानी फंसे हुए हैं। 


रविवार की शाम बजकर 10 मिनट पर आए इस भूकंप से देश का करीब आधा हिस्सा हिल उठा। इसका केंद्रसिक्किम में गंगटोक से करीब 68 किलोमीटर दूर था। यह इलाका कंचनजंगा नैशनल पार्क में पड़ता है। भूकंप कीतीव्रता 6.9 मापी गई है। भूकंप का केंद्र जमीन से 20.7 किलोमीटर नीचे था। भूकंप ने नॉर्थ ईस्ट से लेकर राजस्थान तक को हिला दिया है। सिक्कम में ज्यादा तेज झटके आए हैं। सिक्किम में शाम बजकर 41 मिनट परदोबारा भूकंप के झटके महसूस किए गए। इस बार तीव्रता कम थी। प्रधानमंत्री में ने सिक्कम के सीएम से बातकरस्थिति का जायजा लिया है। साथ ही पीएम ने मदद का आश्वासन दिया। 

भूकंप के बाद सेना ने आपात बैठक बुलाई है। दिल्ली में आपदा प्रबंधन अथॉरिटी की भी बैठक चल रही है। 

सूत्रों के मुताबिक नॉर्थ ईस्ट बंगाल बिहार नेपाल और भूटान में इसके झटके ज्यादा महसूस किए गए। इनइलाकों में भूकंप के बाद लोगों में भय का वातावरण है। लोग अपने घरों से बाहर आ गए हैं। कोलकाता और नॉर्थईस्ट के कई जिलों से मकानों में दरार पड़ने की खबरें आ रही हैं। Photo - भूकंप की त्रासदीभूकंप के बाद कोलकाता और पटना में दहशत का वातावरण बन गया है। लोग घरों से बाहर निकल आए हैं।मंदिरों में पूजा अर्चना शुरू हो गई है। गौरतलब है कि करीब 10 दिन पहले दिल्ली एनसीआर में भी भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए थे। इसकाकेंद्र दिल्ली बॉर्डर से सटे सोनीपत में था। ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड के सीसमीक मैप के अनुसार दिल्ली को हाईरिस्क जोन में रखा गया है।

Why are baying for blood as his own


अपने ही खून के प्यासे
मेरठ से ख़बर मिली  कि वहां माल रोड पर एक आदमी ने अपने दोस्त के साथ मिलकर अपने दो मासूम बेटांे और पत्नी को काट डाला। अपने ही बच्चो का गले रेतते हुए इस ज़ालिम बाप को ज़रा भी तरस नहीं आया। पुलिस ने इस दर्दनाक हत्याकांड मंे बिना जांच के ही अवैध सम्बंधों का दावा कर केस की गंभीरता को कम करने का प्रयास किया।
अभी इस ख़बर की स्याही सूखी भी नहीं थी कि उरई से समाचार आया कि विदवा गांव में एक भाई ने अपने सगे भाई को कुल्हाड़ी से काट डाला। बताया जाता है यहंा दोनों भाइयों केे बीच प्रोपर्टी को लेकर विवाद चल रहा था। एक भाई ने जब दूसरे से सम्पत्ति बंटवारे पर ज़ोर दिया तो वह आपा खो बैठा और गुस्से में पागल होकर पास पड़ी कुल्हाड़ी से सगे भाई के खून से हाथ रंग लिये।
तीसरी ख़बर रामपुर के मिलक से आई है जिसमें तीन भतीजों ने मिलकर अपने चाचा को मौत के घाट उतार दिया। बताया जाता है कि काफी समय से परिवार के बीच शादी में न बुलाने को लेकर आपसी विवाद चल रहा था। एक भतीजा चाचा को मनाने गया तो नशे में देखकर चाचा ने उसको उल्टे पांव भगा दिया। विडंबना यह रही कि जो भतीजा मामले को निबटाने की नीयत से गया था वही खून ख़राबे की वजह बन गया।
हालांकि ये तीनों मामले यूपी के हैं और ऐसे अनेक मामले रोज़ ही हो रहे हैं लेकिन सब पुलिस और मीडिया तक नहीं पहंुचने से पूरे देश के आंकड़े इतने भयावह नहीं दिखाई पड़ते जितने कि खून के रिश्ते आज खून के प्यासे हो गये हैं। पति पत्नी के रिश्ते को हालांकि खून का नहीं माना जाता लेकिन जीवनभर साथ मरने साथ जीने की कसम खाने से यह रिश्ता भी खून के रिश्ते से कम अहम नहीं होता। फिर भी जब कोई पति अपनी पत्नी को मौत की नींद सुलाता है तो अकसर पुरूष प्रधान समाज मृतका के बारे में बिना जांच पड़ताल और ठोस सबूत के यह चर्चा शुरू कर देता है कि हत्या आरोपी की पत्नी के ज़रूर किसी पराये पुरूष से अवैध सम्बंध रहे होंगे। जिस तरह से बलात्कार के मामलों में अकसर मर्द औरतों की बोल्ड पौशाक को लेकर उत्तेजित करने का झूठा और घटिया आरोप उल्टे बलात्कार पीड़ित युवती या महिला पर ही लगाते हैं वैसे ही इन हत्याओं के मामलों में भी किया जाता है। अजीब बात यह है कि यहां पुलिस इस बहाने को मानने के लिये पहले से ही तैयार बैठी रहती है। पुलिस को इस तरह की कार्यशैली से एक तात्कालिक लाभ यह होता है कि जहां कानून व्यवस्था पर उठने वाली उंगली थम जाती है, वहीं पुलिस को यह कहने का बहाना मिल जाता है कि इस मामले में कानून एडवांस में क्या कर सकता है?
दरअसल पूंजीवाद और समाजवाद का अंतर धीरे धीरे हमारे सामने आने लगा है लेकिन दौलत और शौहरत के पुजारी मुट्ठीभर लोग इस सच्चाई को लगातार झुठलाने का प्रयास कर रहे हैं कि पैसा कमाने की होड़ समाज से रिश्ते नातों, धर्म, मर्यादा और नैतिकता को पूरी तरह ख़त्म करती जा रही है। पूंजीवाद के सबसे बड़े वैश्विक गढ़ अमेरिका की हालत दिन ब दिन पतली और समाजवाद के आज भी मज़बूत किले चीन की हालत लगातार मज़बूत होने से भी हमारी आंखे नहीं खुल रही हैं। सच यह है कि आज हम इतने स्वार्थी और एकांतवादी होते जा रहे हैं कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अपनी मनमानी करने के लिये हम रिश्तों नातों को कच्चे धागों की तरह तोड़ने में एक पल भी नहीं लगाते। अगर थोड़ा झगड़ा और रूठना मनाना होकर ये सम्बंध फिर से प्यार मुहब्बत की डोर में बंध जायें तो फिर भी आपसी तालमेल और साझा जीवन का एक रास्ता निकल सकता था लेकिन आज तो हालत यह हो गयी है कि साझा परिवार टूटते जा रहे हैं। कुछ लोग तो शादी से पहले ही लड़के के परिवार के सामने यह शर्त रख देते हैं कि उनकी लड़की शादी के बाद अलग रहना पसंद करेगी। वे यह कहते हुए ज़रा भी संकोच नहीं करते कि वे जिस परिवार से अपना रिश्ता जोड़ने जा रहे हैं उसको तोड़ने का प्रयास विवाह होने से पहले ही कर रहे हैं। कई परिवार तो इस शर्त को पहली बार में ही ठुकरा देते हैं लेकिन अधिकांश परिवार दहेज़ के लालच या किसी बड़े और प्रभावशाली खानदान से जुड़ने के मोह में यह नाजायज़ मांग स्वीकार कर लेते हैं।
अकसर यह भी देखने मंे भी आता है कि शादी के समय अगर यह शर्त न भी रखी जाये कि वधु अलग रहना चाहेगी तो यह पहले से ही मन बना होता है कि लड़की जब लड़के को अपनी मुट्ठी में कर लेगी तो यह कौनसा मुश्किल काम है कि लड़के को उसके परिवार से लेकर लड़की किसी कीमत पर भी अलग होने का अभियान शुरू कर दे। यहीं से अलगाव के बीज बो दिये जाते हैं। यह अजीब बात है कि लगभग सभी मांबाप अपनी लड़की को को यह समझाकर ससुराल भेजते हैं कि शादी के बाद अपने पति को अपने हिसाब से चलाने की पूरी कोशिश करना और मौका देखते ही अलग हो जाना जिससे सास ससुर और ननद, भावज, जेठ, जेठानी और देवर देवरानी की सेवा और ज़िम्मेदारी से बचा जा सके जबकि अपने घर आने वाली लड़के की बहू से सौ प्रतिशत यह आशा करते हैं कि वह अपने मायके को भूलकर लड़के के पूरे परिवार के हिसाब से चले। अगर अपने घर आई बहू लड़के को अलग करने के बारे में धेाखे से भी ज़बान खोले तो पूरी ससुराल उसके पीछे हाथ धेकर पड़ जाती है, जैसे उसने कोई बहुत बड़ा पाप कर दिया हो, लेकिन यही काम जब बाकायदा दूसरे घर जाकर उनकी कन्या करती है तो इस मुहिम को न केवल वध्ु पक्ष का पूरा समर्थन और आशीर्वाद होता है बल्कि उनके विचार और तर्क भी इस चाहत के पक्ष में हो जाते हैं। ये दो पैमाने ही आज खून के रिश्तों का खून होने के पीछे मौजूद हैं। जो भाई शादी से पहले अपने छोटे भाई को लक्ष्मण और बड़े भाई को राम का दर्जा देता है वही शादी के बाद उसके खून का प्यासा हो जाता है। ज़मीन जायदाद के बंटवारे की बात चल निकलती है और जब इसमें आनाकानी और मांबाप की तरफ से पक्षपात होता है तो फिर साज़िशें और नफ़रतें पनपने लगती हैं। जिन माता पिता के लिये उनका बेटा कभी आंख तारा हुआ करता था उनके लिये वह बोझ और मुसीबत बन जाता है। बात बढ़ते बढ़ते यहां तक जा पहंुचती है कि अपना हिस्सा अपनी मांग के हिसाब से न मिलने पर दोनों भाई न केवल लड़ने लगते हैं बल्कि एक दिन गाली गलौच और मारपीट के बाद मामला थाने तहसील पहुंच जाता है। यही हाल माता पिता में से अधिकांश मामलों में पिता के साथ होता है। अदालत में मुकद्मा शुरू होने के बाद बोलचाल तक बंद हो जाती है। उसके बाद दोनो पक्ष आपस में एक दूसरे से रंजिश रखने लगते हैं। यह पता ही नहीं चलता कि कब खून के रिश्ते एक दूसरे के खून के प्यासे हो गये। हर किसी को यह लगता है कि दूसरा उसको समझता ही नहीं । साथ साथ यह भी दुहायी दी जाती है कि उसकी ज़रूरत और भावनाओं का ख़याल नहीं रखा जा रहा है जबकि यह शिकायत करते समय वह खुद यह भूल जाता है कि उसने दूसरों की परवाह की है या वह खुद भी ‘मैं, मेरा और मेरा परिवार’ के एक सूत्रीय कार्यव्रफम पर चल रहा है। इसके बाद यह दरार यहीं ख़त्म नहीं होती बल्कि इस संकीर्णता और स्वार्थ का भी विस्तार होता है। दर्जन दो दर्जन से चार पांच लोगों की छोटी यूनिट में आध्ुनिक प्रगतिशील माता पिता के बोल्ड सोच के बच्चे चाहते हैं कि उनका अपना निजी कमरा, फोन, टीवी और अलग कंप्यूटर हो। कमरे में अटैच टॉयलेट बाथरूम हो। उनका कौन दोस्त या सहेली कब उनसे मिलने आये उसपर घर के लोगों की न केवल नज़र न हो बल्कि इस बारे में उनसे कोई सवाल तक न करे कि कौन कहां से कब क्यों उनसे मिलने आता है?
इस मामले में बहनों का मामला और पेचीदा है जहां वे अपना हक़ सम्पत्ति में मांग लेती है वहां उनको हिस्सा तो अकसर मिलता ही नहीं साथ ही परिवार से उनका बहिष्कार और शुरू हो जाता है। भाई ही नहीं प्रायः मातापिता भी अकसर ऐसा ही करते हैं। इस चक्कर में न केवल उनसे रिश्ता नाता ख़त्म कर दिया जाता है बल्कि मामला कभी कभी जीजा जी के सर थोपकर उनकी हत्या तक कर दी जाती है। हालांकि कुछ लोग जीजा साले के रिश्ते को खून का नहीं मानते लेकिन जिस रिश्ते से बहन बंधी हो उसमें बहनोई का सम्बंध सीधे न सही अप्रत्यक्ष रूप से खून से तो जुड़ ही जाता है। स्पश्ट है कि जब रिश्ता खून से जुड़ जाता है तो भौतिक विवादों को लेकर उनका भी वैसा ही हश्र होता है जैसा वास्तविक खून के रिश्तों का होता है। इसको और गहराई से समझना चाहें तो चचेरे, तयेरे और ममेरे भाइयों का भी पैसे और प्रोपर्टी के बंटवारे को लेकर यही हाल होता है।
कहने का मतलब यह है कि जब हम पूंजीवादी व्यवस्था में जी रहे हैं तो उसकी बुराइयां और कमियां भी हमको झेलनी होगी। यह नहीं हो सकता कि हम गुड़ खायें और गुलगुलों से परहेज़ करें। शिक्षा के साथ साथ जब तक हम सही शिक्षा, समाज व नैतिकता के बारे में नहीं सोचेंगे तब तक खून के रिश्तों का खून ऐसे ही नहीं बहता रहेगा बल्कि यह वारदातें और ख़तरनाक हादसे बढ़ते ही जायेंगे। एक शायर की चार लाइनें यहां पेश हैं-
0 अजीब लोग हैं क्या खूब मुंसफी की है,
हमारे क़त्ल को कहते हैं खुदकशी की है।
इसी लहू में तुम्हारा सफीना डूबेगा,
ये क़त्ल नहीं तुमने खुदकशी की है।।

As of 80 trillion ...

80 लाख करोड़ का सवाल है ...


इसे इतना फॉरवर्ड करो की हर भारतीय पढ़े ...



SWIS BANK
भारतीय गरीब है लेकिन भारत देश कभी गरीब नहीं रहा"* ये कहना है स्विस बैंक के डाइरेक्टर का. स्विस बैंक के डाइरेक्टर ने यह भी कहा है कि भारत का लगभग 280 लाख करोड़ रुपये उनके स्विस बैंक में जमा है. ये रकम इतनी है कि भारत का आने वाले 30 सालों का बजट बिना टैक्स के बनाया जा सकता है. या यूँ कहें कि 60 करोड़ रोजगार के अवसर दिए जा सकते है. या यूँ भी कह सकते है. कि भारत के किसी भी गाँव से दिल्ली तक 4 लेन रोड बनाया जा सकता है. ऐसा भी कह सकते है कि 500 से ज्यादा सामाजिक प्रोजेक्ट पूर्ण किये जा सकते है. ये रकम इतनी ज्यादा है कि अगर हर भारतीय को 2000 रुपये हर महीने भी दिए जाये तो 60 साल तक ख़त्म ना हो. यानी भारत को किसी वर्ल्ड बैंक से लोन लेने कि कोई जरुरत नहीं है. जरा सोचिये ... हमारे भ्रष्ट राजनेताओं और नोकरशाहों ने कैसे देश को लूटा है और ये लूट का सिलसिला अभी तक 2011 तक जारी है. इस सिलसिले को अब रोकना बहुत ज्यादा जरूरी हो गया है. अंग्रेजो ने हमारे भारत पर करीब 200 सालो तक राज करके करीब 1 लाख करोड़ रुपये लूटा. मगर आजादी के केवल 64 सालों में हमारे भ्रस्टाचार ने 280 लाख करोड़ लूटा है. एक तरफ 200 साल में 1 लाख करोड़ है और दूसरी तरफ केवल 64 सालों में 280 लाख करोड़ है. यानि हर साल लगभग 4.37 लाख करोड़, या हर महीने करीब 36 हजार करोड़ भारतीय मुद्रा स्विस बैंक में इन भ्रष्ट लोगों द्वारा जमा करवाई गई है. भारत को किसी वर्ल्ड बैंक के लोन की कोई दरकार नहीं है. सोचो की कितना पैसा हमारे भ्रष्ट राजनेताओं और उच्च अधिकारीयों ने ब्लाक करके रखा हुआ है. हमे भ्रस्ट राजनेताओं और भ्रष्ट अधिकारीयों के खिलाफ जाने का पूर्ण अधिकार है. हाल ही में हुवे घोटालों का आप सभी को पता ही है - CWG घोटाला, २ जी स्पेक्ट्रुम घोटाला , आदर्श होउसिंग घोटाला ... और ना जाने कौन कौन से घोटाले अभी उजागर होने वाले है ........आप लोग जोक्स फॉरवर्ड करते ही हो. इसे भी इतना फॉरवर्ड करो की पूरा भारत इसे पढ़े ...

WHAT IS THIS : SHARM AATI HAI... YAHAN KI GOVT. PAR

  

 
VERY POOR : THIS IS INDIA MERI JAAN

pyade bahut mile magar wazir na mila


प्यादे बहुत मिले मगर वज़ीर न मिला



प्यादे बहुत मिले मगर वज़ीर न मिला
सबकुछ लुटा दे ऐसा दानवीर न मिला।
जिसे दरम चाहिए न चाहिए दीनार
ऐसा कोई मौला या फकीर न मिला।
अपनी फकीरी में ही मस्त रहता हो
फिर ऐसा कोई संत कबीर न मिला।
प्यार के किस्से सारे पुराने हो चले
अब रांझा ढूंढता अपनी हीर न मिला।
जख्म ठीक कर दे जो बिना दवा के
राजेश मिश्रा 
हमें ऐसा मसीहा या पीर न मिला।
खुद ही उड़ कर लग जाए माथे से
ऐसा भी गुलाल और अबीर न मिला।
किस्मत को कोसते हुए सारे मिले
लिखता कोई अपनी तकदीर न मिला।

धूप भी प्यार का ही एहसास है
लगता है जैसे कोई आस पास है।
सत्येन्द्र गुप्ता
सत्येन्द्र गुप्ता
पहाड़ों का दिल चीर देती है रात
दिन का होना सुख का एहसास है।
गुलाबी ठंड के साथ ताप जरूरी है
दर्द ही रौशनी का भी विश्वास है।
अर्श से फर्श पर आना आसान है
फर्श से अर्श तक जाना ही खास है।
चाँद के चेहरे पर दर्द पसरा है
रेत का बिस्तर चांदनी का वास है।
यह कहानी भी हमे सदा याद है
आँखों को आंसुओं की प्यास है।
सीमाएं अपनी जानता हूँ मैं
जबतक सांस है दिल में आस है।
वो मुझे पूछते हैं मेरा ही वजूद
प्यार करना ही मेरा इतिहास है।
काम मेरा रुका कभी भी नहीं
उस पर मुझे इतना विश्वास है।

वक़्त नहीं है कहते कहते वक़्त निकल गया
जुबान से हर वक़्त यही जुबला फिसल गया।
दिल से सोचने का कभी वक़्त नहीं मिला
दिमाग से सोचने में सारा वक़्त निकल गया।
खून के रिश्तों की बोली पैसों में लग गई
निज़ाम जमाने का किस क़दर बदल गया।
बुलाने वाले ने बुलाया हम ही रुके नहीं
अब तो वह भी बहुत आगे निकल गया।
हमें तो खा गई शर्त साथ साथ रहने की
वह शहर में रहा और घर ही बदल गया।
दिल मोम का बना है नहीं बना पत्थर का
जरा सी आंच पाते एक दम पिघल गया।
इतना प्यार हो गया है इस जिस्म से हमे
चोट खाकर दिलफिर झट से संभल गया।
तुम मिले मुझ को कुछ ऐसी अदा से
ग़ज़ल को मेरी खुबसूरत मिसरा मिल गया।
(संकलन : राजेश मिश्रा, लेखक : सत्येद्र गुप्ता, प्रवक्ता.कॉम)


Har ek dil ko zuba nahi milti

H$s

Har ek dil ko zuba nahi milti ,

har ek aarzu ko dua nahi milti ,
muskan banaye rakhiye to duniya saath hai ,
aasuuo ko to aankhon mein bhi panah nahi milti.

Har aahat ehsas hamara dilayegi.
Har hawa kissa hamara dohrayegi.
Hum itani yaden bhar denge aapke dil me.
Ki na chahte huve v hamari yaad ayegi...
RAJESH MISHRA


हर  एक  दिल  को  जुबा  नहीं  मिलती

हर एक दिल को जुबा नहीं मिलती,
हर एक आरजू को दुआ नहीं मिलती,
मुस्कान बनाये रखिये तो दुनिया साथ है,
आसूओं को तो आँखों में भी पनाह नहीं मिलती...


हर आहात एहसास हमारा दिलाएगी.
हर हवा किस्सा हमारा दोहराएगी.
हम इतनी यादें भर देंगे आपके दिल में.
की ना चाहते हुए भी हमारी याद आयेगी ...राजेश मिश्रा

gair ko dard batane ki jarurat kya hai

gair ko dard batane ki jarurat kya hai__ 
apne jhgade me jamane ki jarurat kya hai__ 
zindagi waise bhi kam hai mohbbat ke liye__ 
ruthkar waqt gawane ki jarurat kya hai___